मुजफ्फरनगर साइबर क्राइम पुलिस ने 60.37 लाख रुपये की जीवन बीमा (Life Insurance) मैच्योरिटी राशि हड़पने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। फर्जीवाड़े में PNB कर्मचारी और एक डॉक्टर गिरफ्त
Published at : 21 Jun 2026, 12:16 PM
Updated at : 10 Sep 2026, 10:05 PM
Muzaffarnagar Cyber Crime Police Busts Rs 60 Lakh Insurance Fraud Gang Arrests Three
इस मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस करोड़ों की ठगी के पीछे कोई अनपढ़ अपराधी नहीं, बल्कि समाज के 'सफेदपोश' लोग शामिल थे। गिरफ्तार किए गए तीन मुख्य आरोपियों में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) का एक कर्मचारी और पेशे से एक डॉक्टर भी शामिल है। पुलिस की इस बड़ी और सराहनीय कामयाबी पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने जांच टीम को नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है। आइए विस्तार से जानते हैं इस पूरी वारदात की इनसाइड स्टोरी।
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क्या है पूरा मामला? (The Background of the Fraud)
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इस पूरी धोखाधड़ी की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी। पुलिस जांच से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के पवित्र शहर हरिद्वार की रहने वाली सुमनलता नामक एक महिला ने वर्ष 2019 में 'बजाज आलियांज इंश्योरेंस लिमिटेड' (Bajaj Allianz Life Insurance) से एक जीवन बीमा पॉलिसी खरीदी थी। कुछ समय तक सब कुछ ठीक चला, लेकिन बाद में किन्हीं आर्थिक कारणों से सुमनलता अपनी पॉलिसी का नियमित प्रीमियम जमा नहीं कर सकीं।
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▪️बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी राशि के 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले संगठित गिरोह के 03 सदस्यों को थाना साइबर क्राइम पुलिस द्वारा किया गया गिरफ्तार। \r\n \r\nबरामदगी- \r\n✔️ 02 बैंक पासबुक \r\n✔️ 03 मोबाइल फोन \r\n \r\nइस सम्बन्ध में SSP श्री संजय कुमार वर्मा की बाईट-@dgpup@adgzonemeerut… pic.twitter.com/zxdeGCs9Qa
प्रीमियम जमा न होने के कारण उनकी पॉलिसी बंद (Lapse) हो गई। इसके बाद, महिला ने बीमा कंपनी से संपर्क किया और अपनी जमा की गई राशि (मैच्योरिटी राशि) वापस लेने का आधिकारिक अनुरोध किया।
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बीमा कंपनी ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए सभी कटौतियों के बाद लगभग 60 लाख 37 हजार रुपये (₹60.37 Lakh) का एक अकाउंटपेयी चेक (Account Payee Cheque) जारी किया। यह चेक ब्लू डार्ट (Blue Dart) कूरियर सेवा के माध्यम से सुमनलता के हरिद्वार स्थित पते पर भेजा गया था।
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वारदात का तरीका: कूरियर से चेक गायब और बैंक में 'खेल' (The Modus Operandi)
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पीड़िता सुमनलता अपने चेक का इंतजार करती रहीं, लेकिन वह चेक कभी उनके घर तक पहुंचा ही नहीं। यहीं से इस शातिर गिरोह का 'ऑपरेशन ठगी' शुरू हुआ।
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कूरियर से छेड़छाड़: आरोप है कि गिरोह के सदस्यों ने कूरियर कंपनी की सप्लाई चेन में सेंध लगाकर उस 60 लाख रुपये के चेक को रास्ते में ही धोखाधड़ी से गायब कर दिया।
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नाम में हेरफेर (Forgery): चूंकि चेक 'अकाउंट पेयी' था (यानी जिस नाम का चेक है, उसी के खाते में पैसा जाएगा), इसलिए ठगों ने एक बेहद सोची-समझी साजिश रची। उन्होंने मुजफ्फरनगर जिले के बिरालसी गांव निवासी एक महिला के बैंक खाते का इस्तेमाल किया।
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बैंक कर्मचारी की मिलीभगत: चेक पर लिखे नाम में मामूली हेरफेर कर उसे इस बिरालसी निवासी महिला के खाते में जमा कराया गया। यह इतना बड़ा फर्जीवाड़ा बिना किसी 'अंदरूनी मदद' के संभव नहीं था। यहीं पर एंट्री होती है पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के कर्मचारी की। उसने बैंकिंग नियमों को ताक पर रखकर इस फर्जी नाम वाले चेक को पास कर दिया।
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पैसों का बंदरबांट: जैसे ही 60.37 लाख रुपये खाते में क्रेडिट हुए, ठगों ने बिना कोई समय गंवाए पूरी धनराशि को तुरंत विभिन्न अज्ञात बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया और नकद निकासी कर ली।
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ऐसे खुला करोड़ों की ठगी का राज (The Investigation Process)
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जब महीनों बीत जाने के बाद भी सुमनलता को अपनी पॉलिसी की रकम नहीं मिली, तो उन्होंने परेशान होकर बजाज आलियांज बीमा कंपनी के अधिकारियों से शिकायत की।
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कंपनी ने जब अपने स्तर पर ट्रैकिंग और आंतरिक जांच (Internal Audit) की, तो पाया कि चेक तो बहुत पहले ही क्लियर हो चुका है और पैसा मुजफ्फरनगर के एक बैंक खाते में गया है। मामला बेहद संदिग्ध लगने पर बीमा कंपनी के अधिकारियों ने तुरंत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मुज़फ्फरनगर, श्री संजय कुमार वर्मा को एक लिखित शिकायत भेजी।
