हाथरस (सिकंदराराऊ): उत्तर प्रदेश में चुनावी कार्यों और सरकारी योजनाओं के दबाव के बीच एक और दुखद खबर सामने आई है। हाथरस जिले के सिकंदराराऊ इलाके में मंगलवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। यहाँ हाथरस में बीएलओ की मौत (BLO Death in Hathras) ने पूरे प्रशासनिक अमले को हिला कर रख दिया है। सहायक अध्यापक और बीएलओ (Booth Level Officer) के पद पर कार्यरत कमलकांत शर्मा चाय पीते-पीते अचानक बेहोश होकर गिर पड़े और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि वह काम के अत्यधिक दबाव (Work Pressure) के कारण तनाव में थे।READ ALSO:- मेरठ: 'मैं नर्वस हो गया था...', सुहागरात पर 'बल्ब' लेने निकला दूल्हा 4 दिन बाद हरिद्वार में मिला, बताई भागने की असली वजह\r\n

 

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चाय की चुस्की बनी आखिरी पल

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घटना सिकंदराराऊ के ब्राह्मणपुरी मोहल्ले की है। 40 वर्षीय कमलकांत शर्मा, जो नावली लालपुर संविलियन विद्यालय में सहायक अध्यापक थे, बीएलओ की ड्यूटी भी निभा रहे थे। उनके बेटे विनायक ने बताया कि पिता घर की पहली मंजिल पर अपना सरकारी काम निपटा रहे थे। सुबह करीब 7:30 बजे वह चाय पीने के लिए नीचे आए।
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विनायक ने बताया, "मां नानी के घर गई थीं, इसलिए दादी ने चाय बनाई थी। पापा चाय पी ही रहे थे कि अचानक उन्हें चक्कर आया और वह वहीं गिर पड़े।" आनन-फानन में परिजन उन्हें लेकर इलाज के लिए अलीगढ़ की तरफ भागे, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है।
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डीएम का मानवीय चेहरा: एक दिन की सैलरी से करेंगे मदद

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घटना की सूचना मिलते ही हाथरस के जिलाधिकारी (DM) अतुल वत्स और एसपी निपुण अग्रवाल तुरंत बीएलओ के घर पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी। डीएम अतुल वत्स ने एक बड़ी पहल करते हुए घोषणा की कि जिला प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।
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डीएम ने कहा, "यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम सभी अधिकारी अपनी एक दिन की सैलरी (One day salary) काटकर पीड़ित परिवार को देंगे। इस राशि से कमलकांत के चारों बच्चों के नाम एफडी (Fixed Deposit) कराई जाएगी।" इसके अलावा, डीएम ने मृतक की पत्नी को उनकी योग्यता (12वीं पास) के अनुसार नौकरी दिलाने और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का भी आश्वासन दिया।
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काम का दबाव या बीमारी?

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कमलकांत की मौत के बाद एक बार फिर बीएलओ पर काम के दबाव का मुद्दा गरमा गया है। परिजनों का कहना है कि वे काम को लेकर काफी तनाव में थे। हालांकि, डीएम अतुल वत्स ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा, "कमलकांत एक बेहतरीन कर्मचारी थे। मैंने चेक कराया है, उन पर किसी तरह का 'अंडर प्रेशर' (Under Pressure) नहीं था। आज सुबह उन्हें कमजोरी महसूस हो रही थी। मौत की असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।"
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यूपी में लगातार हो रही बीएलओ की मौतें: एक चिंताजनक ट्रेंड

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हाथरस में बीएलओ की मौत कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसी ही खबरें आ रही हैं, जो चिंता का विषय हैं।
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    बरेली: प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक और बीएलओ सर्वेश कुमार गंगवार की हार्ट अटैक से मौत हुई थी। परिवार ने काम के बोझ को वजह बताया था।
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    बिजनौर: महिला बीएलओ शोभारानी की रात में ऑनलाइन काम करते समय कार्डियक अरेस्ट से जान चली गई।
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    गोंडा: बीएलओ विपिन यादव ने काम के दबाव में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
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    फतेहपुर: लेखपाल सुधीर कुमार ने सगाई के ठीक बाद आत्महत्या कर ली थी, उनकी ड्यूटी भी वोटर लिस्ट पुनरीक्षण में लगी थी।
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कमलकांत शर्मा की मौत ने एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर शिक्षकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त कार्यभार पर सवालिया निशान लगा दिया है। हालांकि प्रशासन ने मदद का हाथ बढ़ाया है, जो सराहनीय है, लेकिन लगातार हो रही इन घटनाओं ने सिस्टम को सोचने पर मजबूर कर दिया है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट का इंतजार है।
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हाथरस के सिकंदराराऊ में बीएलओ कमलकांत शर्मा की चाय पीते समय अचानक मौत हो गई। परिजनों ने काम के दबाव को कारण बताया है, जबकि डीएम ने इसे खारिज करते हुए मदद की घोषणा की है। अधिकारी अपनी एक दिन की सैलरी परिवार को देंगे। इससे पहले बरेली, बिजनौर और गोंडा में भी बीएलओ की मौत की खबरें आ चुकी हैं।
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