उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत एक नया विवाद सामने आया है। Hapur News के मुताबिक, धौलाना विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय (पूर्व माध्यमिक विद्यालय) हसनपुर के इंचार्ज प्रधानाध्यापक तसनीम अली खान (मौलाना तस्लीम अली खान) ने अपना अतिरिक्त प्रभार छोड़ने की पेशकश की है। उन्होंने धौलाना के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) पंकज चतुर्वेदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर खुद को इस दायित्व से मुक्त करने का अनुरोध किया है। हालांकि, मामले में शिकायतकर्ता पक्ष ने इसे विभागीय जांच से बचने का एक सोचा-समझा पैंतरा करार दिया है।

इंचार्ज प्रधानाध्यापक का पक्ष: सहयोग का अभाव और मीडिया ट्रायल बीईओ को सौंपे गए पत्र में तसनीम अली खान ने स्पष्ट किया है कि विद्यालय में लंबे समय से असहज माहौल बना हुआ है। उनका दावा है कि कुछ साथी शिक्षकों द्वारा उन्हें आवश्यक प्रशासनिक सहयोग नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने शोषित क्रांति दल पर आरोप लगाया है कि संगठन द्वारा सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक मंचों पर बिना पर्याप्त सबूतों के विद्यालय से जुड़ी भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं।

खान का कहना है कि इन लगातार लग रहे आरोपों के कारण विभाग बार-बार स्पष्टीकरण मांगता है, जिससे शिक्षण कार्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना बेहद मुश्किल हो गया है। इसी मानसिक दबाव का हवाला देते हुए उन्होंने किसी अन्य योग्य शिक्षक को यह प्रभार सौंपने की गुहार लगाई है।

शोषित क्रांति दल का पलटवार: जांच से बचने की साजिश इस पूरे प्रकरण की जड़ में शोषित क्रांति दल द्वारा की गई शिकायतें हैं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने इंचार्ज प्रधानाध्यापक के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है। उन्होंने हापुड़ की मुख्य विकास अधिकारी (CDO) श्रुति शर्मा, जिलाधिकारी (DM) कविता मीणा, मेरठ की अपर निदेशक बेसिक (AD Basic) ऐश्वर्या लक्ष्मी, मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और सूबे के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह तक अपनी लिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं।

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तसनीम अली खान के पत्र के बाद रविकांत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह कदम केवल विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए उठाया गया है। संगठन का तर्क है कि उच्च स्तर पर साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद जब शिक्षक ने खुद को घिरता देखा, तो प्रभार छोड़ने का यह दांव चला। उन्होंने मांग की है कि केवल पद छोड़ना काफी नहीं है, बल्कि लगाए गए आरोपों की गहन और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अधिकारियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी धौलाना की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। चर्चा है कि प्रभारमुक्ति का पत्र प्राप्त होने के बावजूद बीईओ पंकज चतुर्वेदी ने अब तक शिक्षक को दायित्व से मुक्त नहीं किया है। स्थानीय लोगों और संगठन का मानना है कि विभाग जानबूझकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल रहा है। अब सबकी नजरें बेसिक शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों पर हैं कि वे इस मामले में निष्पक्ष प्रशासनिक जांच के आदेश देते हैं या केवल प्रभार बदलकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।

Disclaimer: यह समाचार शोषित क्रांति दल द्वारा दी गई शिकायतों और इंचार्ज प्रधानाध्यापक द्वारा बीईओ को लिखे गए पत्र के आधार पर तैयार किया गया है। खबरीलाल न्यूज़ पोर्टल किसी भी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। पूरे मामले की आधिकारिक सत्यता विभागीय जांच के अधीन है।

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