उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बुधवार को व्यापारियों ने अपने अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा को लेकर एक बड़ी हुंकार भरी है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के बैनर तले आयोजित मुजफ्फरनगर व्यापार मंडल की एक अहम क्षेत्रीय बैठक में व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया कि वे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके बिना विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। बुधवार दोपहर 12 बजे से शुरू हुई इस महाबैठक में ई-कॉमर्स कंपनियों पर लगाम लगाने, जीएसटी (GST) कानूनों को सरल बनाने, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और कैशलेस स्वास्थ्य बीमा जैसी कई गंभीर मांगें उठाई गईं। यह बैठक न केवल स्थानीय बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापारिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है।READ ALSO:-India-UK FTA लागू: भारत में सस्ती हुईं यूके की लग्जरी कारें, कपड़े और स्कॉच व्हिस्की, जानें इस ऐतिहासिक डील से किसे होगा फायदा
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इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन शहर के सर्कुलर रोड स्थित एक प्रतिष्ठित होटल में किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल, प्रदेश अध्यक्ष रिपिन कंसल, वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष संजय मित्तल और महिला इकाई की प्रदेश अध्यक्ष अनीता जायसवाल ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
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"व्यापारी देश का आर्थिक प्रहरी है"
\r\n\r\nबैठक को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने एक बेहद मार्मिक और प्रभावशाली तुलना की। उन्होंने कहा कि एक व्यापारी केवल अपने मुनाफे के लिए कारोबार नहीं करता, बल्कि वह इस देश की अर्थव्यवस्था को गति और ऊर्जा प्रदान करता है। संदीप बंसल ने जोर देकर कहा, "जिस तरह एक सैनिक देश की सीमाओं पर खड़ा होकर हमारा सुरक्षा प्रहरी बनता है, ठीक उसी तरह एक व्यापारी देश का 'आर्थिक प्रहरी' (Economic Guard) है।"
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उन्होंने मांग की कि समाज और सरकार दोनों को व्यापारियों को वही सम्मान और दर्जा देना चाहिए जो एक सैनिक को मिलता है। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया, क्योंकि सरकार ने महान दानवीर भामाशाह की जयंती को आधिकारिक रूप से 'व्यापारी कल्याण दिवस' घोषित किया है। यह कदम व्यापारियों के सम्मान की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
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ई-कॉमर्स पर अतिरिक्त टैक्स: मुजफ्फरनगर व्यापार मंडल की प्रमुख मांग
\r\n\r\nआज के डिजिटल युग में छोटे और खुदरा (Retail) व्यापारियों के सामने सबसे बड़ा संकट ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स से मिल रही बेतहाशा चुनौती है। मुजफ्फरनगर व्यापार मंडल की इस बैठक में यह मुद्दा सबसे ज्यादा गरमाया रहा। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ई-कॉमर्स कंपनियों (जैसे अमेज़न, फ्लिपकार्ट आदि) के लगातार बढ़ते एकाधिकार और प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की।
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व्यापारियों ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि ऑनलाइन व्यापार करने वाली इन बड़ी विदेशी और स्वदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों पर 'अतिरिक्त कर' (Additional Tax) लगाया जाना चाहिए। व्यापार मंडल का तर्क है कि ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर स्थानीय बाजारों को खत्म कर रही हैं। अतिरिक्त टैक्स लगने से एक समान प्रतिस्पर्धा (Level Playing Field) का माहौल बनेगा, जिससे छोटे, मझोले और खुदरा व्यापारियों को संरक्षण मिल सकेगा और वे बाजार में टिके रह सकेंगे।
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भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और कानून व्यवस्था की सराहना
\r\n\r\nसंदीप बंसल ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि व्यापारी हमेशा सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता है और देश के विकास में अपना योगदान दे रहा है। लेकिन, सिस्टम में बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा व्यापारियों का उत्पीड़न किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी व्यापारियों से अपील की कि वे भ्रष्टाचार और इंस्पेक्टर राज के खिलाफ पूरी तरह से संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करें।
