गोरखपुर/शामली: उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक और नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पानीपत-शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे (Panipat-Shamli-Gorakhpur Expressway) पर कागजी कार्रवाई और जमीनी सर्वे का काम शुरू हो गया है। यह एक्सप्रेसवे न केवल उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी छोर को जोड़ेगा, बल्कि हरियाणा के पानीपत तक सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इसके बनने से गोरखपुर से पानीपत तक का सफर तय करने में करीब 7 से 8 घंटे कम समय लगेगा, जो व्यापार और पर्यटन दोनों के लिहाज से गेम-चेंजर साबित होगा।READ ALSO:-Aadhaar Card New Rules: यूपी में बड़ा बदलाव, अब जन्म तिथि के सबूत के लिए 'आधार कार्ड' नहीं होगा मान्य; जानें किन कामों पर पड़ेगा असर
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मार्च 2026 तक अधिसूचना जारी होने की उम्मीद

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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस मेगा प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की दिशा में तेजी दिखाई है। अधिकारियों के मुताबिक, डीपीआर को अंतिम रूप देने के बाद राज्य सरकार के साथ बैठक होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि पानीपत-शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना मार्च 2026 तक जारी कर दी जाएगी।
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अधिसूचना जारी होते ही इस प्रोजेक्ट के दायरे में आने वाले 22 जिलों और 37 तहसीलों में NHAI अधिकारियों की नियुक्ति करेगा, जिसके बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी। करीब 700 से 750 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होगा, जो गंगा एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी बड़ा होगा।
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NHAI अयोध्या को मिली कमान, रूट में हुआ बदलाव

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इस प्रोजेक्ट में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। पहले इस एक्सप्रेसवे के सर्वे और निर्माण की जिम्मेदारी NHAI की रायबरेली यूनिट के पास थी, जिसे अब NHAI अयोध्या यूनिट को सौंप दिया गया है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को 'गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे' के रूप में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए इसे हरियाणा के पानीपत तक बढ़ा दिया गया है।
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पुराने प्रस्ताव के अनुसार, इसका रूट गोरखपुर से बस्ती, गोंडा होते हुए सीतापुर जाना था। लेकिन अब नए एलाइनमेंट के तहत पानीपत-शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे नेपाल सीमा (Nepal Border) के पास के जिलों को कवर करेगा। नया रूट लखनऊ, सीतापुर, बरेली और मेरठ होते हुए शामली और फिर पानीपत तक जाएगा। यह एक्सप्रेसवे आगे चलकर गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से भी जुड़ जाएगा, जिससे बिहार और पश्चिम बंगाल तक का सफर आसान हो जाएगा।
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इन 22 जिलों को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

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इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा उन जिलों को होगा जो अब तक किसी बड़े एक्सप्रेसवे से नहीं जुड़े थे। पानीपत-शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण से निम्नलिखित 22 जिले आपस में जुड़ेंगे: गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा, लखनऊ (बाहरी क्षेत्र), सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बरेली, रामपुर, संभल, अमरोहा, मुरादाबाद, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर (कनेक्टिविटी के जरिए)। अंत में यह हरियाणा के पानीपत में मिलेगा।
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आर्थिक विकास और रोजगार को मिलेगी रफ्तार

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इस एक्सप्रेसवे के बनने से केवल यातायात सुगम नहीं होगा, बल्कि यह आर्थिक गलियारे (Economic Corridor) के रूप में काम करेगा। नेपाल सीमा से सटे तराई वाले जिलों में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। माल ढुलाई (Logistics) की लागत कम होगी और समय की बचत होगी। इसके अलावा, औद्योगिक शहरों और छोटे कस्बों की कनेक्टिविटी बढ़ने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़ कम होगी, जिससे हादसों में भी कमी आने की संभावना है।
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पानीपत-शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। जिस तरह से NHAI और राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट पर गंभीरता दिखा रही है, उससे साफ है कि आने वाले कुछ सालों में यूपी का रोड नेटवर्क देश में सबसे बेहतरीन होगा। फिलहाल सबकी निगाहें मार्च 2026 पर टिकी हैं, जब इस प्रोजेक्ट की औपचारिक अधिसूचना जारी होगी।
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पानीपत से गोरखपुर तक बनने वाले यूपी के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे का काम शुरू हो गया है। 750 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट की अधिसूचना मार्च 2026 तक आ सकती है। इसके बनने से 22 जिलों को फायदा होगा और यात्रा का समय 8 घंटे तक घट जाएगा।
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