उत्तराखंड के हरिद्वार और रुड़की शहर में भू-माफियाओं और बिना नियम-कानून के इमारतें खड़ी करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शहर के सुनियोजित विकास को सुनिश्चित करने के लिए हरिद्वार में अवैध निर्माण (Illegal construction in Haridwar) और बिना नक्शा पास कराए की जा रही प्लॉटिंग पर हरिद्वार विकास प्राधिकरण (HRDA) ने एक व्यापक अभियान चलाया है। हाल ही में प्राधिकरण की टीमों ने पुलिस बल के साथ मिलकर कई स्थानों पर छापेमारी की, जहां धड़ल्ले से अवैध निर्माण का कार्य चल रहा था। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जब बिल्डरों और कॉलोनाइजर्स ने काम नहीं रोका, तो अंततः प्रशासन को अपनी ताकत दिखानी पड़ी और इन सभी अवैध संपत्तियों को सील करने तथा ध्वस्त करने की कड़ी कार्रवाई की गई।Read also:-मुजफ्फरनगर में हैवानियत की सारी हदें पार: नाबालिग दलित किशोरी से खौफनाक दरिंदगी, खाकी की अनदेखी के बाद SSP के 'सुपर एक्शन' से मचा हड़कंप!
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हरिद्वार और रुड़की के विभिन्न क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर आवासीय और व्यावसायिक निर्माण कर रहे हैं। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए प्राधिकरण ने एक विशेष टीम का गठन किया और शहर के अलग-अलग कोनों में चल रहे ऐसे कार्यों पर लगाम कसी। आइए विस्तार से जानते हैं कि किन-किन स्थानों पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है और इसके पीछे के मुख्य कारण क्या हैं।
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आर्यन हैरिटेज स्कूल और बीटी गंज में अवैध निर्माण पर एक्शन

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प्राधिकरण की टीम ने सबसे पहले हरिद्वार शहर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों की जांच की। इस दौरान औरंगाबाद जाने वाले मार्ग पर, अनेकी पुल के बाद बायीं ओर स्थित अनेकी हेतमपुर क्षेत्र में एक बड़ा मामला सामने आया। यहां श्री प्रबंधक आर्यन हैरिटेज स्कूल द्वारा पूर्व से ही अध्यापित (शिक्षण के लिए उपयोग किए जा रहे) भवन के ऊपर, द्वितीय तल (सेकंड फ्लोर) पर लगभग 120 गुणा 50 वर्ग फुट के एक बड़े क्षेत्र में बिना किसी पूर्व अनुमति के निर्माण कार्य किया जा रहा था। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भी एक गंभीर जोखिम था।
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इसी क्रम में रुड़की के प्रमुख और पॉश इलाके बी०टी० गंज में भी सख्त कदम उठाए गए। यहां श्री अशोक कुमार गुप्ता और श्री हर्षित गुप्ता द्वारा एक भवन का निर्माण कराया जा रहा था। जांच में पाया गया कि यह निर्माण प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत मूल मानचित्र (Approved Map) से पूरी तरह भिन्न था। स्वीकृत नक्शे के विपरीत व्यावसायिक या आवासीय निर्माण करना शहरी नियोजन के नियमों का खुला उल्लंघन है। प्राधिकरण ने इन दोनों ही मामलों में कड़ा संज्ञान लेते हुए हरिद्वार में अवैध निर्माण के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत तुरंत कार्रवाई शुरू की। 
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रुड़की में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ प्राधिकरण का सख्त रुख

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इमारतों के अलावा, रुड़की और उसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर बिना लैंड यूज़ (Land Use) बदले की जा रही अवैध प्लॉटिंग (Illegal Plotting) कॉलोनाइजर्स का एक नया और पसंदीदा धंधा बन गया है। प्राधिकरण ने रुड़की के कई क्षेत्रों में ऐसे लैंड माफियाओं के खिलाफ भी कड़ा प्रहार किया है।
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    नहर पटरी रोड, मौहम्मदपुर मदरसा के पास: रुड़की के इस इलाके में श्री फैशल द्वारा एक बहुत बड़े भूखंड, जो लगभग 10 से 12 बीघा भूमि में फैला हुआ था, पर अवैध रूप से प्लॉटिंग का कार्य किया जा रहा था। यहां बिना किसी लेआउट प्लान (Layout Plan) के सड़कें और प्लॉट काटे जा रहे थे।
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    ढण्डेरा (पानी की टंकी के पास): तहसील रुड़की के अंतर्गत आने वाले ढण्डेरा क्षेत्र में श्री जितेन्द्र राणा और अन्य हितबद्ध व्यक्तियों द्वारा लगभग 5 से 6 बीघा भूमि पर अवैध रूप से कॉलोनियां विकसित करने की कोशिश की जा रही थी। यह क्षेत्र भी प्राधिकरण के रडार पर आ गया।
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    नेशनल हाईवे रोड, करौन्दी: हरिद्वार जिले के करौन्दी क्षेत्र में, जो कि नेशनल हाईवे के बिल्कुल करीब है, श्री सोनू और अन्य संबंधित व्यक्तियों द्वारा 4 से 5 बीघा भूमि पर नियमों को धता बताते हुए प्लॉटिंग का कार्य किया जा रहा था। हाईवे के किनारे ऐसी अवैध कॉलोनियां भविष्य में यातायात और जल निकासी की भारी समस्या पैदा करती हैं।
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इन सभी स्थानों पर धड़ल्ले से प्लॉट बेचे जाने की तैयारी थी, जिससे आम जनता की गाढ़ी कमाई खतरे में पड़ सकती थी। 
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पुलिस बल की मौजूदगी में हुई सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई

