लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से दिल (Heart) की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बेहद राहत देने वाली खबर सामने आई है। अब तक जिन मरीजों को हार्ट वॉल्व (Heart Valve) की समस्या के चलते ओपन हार्ट सर्जरी (Open Heart Surgery) के दर्दनाक और जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ता था, उन्हें अब एक नई और आधुनिक तकनीक का तोहफा मिला है। शहर के हृदय रोग संस्थान (Heart Disease Institute) ने 'तावी' (TAVI - Transcatheter Aortic Valve Implantation) विधि से इलाज शुरू करने का फैसला किया है। सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि निजी अस्पतालों में जिस इलाज का खर्च 15 से 20 लाख रुपये आता है, वह यहां पूरी तरह मुफ्त (Free) होगा।READ ALSO:-यूपी में वोटरों पर 'कागज' का संकट: 2003 की लिस्ट में नाम नहीं तो 'निवास प्रमाण पत्र' भी बेकार; आयोग ने कहा- 'सिर्फ ये 11 सबूत चलेंगे'
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इसके साथ ही, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) भी हार्ट ट्रांसप्लांट (Heart Transplant) के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन डोनर (अंगदान करने वाले) न मिलने के कारण यह प्रक्रिया रुकी हुई है। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर यह 'तावी' तकनीक क्या है, मरीजों को इसका लाभ कैसे मिलेगा और अंगदान को लेकर क्या चुनौतियां सामने आ रही हैं।
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इतिहास में पहली बार: लखनऊ में फ्री 'तावी' (TAVI) सर्जरी

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मेडिकल साइंस ने पिछले कुछ दशकों में अभूतपूर्व तरक्की की है, और Lucknow TAVI Surgery की यह पहल उसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। हृदय रोग संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, वॉल्व की बीमारी से ग्रस्त मरीजों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है।
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अभी तक की स्थिति यह थी कि जब भी किसी मरीज के दिल का वॉल्व खराब होता था या उसमें सिकुड़न आ जाती थी, तो डॉक्टरों के पास केवल 'ओपन हार्ट सर्जरी' ही एकमात्र विकल्प बचता था। इसमें मरीज की छाती को चीरकर ऑपरेशन किया जाता है, जिसमें रिकवरी का समय लंबा होता है और संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। विशेषकर बुजुर्ग मरीजों के लिए ओपन सर्जरी जानलेवा साबित हो सकती है। लेकिन 'तावी' विधि ने इस पूरे परिदृश्य को बदल दिया है।
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क्या है तावी (TAVI) तकनीक?

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'तावी' यानी ट्रांसकैथेटर एरोटिक वॉल्व इंप्लाटेशन (Transcatheter Aortic Valve Implantation)। यह एक 'मिनिमली इनवेसिव' (Minimally Invasive) प्रक्रिया है।
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    बिना चीर-फाड़ के इलाज: इस विधि में छाती को चीरने की जरूरत नहीं पड़ती।
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    जांघ की नस से रास्ता: डॉक्टरों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में मरीज की जांघ (Groin) की नस (Femoral Artery) के जरिए एक कैथेटर (पतली नली) को दिल तक पहुंचाया जाता है।
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    नया वॉल्व: इसी कैथेटर के जरिए सिकुड़े हुए या खराब वॉल्व के स्थान पर एक नया कृत्रिम वॉल्व (Artificial Valve) फिट कर दिया जाता है।
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    वॉल्व कवच: यह नया वॉल्व पुराने वॉल्व के अंदर फिट होकर एक 'कवच' की तरह काम करता है और रक्त प्रवाह को सुचारू रूप से बहाल कर देता है।
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30 मरीजों पर होगा पहला परीक्षण: डॉ. संतोष सिन्हा

