पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती आतंकी घटनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए यह कदम उठाया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई संघीय कैबिनेट की बैठक में इमरजेंसी और गवर्नर शासन की सिफारिश की गई, जिसे राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने मंजूरी दे दी।

संविधान के तहत गवर्नर शासन

पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत यह कदम उठाया गया है। इसके बाद प्रांत का प्रशासन गवर्नर के अधीन आ गया है। शुरुआती व्यवस्था छह महीने के लिए बताई गई है।

इमरान खान की पार्टी ने क्या कहा?

PTI ने फैसले का विरोध किया

PTI ने इस फैसले का विरोध किया है। पार्टी के प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने इसे लोकतांत्रिक जनादेश पर हमला बताते हुए छिपे हुए तख्तापलट जैसा कदम करार दिया। पार्टी का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा में उसकी सरकार को जनता ने चुना था और केंद्र का फैसला राजनीतिक टकराव को बढ़ा सकता है।

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वहीं, संघीय सरकार का आरोप है कि प्रांतीय सरकार आतंकवाद से निपटने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही थी। PTI इन आरोपों को खारिज करती रही है।

इमरान खान की रिहाई के लिए विरोध मार्च

इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उनकी रिहाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में PTI समर्थक विरोध मार्च निकाल रहे हैं। पार्टी ने इस अभियान के तहत इस्लामाबाद तक मार्च करने की तैयारी की थी।

तनाव बढ़ने और विरोध की संभावना

इमरजेंसी लागू होने से केंद्र और PTI के बीच पहले से जारी राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। अब इस फैसले को लेकर कानूनी और राजनीतिक विरोध की संभावना है। हालांकि, आगे की कार्रवाई और शासन व्यवस्था में होने वाले बदलावों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

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