कानपुर (Kanpur News): उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से गुरुवार को एक बेहद दुखद और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई। यहां आसमान में उड़ता हुआ एक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट अचानक मौत के मलबे में तब्दील हो गया। कानपुर के चकेरी स्थित प्रतिष्ठित 'गर्ग एविएशन ट्रेनिंग सेंटर' (Garg Aviation Training Center) का एक 4-सीटर 'टेक्नम' ट्रेनिंग विमान उड़ान भरने के महज 20 मिनट बाद ही अनियंत्रित होकर क्रैश हो गया।READ ALSO:-Amazon, Swiggy Instamart और BigBasket पर सरकार की डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक: ऑनलाइन जहरीला धतूरा बेचने पर तीनों कंपनियों के फूड लाइसेंस सस्पेंड
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इस भीषण हादसे में विमान में सवार इंस्ट्रक्टर (पायलट) और एक ट्रेनी की दर्दनाक मौत हो गई है। यह हादसा गंगा बैराज के पास स्थित नाथपुरवा गांव में हुआ। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खेत की 5 फीट ऊंची सीमेंटेड बाउंड्री वॉल से टकराने के बाद विमान के पुर्जे दूर-दूर तक बिखर गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और भारी पुलिस बल के साथ आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।
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कैसे हुआ हादसा? उड़ान से लेकर क्रैश तक का खौफनाक मंजर

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जानकारी के मुताबिक, गुरुवार सुबह सब कुछ सामान्य था। रोजमर्रा की ट्रेनिंग प्रक्रिया के तहत विमान ने अपनी उड़ान भरी थी, लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह उड़ान इन दोनों पायलटों की जिंदगी की आखिरी उड़ान साबित होने वाली है।
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    उड़ान का समय: पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, गर्ग एविएशन ट्रेनिंग सेंटर से गुरुवार सुबह ठीक 11:30 बजे इस 4-सीटर एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी थी।
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    हवा में डगमगाया विमान: उड़ान भरने के करीब 20 मिनट बाद, यानी 11:50 बजे, सेंटर से लगभग 39 किलोमीटर दूर नाथपुरवा गांव (गंगा बैराज के पास) आसमान में विमान अचानक असंतुलित हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विमान उस समय करीब 200 से 250 फीट की ऊंचाई पर था।
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    दीवार से जोरदार टक्कर: हवा में डगमगाते हुए विमान तेजी से नीचे की तरफ आया और सीधे खेत में बनी 5 फीट ऊंची सीमेंटेड बाउंड्री वॉल से जा टकराया।
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    मलबे में तब्दील हुआ एयरक्राफ्ट: यह टक्कर इतनी भीषण थी कि दीवार पूरी तरह टूट गई और विमान के परखच्चे उड़ गए। नीचे गिरते ही पूरा विमान टूटकर बिखर गया। विमान की एक सीट भी टूटकर बाहर आ गई। गनीमत सिर्फ इतनी रही कि विमान के फ्यूल टैंक में आग नहीं लगी, अन्यथा स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो सकती थी।
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जान गंवाने वाले पायलट: एक अनुभवी इंस्ट्रक्टर, दूसरा होनहार ट्रेनी

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इस दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए। हादसे के तुरंत बाद करीब 12:15 बजे पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू टीम ने जो मंजर देखा वह दिल दहला देने वाला था। एक पायलट विमान के कॉकपिट के पास बुरी तरह फंसा हुआ था, जबकि दूसरा पायलट झटके के कारण विमान से छिटककर थोड़ी दूर खून से लथपथ पड़ा हुआ था।
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दोनों को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जान गंवाने वालों की पहचान इस प्रकार है:
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    सचिन भाटिया (इंस्ट्रक्टर): गुजरात के रहने वाले सचिन भाटिया एक बेहद अनुभवी पायलट थे। उनके पास 3000 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव था। इतनी लंबी फ्लाइंग का अनुभव होने के बावजूद यह हादसा कैसे हुआ, यह जांच का सबसे बड़ा विषय है।
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    अभिषेक पुजारी (ट्रेनी): कर्नाटक के रहने वाले अभिषेक पुजारी पायलट बनने का सपना लेकर गर्ग एविएशन में ट्रेनिंग ले रहे थे।
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डॉक्टरों की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पायलटों की मौत ऊंचाई से गिरने के कारण शरीर में आई 'मल्टीपल इंजरी' (गंभीर और बहुविध चोटों) की वजह से हुई है। मौत के सही और स्पष्ट कारणों का पता लगाने के लिए शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
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चश्मदीदों की जुबानी: "आसमान में डगमगाया और तेज धमाके के साथ गिरा"