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अक्सर देखा गया है कि जब भी प्रशासनिक अधिकारी हरिद्वार में अवैध निर्माण रोकने जाते हैं, तो उन्हें स्थानीय लोगों या बिल्डरों के भारी विरोध का सामना करना पड़ता है। इस बार प्राधिकरण पूरी तरह से मुस्तैद था।
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इन सभी अनाधिकृत निर्माणों के विरुद्ध विकास प्राधिकरण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत पहले ही वाद (Cases) योजित किये गए थे। बिल्डरों और भू-मालिकों को निर्माण कार्य तुरंत रोकने और आवश्यक दस्तावेज तथा स्वीकृत नक्शे प्रस्तुत करने के लिए बार-बार निर्देश और नोटिस दिए गए थे। लेकिन स्थल पर निरंतर निर्देशों के बावजूद भी अनाधिकृत निर्माणकर्ताओं द्वारा निर्माण कार्य बंद नहीं किया गया। उनका यह रवैया कानून का सीधा मजाक उड़ाने जैसा था।
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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, प्राधिकरण की विशेष टीम ने भारी पुलिस बल (Police Force) के साथ इन सभी स्थानों पर दबिश दी। पुलिस की मौजूदगी के कारण किसी भी प्रकार का कोई विरोध टिक नहीं सका। टीम ने तत्परता दिखाते हुए आर्यन हैरिटेज स्कूल के ऊपर बन रहे निर्माण और बीटी गंज की इमारत को पूरी तरह से सील कर दिया। वहीं, मौहम्मदपुर, ढण्डेरा और करौन्दी में की जा रही अनाधिकृत प्लाटिंग और विकास कार्यों (सड़कें, बाउंड्री वॉल) पर बुलडोजर चलाकर उन्हें जमींदोज (ध्वस्त) कर दिया गया।
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अवैध निर्माणकर्ताओं और आम जनता को प्राधिकरण की सख्त चेतावनी

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मौके पर उपस्थित अनाधिकृत निर्माणकर्ताओं को अधिकारियों ने कड़ी फटकार लगाई। उन्हें स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया कि जब तक प्राधिकरण से विधिवत रूप से मानचित्र स्वीकृत (Map Approved) नहीं करा लिया जाता, तब तक स्थल पर किसी भी प्रकार का कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। यदि सील तोड़ी गई या दोबारा निर्माण शुरू किया गया, तो उनके खिलाफ कठोर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।
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इसके साथ ही प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपनी जीवन भर की जमापूंजी किसी भी ऐसी कॉलोनी या प्लॉट में निवेश न करें जिसका लेआउट पास न हो। सस्ती जमीन के लालच में लोग अक्सर ऐसी कॉलोनियों में प्लॉट खरीद लेते हैं, जहां भविष्य में न तो बिजली का कनेक्शन मिलता है, न पानी और न ही सीवर की सुविधा। ऐसे में बाद में केवल पछतावा ही हाथ लगता है। 
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शहर के नियोजित विकास पर इसका प्रभाव (Analysis)

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हरिद्वार और रुड़की, दोनों ही उत्तराखंड के अत्यंत महत्वपूर्ण शहर हैं। हरिद्वार जहां विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी है, वहीं रुड़की एक प्रमुख शैक्षणिक और औद्योगिक हब है। इन शहरों में बढ़ती आबादी के कारण जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में कुछ लालची लोग बिना लेआउट पास कराए बेतरतीब कॉलोनियां बसा रहे हैं।
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इस तरह के हरिद्वार में अवैध निर्माण से शहर के ड्रेनेज सिस्टम (जल निकासी प्रणाली), ट्रैफिक और पेयजल आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ता है। बरसात के दिनों में इन्हीं अवैध कॉलोनियों में जलभराव की सबसे बड़ी समस्या सामने आती है। प्राधिकरण की यह सख्त कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है कि राज्य सरकार शहरी नियोजन के साथ किसी भी प्रकार का कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। यह न केवल भू-माफियाओं में खौफ पैदा करेगा, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास (Planned Development) का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। 
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हरिद्वार विकास प्राधिकरण (HRDA) द्वारा रुड़की और हरिद्वार के विभिन्न इलाकों में की गई सीलिंग और ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई निश्चित रूप से एक सराहनीय कदम है। आर्यन हैरिटेज स्कूल, बीटी गंज, मौहम्मदपुर मदरसा के पास, ढण्डेरा और करौन्दी जैसे इलाकों में अवैध निर्माण और बिना नक्शे की प्लाटिंग पर लगाम कसने से न केवल सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि आम जनता भी धोखाधड़ी का शिकार होने से बचेगी। विकास प्राधिकरण को यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रखना चाहिए ताकि शहर का विकास सही और व्यवस्थित दिशा में हो सके। नागरिक भी जागरूक बनें और प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसकी वैधानिकता की पूरी तरह से जांच अवश्य कर लें।
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हरिद्वार और रुड़की में अवैध निर्माणों के खिलाफ हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने कड़ा एक्शन लिया है। अनेकी हेतमपुर में आर्यन हैरिटेज स्कूल के द्वितीय तल और बीटी गंज में स्वीकृत नक्शे के विपरीत बन रहे निर्माण को सील कर दिया गया है। इसके अलावा मौहम्मदपुर मदरसा, ढण्डेरा और करौन्दी में कई बीघा कृषि भूमि पर चल रही अवैध प्लॉटिंग को पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। बिल्डरों को बिना नक्शा पास कराए निर्माण न करने की कड़ी चेतावनी दी गई है।
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