उत्तर प्रदेश (UP) की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की करोड़ों कामकाजी महिलाओं और 5 करोड़ से अधिक परिवारों को चिंतामुक्त करते हुए कार्यस्थल पर सबसे बड़ा सुरक्षा कवच दिया है। यह फैसला महिलाओं को रात की शिफ्ट (Night Shift) में काम करने का अधिकार देने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें औद्योगिक क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करने के लिए लिया गया है। योगी सरकार ने केवल एक नीतिगत संशोधन से महिलाओं के लिए घर से लेकर दफ्तर तक एक सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी वातावरण तैयार किया है।READ ALSO:-यूपी में 'एक्सप्रेस' रफ्तार! 11 नए एक्सप्रेस-वे बदल देंगे तस्वीर, 1500KM का जाल 4 साल में होगा तैयार, UPEIDA को कमान
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नाइट शिफ्ट में महिलाओं के अधिकार
\r\n\r\nपारंपरिक रूप से, महिलाओं को शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति नहीं थी, या यह अत्यधिक प्रतिबंधित था। योगी सरकार ने श्रम व्यवस्था को आधुनिक परिस्थितियों के अनुरूप ढालने और औद्योगिक लचीलेपन को प्राथमिकता देने के लिए यह ऐतिहासिक संशोधन लागू किया है।
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- \r\n सहमति अनिवार्य: नए फैसले के मुताबिक, नाइट शिफ्ट (शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक) में काम करने के लिए महिलाओं की सहमति लेना अनिवार्य है। महिलाएँ जब अपनी लिखित सहमति देंगी, तभी उनसे नाइट शिफ्ट में काम कराया जा सकेगा।\r\n \r\n
- \r\n दोगुनी मज़दूरी: महिला कर्मचारियों के लिए ओवरटाइम की सीमा 75 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे प्रति तिमाही की गई है, जिसका भुगतान दोगुनी मज़दूरी दर से किया जाएगा।\r\n \r\n
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सुरक्षा और समान अवसर का माहौल
\r\n\r\nयोगी सरकार का यह फैसला सिर्फ वादों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत कारखानों से लेकर कॉर्पोरेट तक हर स्तर पर कानूनी और प्रशासनिक प्रावधान किए गए हैं:
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- \r\n सुरक्षा अनिवार्य: कारखानों में सुरक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाएं, सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा गार्डों की तैनाती अनिवार्य की गई है।\r\n \r\n
- \r\n खतरनाक उद्योगों में छूट: महिलाओं को सभी 29 श्रेणियों के खतरनाक उद्योगों में कार्य करने की अनुमति दी गई है। जबकि पहले महिलाओं को केवल 12 खतरनाक श्रेणी वाले कार्य करने की सीमित छूट थी।\r\n \r\n
- \r\n लगातार कार्य सीमा: महिला कर्मचारी अपनी सहमति से लगातार 6 घंटे तक बिना किसी अंतराल के कार्य कर सकती हैं।\r\n \r\n
- \r\n पारदर्शिता: नाइट शिफ्ट में काम करने के लिए महिला कर्मियों की लिखित सहमति श्रम विभाग में पंजीकृत करानी होगी, जिससे पूरी तरह पारदर्शिता बनी रहती है।\r\n \r\n
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योगी सरकार का 'ज़ीरो टॉलरेंस' मॉडल
\r\n\r\nमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त छवि वाले इस फैसले ने महिलाओं के लिए वर्क प्लेस पर सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का ऐसा वातावरण बनाया है, जो देश में अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल है।
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- \r\n अपराधों पर कठोरता: यूपी में महिला पुलिस ने अपराधियों के प्रति 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति को जमीन पर उतारा है।\r\n \r\n
- \r\n एनकाउंटर और आत्मविश्वास: नोएडा से लेकर गाजियाबाद तक महिला पुलिस की टीमें बदमाशों के साथ मुठभेड़ कर उन्हें लंगड़ा करके जेल भेज रही हैं। महिलाओं का मानना है कि महिला पुलिस के हाथों बदमाशों का एनकाउंटर होने से तीन बड़े संदेश जाते हैं:\r\n\r\n
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- \r\n महिलाओं के हाथ असामाजिक तत्वों पर गोली चलाने में नहीं कांपते।\r\n \r\n
- \r\n महिलाओं में यह आत्मविश्वास बढ़ता है कि महिला पुलिस उनकी रक्षा करने में सक्षम हैं।\r\n \r\n
- \r\n बदमाशों के दिल में यह डर बढ़ता है कि महिला पुलिस ही उनका जीवन खत्म कर सकती हैं।\r\n \r\n
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महिला भागीदारी में वृद्धि
\r\n\r\nइस सुरक्षित माहौल के कारण यूपी में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है।
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- \r\n कार्यबल में हिस्सेदारी: भारत में कामकाजी महिलाओं का प्रतिशत 40-42% है, वहीं यूपी में यह लगभग 36% है और इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है।\r\n \r\n
- \r\n स्वयं सहायता समूह: 10 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 1 करोड़ से अधिक महिलाएँ आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्यरत हैं।\r\n \r\n
- \r\n न्याय व्यवस्था: महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर कठोर कार्रवाई में यूपी देश में अग्रणी है, जहाँ दोषसिद्धि दर 71% है, जबकि राष्ट्रीय औसत केवल 18% है।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षित वातावरण: 1090 महिला पावर लाइन, 112 हेल्पलाइन, 44,177 महिला पुलिसकर्मी और 1694 एंटी रोमियो स्क्वाड्स निरंतर सक्रिय हैं, जो महिला केंद्रित सुरक्षा वातावरण को मजबूत करते हैं।\r\n \r\n
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इन कदमों से यूपी में महिला श्रम के क्षेत्र में भागीदारी दर निरंतर बढ़ रही है और 1 करोड़ से अधिक महिलाएं (10 लाख+ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से) आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्यरत हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.