दिल्ली-मेरठ Namo Bharat कॉरिडोर का इस्तेमाल अब सिर्फ यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं रह सकता। NCRTC ने Blue Dart Express Limited के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इसके तहत दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ Namo Bharat कॉरिडोर के जरिए एक्सप्रेस पार्सल और शहरी कार्गो की आवाजाही की व्यवहारिकता का अध्ययन किया जाएगा।
हालांकि, अभी पार्सल ट्रांसपोर्ट की नियमित सेवा शुरू नहीं हुई है। दोनों संस्थाएं पहले यह आकलन करेंगी कि Namo Bharat के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को Blue Dart के पिकअप और डिलीवरी नेटवर्क से जोड़कर किस तरह का मॉडल बनाया जा सकता है।
Namo Bharat से कैसे पहुंच सकता है पार्सल?
प्रस्तावित मॉडल में Namo Bharat कॉरिडोर को ई-कॉमर्स कंसाइनमेंट और दूसरे शहरी कार्गो की तेज आवाजाही के लिए इस्तेमाल करने की संभावना देखी जाएगी।

इसके लिए संभावित पार्सल वॉल्यूम, स्टेशनों पर उपलब्ध जगह और सुविधाएं, परिचालन व्यवस्था तथा अन्य तकनीकी जरूरतों का अध्ययन किया जाएगा। अगर मॉडल व्यवहारिक पाया जाता है, तो Blue Dart के मौजूदा पिकअप और डिलीवरी नेटवर्क को Namo Bharat के स्टेशन नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›इसका मतलब यह होगा कि पार्सल का एक हिस्सा सड़क के बजाय रीजनल रेल के जरिए तेजी से NCR के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जा सकेगा।
दिल्ली से मेरठ तक 82 किलोमीटर का कॉरिडोर
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ Namo Bharat कॉरिडोर करीब 82 किलोमीटर लंबा है। यह दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर मेरठ के मोदीपुरम तक जाता है। कॉरिडोर में दिल्ली, साहिबाबाद, गाजियाबाद, मुरादनगर, मोदीनगर और मेरठ जैसे प्रमुख क्षेत्र जुड़े हैं। NCRTC के मुताबिक पूरा कॉरिडोर फरवरी 2026 से व्यावसायिक संचालन में है।
NCRTC के अनुसार यह कॉरिडोर यात्रियों के साथ-साथ भविष्य में अन्य शहरी परिवहन जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल की संभावनाएं पैदा करता है।
सड़क पर कम हो सकती हैं डिलीवरी गाड़ियां
इस मॉडल का एक संभावित फायदा सड़कों पर डिलीवरी वाहनों का दबाव कम होना हो सकता है। अगर बड़ी संख्या में एक्सप्रेस पार्सल का एक हिस्सा रीजनल रेल के जरिए भेजा जाता है, तो लंबी दूरी के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ डिलीवरी गाड़ियों की जरूरत कम हो सकती है।
इससे NCR में ट्रैफिक दबाव और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव तभी पता चलेगा जब प्रस्तावित मॉडल की व्यवहारिकता और संचालन क्षमता का अध्ययन पूरा होगा।
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Namo Bharat की अतिरिक्त कमाई का भी रास्ता
यह पहल NCRTC के लिए सिर्फ लॉजिस्टिक्स मॉडल नहीं, बल्कि नॉन-फेयर रेवेन्यू बढ़ाने का अवसर भी हो सकती है।
Namo Bharat एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश वाली परियोजना है। ऐसे में यात्री किराये के अलावा कॉमर्शियल गतिविधियों से राजस्व बढ़ाने के नए मॉडल विकसित करना आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
NCRTC पहले से कॉरिडोर के व्यावसायिक इस्तेमाल की दिशा में कदम उठा रहा है। सरकारी ई-टेंडर रिकॉर्ड में भी Namo Bharat स्टेशनों पर व्यावसायिक स्पेस और विज्ञापन अधिकारों से जुड़े टेंडर मौजूद हैं।
रोजाना करीब 1.1 लाख यात्रियों की आवाजाही
Namo Bharat कॉरिडोर पर यात्रियों की संख्या भी इस संभावित लॉजिस्टिक्स मॉडल के लिए महत्वपूर्ण है। NCRTC के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 तक इस कॉरिडोर पर 3.8 करोड़ से अधिक यात्राएं हो चुकी थीं और सेवा की punctuality 99 फीसदी से अधिक रही।
NCRTC और Blue Dart अब इसी तेज और भरोसेमंद क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को पार्सल नेटवर्क के साथ जोड़ने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
Blue Dart के नेटवर्क को मिल सकता है Namo Bharat का फायदा
Blue Dart के पास पहले से दिल्ली, गाजियाबाद और NCR के कई हिस्सों में एक्सप्रेस डिलीवरी नेटवर्क है। कंपनी समय-संवेदनशील शिपमेंट के लिए डोर-टू-डोर और टाइम-डिफिनिट डिलीवरी सेवाएं भी उपलब्ध कराती है।
अगर Namo Bharat आधारित कार्गो मॉडल सफल रहता है, तो स्टेशन-टू-स्टेशन तेज परिवहन और Blue Dart की अंतिम छोर तक डिलीवरी व्यवस्था को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
फिलहाल यह एक संभावित मॉडल है, नियमित पार्सल सेवा की घोषणा नहीं हुई है। दोनों संस्थाओं का अगला कदम इसके संचालन, लागत, पार्सल संख्या और स्टेशन सुविधाओं की व्यवहारिकता का आकलन करना है।
Sabse pehle comment karne wale banein.