गाजियाबाद में बीमा पॉलिसी रिन्यूअल के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाने की संयुक्त पुलिस टीम ने एक ऐसे Ghaziabad Cyber Fraud गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने फर्जी विज्ञापनों का सहारा लेकर लोगों से 40 लाख रुपये से अधिक की रकम हड़प ली। पुलिस ने इस मामले में 7 जालसाजों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य सरगना अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

टाटा एआईजी के नाम पर फर्जी गूगल विज्ञापन डीसीपी क्राइम बलवंत चौधरी के अनुसार, यह गिरोह गूगल और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था। जालसाज टाटा एआईजी इंश्योरेंस के नाम से फर्जी विज्ञापन चलाते थे और नकली ई-मेल आईडी का इस्तेमाल करते थे। जब कोई ग्राहक अपनी पॉलिसी रिन्यू कराने के लिए इन विज्ञापनों पर दिए गए नंबरों पर कॉल करता, तो आरोपी उन्हें प्रीमियम में भारी छूट का झांसा देते थे।

आरोपियों के पास से 4 मोबाइल फोन, 2 एटीएम/डेबिट कार्ड, 2 चेकबुक, एक पासबुक और 3 हजार रुपए बरामद किए गए हैं।

पैसों का भुगतान बैंक खाते में होने के बाद, ये शातिर अपराधी फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से जाली बीमा प्रमाणपत्र बनाते थे और ग्राहक को ई-मेल कर देते थे। ग्राहकों को अपने साथ हुए धोखे का एहसास तब होता था, जब वे असली प्रमाणपत्र की जांच कराते थे।

डासना जेल से शुरू हुई नेटवर्क की कहानी पुलिस जांच में सामने आया है कि इस हाई-टेक साइबर ठगी की पटकथा गाजियाबाद की डासना जेल में लिखी गई थी। गिरोह के मास्टरमाइंड दीपक खन्ना (उर्फ डीजे) और गिरफ्तार आरोपी राहुल कुमार की पहली मुलाकात जेल में ही हुई थी। जमानत पर बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर यह ठगी का सिंडिकेट खड़ा किया। पुलिस के मुताबिक, राहुल पर विभिन्न थानों में 9 मामले दर्ज हैं, जबकि फरार सरगना दीपक पर 3 मामले हैं।

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कॉल सेंटर की ट्रेनिंग और बैंक खातों का खेल इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए तकनीकी जानकारी का भी भरपूर इस्तेमाल किया गया। पुलिस के अनुसार, तीन आरोपी नीरज भाटी (2 मामले दर्ज), नीरज सोलंकी और विक्रांत सिंह पहले दिल्ली के एक कॉल सेंटर में काम कर चुके थे। वहीं से उन्होंने पॉलिसी के नाम पर ठगी के तरीके सीखे और राहुल के माध्यम से सरगना दीपक के संपर्क में आए।

कमीशन के लालच में विक्रम सिंह (उर्फ विक्की) ने ठगी की रकम मंगाने के लिए बैंक खातों का इंतजाम किया। उसने अपने अलावा सुशील कुमार (2 मामले दर्ज) और नितिन के नाम से भी खाते खुलवाए और उनकी डिटेल दीपक को सौंप दी।

डिजिटल साक्ष्य और नकदी बरामद पुलिस ने इस कार्रवाई में नीरज भाटी, नीरज सोलंकी, विक्रम सिंह, नितिन, सुशील कुमार, राहुल कुमार और विक्रांत सिंह को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 4 मोबाइल फोन, 2 एटीएम/डेबिट कार्ड, 2 चेकबुक, एक पासबुक और 3 हजार रुपये की नकदी बरामद की गई है। मोबाइल फोन की जांच में फर्जी विज्ञापन, नकली बीमा प्रमाणपत्र और ई-मेल से जुड़े कई अहम डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस के हाथ लगे हैं। फिलहाल पुलिस फरार सरगना दीपक खन्ना की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

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