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जिस समय यह हादसा हुआ, नाथपुरवा गांव के कई किसान अपने खेतों में काम कर रहे थे। उन्होंने मौत को आसमान से जमीन पर गिरते हुए अपनी आंखों से देखा।
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    रोहित निषाद का बयान: मौके पर मौजूद रोहित निषाद ने दिल दहला देने वाला आंखों देखा हाल बयान किया। उन्होंने बताया, "मैं खेत पर काम कर रहा था। तभी ऊपर देखा तो एक एयरक्राफ्ट उड़ रहा था। सब कुछ सामान्य लग रहा था कि अचानक वह डगमगाने लगा और तेजी से नीचे की ओर गिरने लगा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, एक बहुत तेज धमाके की आवाज आई और विमान जमीन पर गिरकर चकनाचूर हो गया। गनीमत रही कि उसमें आग नहीं लगी।"
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    खेत मालिक सर्वेश का बयान: जिस खेत में यह विमान गिरा, वह सर्वेश नाम के किसान का है। सर्वेश ने बताया, "मैं सुबह 10 बजे तक इसी खेत में काम कर रहा था और फिर घर चला गया था। बाद में मुझे फोन पर खबर मिली कि तुम्हारे खेत में ही एक विमान गिर गया है। यह सुनते ही मैं बदहवास होकर भागा। यहां आकर देखा तो पूरा विमान मलबे में बदल चुका था और दोनों पायलट जमीन पर गिरे पड़े थे।"
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बाल-बाल बची रिहायशी बस्ती, टल गया बहुत बड़ा हादसा

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इस हादसे में सबसे राहत की बात यह रही कि विमान एक खुले खेत में क्रैश हुआ। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जहां विमान गिरा है, वहां से रिहायशी बस्ती महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्रामीणों के अनुसार, विमान नीचे गिरने से पहले करीब 4-5 मिनट तक हवा में गोते खाता रहा। अगर यह असंतुलित विमान खेत के बजाय बस्ती के ऊपर गिर जाता, तो कई घरों को नुकसान पहुंच सकता था और पब्लिक कैजुअल्टी का एक बहुत बड़ा आंकड़ा सामने आ सकता था। पायलटों ने शायद अंतिम समय तक विमान को बस्ती से दूर ले जाने की कोशिश की होगी।
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गर्ग एविएशन और क्रैश हुए एयरक्राफ्ट की बैकग्राउंड

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हादसे का शिकार हुआ विमान कानपुर की प्रसिद्ध गर्ग एविएशन फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी का था।
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    एकेडमी का इतिहास: इस फ्लाइंग एकेडमी की स्थापना साल 1995 में हुई थी। यह उत्तर भारत के प्रमुख एविएशन ट्रेनिंग सेंटर्स में से एक माना जाता है। वर्तमान में यहां 100 से ज्यादा युवा पायलट की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
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    विमान की जानकारी: जो एयरक्राफ्ट क्रैश हुआ है, वह 'टेक्नम' (Tecnam) कंपनी का 4 सीटर प्लेन था। जानकारी के मुताबिक, इस एयरक्राफ्ट को साल 2023 में ही ट्रेनिंग के उद्देश्यों के लिए लाया गया था। विमान अपेक्षाकृत नया था, ऐसे में टेक्निकल फॉल्ट कैसे आया, यह बड़ा सवाल है।
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DGCA और AAIB ने संभाला मोर्चा, शुरू हुई हाई-लेवल जांच

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इतने अनुभवी पायलट की मौजूदगी में विमान का क्रैश होना सामान्य घटना नहीं है। कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि गर्ग एविएशन सेंटर से सूचना मिलते ही पूरे क्रैश साइट एरिया को पुलिस ने अपने घेरे में लेकर सुरक्षित (Protect) कर दिया है ताकि सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो।
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    डीजीसीए (DGCA) की जांच: विमानन नियामक संस्था 'डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन' (DGCA) को हादसे की तत्काल जानकारी दे दी गई है। DGCA की तीन सदस्यीय विशेष टीम को जांच-पड़ताल के लिए दिल्ली से रवाना कर दिया गया है।
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    AAIB की एंट्री: इसके साथ ही, 'एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो' (AAIB) ने भी इस हादसे की गहन जांच शुरू कर दी है।
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अब जांच एजेंसियां एयरक्राफ्ट के इंजन, मौसम के प्रभाव, और क्रैश से ठीक पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से हुई बातचीत के रिकॉर्ड (ब्लैक बॉक्स या डाटा रिकॉर्डर, यदि उपलब्ध हो) का बारीकी से विश्लेषण करेंगी। टेक्निकल फॉल्ट था या मानवीय भूल, इसका खुलासा DGCA की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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