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SSP के संज्ञान में मामला आते ही हड़कंप मच गया। उन्होंने तुरंत इस गंभीर मामले की जांच साइबर क्राइम थाना पुलिस को सौंप दी।
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पुलिस के बड़े अधिकारियों का मार्गदर्शन: साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत इस मामले की परतें खोलने का काम शुरू हुआ। यह पूरी कार्रवाई:
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अपर पुलिस महानिदेशक (ADG), मेरठ जोन
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पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG), सहारनपुर परिक्षेत्र
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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), मुज़फ्फरनगर
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के सख्त निर्देशन में की गई। मैदानी स्तर पर इस ऑपरेशन को पुलिस अधीक्षक अपराध (SP Crime) इंदु सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी अपराध (CO Crime) रविन्द्र प्रताप सिंह और साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह के नेतृत्व में अंजाम दिया गया।
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सफेदपोश अपराधियों की गिरफ्तारी (The Arrests & Recoveries)
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साइबर पुलिस ने बैंक खातों की डिटेल, आईपी एड्रेस (IP Address), कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सर्विलांस की मदद से इस पूरी 'मनी ट्रेल' (Money Trail) को ट्रैक किया। विवेचना के दौरान इस संगठित गिरोह के सदस्यों की पहचान सुनिश्चित की गई और पुलिस ने जाल बिछाकर तीन मुख्य आरोपियों को धर दबोचा।
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गिरफ्तार किए गए आरोपियों का विवरण:
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प्रवीन पुत्र समय सिंह (निवासी: ग्राम बिरालसी, मुजफ्फरनगर) - मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक।
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रामभूल पुत्र पूरण सिंह (निवासी: ग्राम बिरालसी, मुजफ्फरनगर) - यह पीएनबी (PNB) का कर्मचारी है। इसी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी चेक को बैंक में क्लियर करवाया था।
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डॉ. दिलशाद पुत्र लियाकत अली (निवासी: शेखजादगान, चरथावल, मुजफ्फरनगर) - पेशे से डॉक्टर इस आरोपी ने इस पूरी साजिश में अहम भूमिका निभाई और पैसों को ठिकाने लगाने में मदद की।
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बरामदगी: पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल की गई दो बैंक पासबुक और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन्हीं मोबाइलों से गिरोह के अन्य सदस्यों और लेनदेन के राज खुलने की उम्मीद है।
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SSP ने जांच टीम को दिया 10 हजार का इनाम
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मुजफ्फरनगर पुलिस के लिए यह एक बड़ी सफलता है, क्योंकि इस मामले में 'व्हाइट कॉलर क्रिमिनल्स' शामिल थे, जो पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में माहिर माने जाते हैं। पुलिस टीम के इस उत्कृष्ट कार्य और अथक परिश्रम की सराहना करते हुए SSP संजय कुमार वर्मा ने साइबर क्राइम पुलिस टीम को 10,000 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।
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आगे की कार्रवाई: और भी कई चेहरे होंगे बेनकाब
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फिलहाल, पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ थाना साइबर क्राइम में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट (IT Act) की संबंधित व गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की विधिक कार्रवाई पूरी कर ली गई है।
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हालांकि, पुलिस की जांच अभी यहीं खत्म नहीं हुई है। साइबर सेल अब इन प्रमुख बिंदुओं पर गहराई से काम कर रही है:
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कूरियर कंपनी (Blue Dart) में काम करने वाला वह 'भेदिया' कौन था, जिसने चेक की डिलीवरी को रास्ते में ही रोक दिया?
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धोखाधड़ी की गई 60.37 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम किन-किन अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर की गई?
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क्या इस गिरोह ने पूर्व में भी इस तरह की अन्य बीमा कंपनियों के साथ धोखाधड़ी को अंजाम दिया है?
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आशंका जताई जा रही है कि रिमांड के दौरान पूछताछ में इस गिरोह के कुछ अन्य बड़े सदस्यों के नाम भी सामने आ सकते हैं। मुजफ्फरनगर पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने बैंक कर्मचारियों और अपराधियों के उस नापाक गठजोड़ की कमर तोड़ दी है, जो आम जनता की जीवन भर की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे थे।
Sabse pehle comment karne wale banein.