सहारनपुर के देवबंद इलाके में हुए एक भीषण सड़क हादसे के बाद पीड़ितों को आर्थिक मदद न मिलने पर ग्रामीणों का आक्रोश भड़क गया है। कुशावली गांव के चार श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत के बाद सोमवार को गुस्साए ग्रामीणों ने Saharanpur Road Accident Protest करते हुए चौधरी चरण सिंह कांवड़ पटरी मार्ग पर स्थित अटेरना गंगनहर पुल पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मुआवजे की मांग की है।
मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीण सोमवार को कुशावली गांव के लोगों ने हादसे में घायल हुए युवकों को साथ लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि जान गंवाने वाले चारों श्रद्धालुओं के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। इसके साथ ही, हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के इलाज और सहायता के लिए 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
एनएच-58 जाम करने की चेतावनी अचानक लगाए गए इस जाम के कारण कांवड़ पटरी मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मौके पर किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के न पहुंचने से ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले आधे घंटे के भीतर कोई अधिकारी उनकी शिकायत सुनने मौके पर नहीं पहुंचता, तो वे इस Saharanpur Road Accident Protest को तेज करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) को भी पूरी तरह जाम कर देंगे।
मां शाकुंभरी देवी की ज्योत लेने गए थे श्रद्धालु गौरतलब है कि 7 अक्टूबर को कुशावली गांव के कुछ श्रद्धालु मां शाकुंभरी देवी की ज्योत लेने के लिए गए थे। शुक्रवार रात को जब वे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर लौट रहे थे, तभी देवबंद क्षेत्र में उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण सड़क हादसे में गांव के चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।
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हादसे में उजड़ गए चार परिवार इस दुर्घटना का शिकार हुए मृतकों में 45 वर्षीय पंकज शामिल हैं, जो मजदूरी कर अपना घर चलाते थे। वहीं, 26 वर्षीय अमन एक फाइनेंस कंपनी में कर्मचारी था, जबकि 24 वर्षीय सागर सहारनपुर की एक कंपनी में कार्यरत था। चौथे मृतक 55 वर्षीय बिल्लू उर्फ रमेश थे, जो खेती-बाड़ी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।
शनिवार को जब एक साथ गांव में चार लोगों का अंतिम संस्कार किया गया, तो पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो गया। इन मौतों से जहां परिवारों के सिर से साया उठ गया है, वहीं अब तक सरकारी सहायता न मिलने से ग्रामीणों में भारी निराशा और प्रशासन के प्रति नाराजगी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.