उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक और बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। समाजवादी पार्टी से बगावत कर चुके तीन विधायक—राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी—14 अक्टूबर को भाजपा में शामिल हो सकते हैं। तीनों के नाम भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं की सूची में सामने आए हैं। 

इनमें गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह की भाजपा में एंट्री सबसे ज्यादा स्पष्ट है। राकेश प्रताप सिंह ने खुद घोषणा की है कि वह 14 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे गौरीगंज स्थित अपने निजी आवास 'मंगलम' में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए क्षेत्र के लोगों, समर्थकों और कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता भी दिया है। 

कौन-कौन विधायक भाजपा में शामिल होंगे?

रिपोर्टों के मुताबिक, राकेश प्रताप सिंह के साथ अयोध्या की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी भी भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं। अमेठी में होने वाले कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी की बात कही जा रही है। 

राकेश प्रताप सिंह की जॉइनिंग की घोषणा स्वयं उनके द्वारा किए जाने के कारण इस हिस्से की पुष्टि ज्यादा स्पष्ट है। वहीं तीनों की एक साथ औपचारिक सदस्यता ग्रहण की जानकारी फिलहाल मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।

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राकेश प्रताप सिंह का सपा से भाजपा तक सफर

राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2012 में पहली बार सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद 2017 और 2022 में भी उन्होंने गौरीगंज सीट पर जीत दर्ज की।

फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान राकेश प्रताप सिंह ने सपा के घोषित रुख से अलग जाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद सपा से उनकी दूरी और बढ़ गई। जून 2025 में सपा ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था। इसके बाद वह विधानसभा में अनअटैच्ड विधायक के तौर पर रहे। 

भाजपा में जाने की वजह पर क्या बोले राकेश प्रताप?

भाजपा में शामिल होने की वजह बताते हुए राकेश प्रताप सिंह ने सपा नेतृत्व और उसकी राजनीति पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने परिवारवाद और जातिवाद को लेकर सपा पर निशाना साधा।

राकेश प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि वह ऐसी राजनीतिक व्यवस्था के साथ काम नहीं कर सकते, जहां रामचरितमानस और सनातन धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां हों। ये उनके राजनीतिक बयान और भाजपा में जाने के बताए कारण हैं, जिन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए। 

उन्होंने सपा के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि पार्टी इन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दे रही है। यह भी राकेश प्रताप सिंह का राजनीतिक आरोप है, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य। 

अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी की भी एंट्री?

अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी का नाम भी 14 अक्टूबर के भाजपा सदस्यता कार्यक्रम से जुड़ा है। दोनों उन सपा विधायकों में शामिल रहे थे जिन्होंने 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी।

तीनों नेताओं की भाजपा में औपचारिक एंट्री होती है तो विधानसभा चुनाव से पहले यह यूपी की सियासत में महत्वपूर्ण दल-बदल माना जाएगा। हालांकि इसके राजनीतिक प्रभाव का आकलन अभी केवल संभावित स्तर पर ही किया जा सकता है।

14 अक्टूबर को क्या होगा?

राकेश प्रताप सिंह के अनुसार, 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे गौरीगंज स्थित उनके आवास 'मंगलम' में सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम होगा। रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी समेत कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी की संभावना है। 

अब नजर 14 अक्टूबर के कार्यक्रम पर है। इसी दिन स्पष्ट होगा कि राकेश प्रताप सिंह के साथ अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भी औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता लेते हैं या नहीं।

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