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साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध और गुंडागर्दी पर लगाम लगने का सीधा और सबसे बड़ा लाभ व्यापार जगत को मिला है। व्यापारी अब भयमुक्त होकर अपना कारोबार कर पा रहे हैं। इसके अलावा, यूपी सरकार द्वारा पंजीकृत व्यापारियों के दुर्घटना बीमा की राशि को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किए जाने के फैसले का भी बैठक में जोरदार स्वागत किया गया।
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जीएसटी और स्वास्थ्य बीमा पर संजय मित्तल के अहम सुझाव
\r\n\r\nसंगठन के वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष संजय मित्तल ने जमीनी स्तर पर व्यापारियों को आ रही रोजमर्रा की दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि हर शहर और हर बाजार में संगठन की एक बहुत मजबूत इकाई बननी चाहिए, ताकि व्यापारियों की छोटी-बड़ी समस्याओं का सामूहिक रूप से त्वरित समाधान निकाला जा सके।
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उन्होंने सरकार के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
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- \r\n जीएसटी कानून में बदलाव: जीएसटी (GST) के मौजूदा नियमों में कई विसंगतियां हैं। इसमें व्यावहारिक संशोधन किए जाने चाहिए ताकि छोटे व्यापारियों को रिटर्न फाइल करने और ऑडिट में अनावश्यक परेशानी न हो।\r\n \r\n
- \r\n पार्टनरशिप की जटिलता खत्म हो: प्रोपराइटरशिप फर्मों (Proprietorship Firms) को पार्टनरशिप (Partnership) में बदलने से जुड़ी जो जटिल कानूनी शर्तें हैं, उन्हें तत्काल समाप्त किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n दुकानों का स्वामित्व: वर्षों से पगड़ी या किराए पर दुकान चला रहे व्यापारियों को उन दुकानों का मालिकाना हक (Ownership) देने के लिए कोई ठोस योजना लाई जाए।\r\n \r\n
- \r\n कैशलेस स्वास्थ्य बीमा: जिस तरह सरकारी कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिलती है, उसी तर्ज पर पंजीकृत व्यापारियों के लिए भी 5 लाख रुपये की 'कैशलेस चिकित्सा बीमा योजना' (Cashless Health Insurance) लागू की जाए।\r\n \r\n
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पश्चिमी यूपी के व्यापारियों ने लिया एकजुटता का संकल्प
\r\n\r\nइस महत्वपूर्ण बैठक का प्रभाव केवल मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं था। इस महापंचायत में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख जिलों से भारी संख्या में व्यापारी नेताओं और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, बागपत, बिजनौर, मुरादाबाद, शामली, कांधला और बदायूं जैसे प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक जिले शामिल थे।
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इन सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों ने एक स्वर में अपनी समस्याओं को रखा और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की। बैठक के अंत में सभी व्यापारियों ने मुजफ्फरनगर व्यापार मंडल के बैनर तले संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने तय किया कि ई-कॉमर्स पर टैक्स, भ्रष्टाचार से मुक्ति और जीएसटी सरलीकरण जैसे साझा और ज्वलंत मुद्दों पर अब वे अलग-अलग नहीं, बल्कि एकजुट होकर एक बड़ी लड़ाई लड़ेंगे।
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बुधवार को अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल द्वारा आयोजित मुजफ्फरनगर व्यापार मंडल की यह क्षेत्रीय बैठक व्यापारियों के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई है। व्यापारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे देश के आर्थिक प्रहरी हैं और उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। ई-कॉमर्स कंपनियों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने, जीएसटी कानूनों को सरल बनाने और 5 लाख रुपये के कैशलेस स्वास्थ्य बीमा की मांगें पूरी तरह से जायज हैं। पश्चिमी यूपी के तमाम जिलों से आए व्यापारियों की यह भारी एकजुटता दर्शाती है कि यदि सरकार ने समय रहते इन व्यावहारिक मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आने वाले समय में व्यापारी वर्ग अपने हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा देशव्यापी आंदोलन भी खड़ा कर सकता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.