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हृदय रोग संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संतोष सिन्हा ने इस नई पहल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया शुरू करने के लिए संस्थान पूरी तरह तैयार है।
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"पहले चरण में हम ऐसे 30 मरीजों का चयन करेंगे जिन्हें वॉल्व बदलने की सख्त जरूरत है। इन मरीजों पर Lucknow TAVI Surgery विधि से वॉल्व इम्प्लांटेशन का परीक्षण किया जाएगा। सरकार की तरफ से हरी झंडी मिलते ही इसे बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया जाएगा।" — डॉ. संतोष सिन्हा
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डॉ. सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर के चुनिंदा 9 अस्पतालों को इस विधि से इलाज करने के लिए चिन्हित किया है, जिनमें लखनऊ का हृदय रोग संस्थान भी शामिल है। यह उत्तर प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
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लाखों की बचत: 15 लाख का इलाज अब 0 रुपये में

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भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का महंगा होना आम आदमी की कमर तोड़ देता है। ऐसे में यह खबर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संजीवनी समान है।
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खर्च का गणित:

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    निजी अस्पताल: यदि कोई मरीज किसी प्राइवेट हॉस्पिटल या कॉरपोरेट अस्पताल में TAVI विधि से वॉल्व बदलवाता है, तो उसका औसतन खर्च 15 लाख रुपये से 20 लाख रुपये के बीच आता है। वॉल्व की कीमत ही लाखों में होती है।
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    सरकारी संस्थान (लखनऊ): डॉ. संतोष सिन्हा के अनुसार, हृदय रोग संस्थान में यह इलाज पूरी तरह से फ्री (Fully Free) रहेगा।
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    किसे नहीं देना होगा शुल्क: सरकार से मिले निर्देशों के मुताबिक, चयनित मरीजों को वॉल्व की कीमत या सर्जरी का कोई भी शुल्क नहीं देना होगा। यह पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।
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यह कदम उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को नई जिंदगी देगा जो पैसों की कमी के कारण अपना इलाज बीच में ही छोड़ देते थे।
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KGMU: सब कुछ तैयार, बस 'दिल' का इंतजार

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एक तरफ जहां हृदय रोग संस्थान में वॉल्व सर्जरी की नई शुरुआत हो रही है, वहीं दूसरी तरफ लखनऊ का प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) हार्ट ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है।
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KGMU के सीवीटीएस (CVTS) विभाग ने हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर और सभी जरूरी उपकरण तैयार कर लिए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि सारी तैयारियों के बावजूद अभी तक एक भी ट्रांसप्लांट नहीं हो पाया है। इसकी वजह है—अंगदान (Organ Donation) की कमी।
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जागरूकता की कमी बनी रोड़ा

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KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि तकनीक और संसाधनों के स्तर पर विश्वविद्यालय पूरी तरह सक्षम है, लेकिन समाज में अभी भी अंगदान को लेकर भ्रांतियां और जागरूकता की कमी है।
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"हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए 'ब्रेन डेड' (Brain Dead) मरीज के परिजनों की सहमति जरूरी होती है। दुखद है कि लोग अभी भी अंगदान के महत्व को पूरी तरह नहीं समझ पा रहे हैं। एक व्यक्ति का अंगदान कई लोगों को नई जिंदगी दे सकता है।" — प्रो. सोनिया नित्यानंद, कुलपति, KGMU
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जागरूकता अभियान: अब गांव-गांव पहुंचेंगे डॉक्टर

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अंगदान की इस खाई को पाटने के लिए KGMU प्रशासन ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। विश्वविद्यालय अब केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करेगा।
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क्या है रणनीति?

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    कैंप और सेमिनार: लखनऊ और आसपास के जिलों में विशेष जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे।
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    सामाजिक संगठनों का सहयोग: डॉक्टरों के साथ-साथ एनजीओ (NGOs) और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद ली जाएगी।
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    काउंसलिंग: अस्पतालों में ब्रेन डेड घोषित मरीजों के परिजनों की काउंसलिंग के लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी जो उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित कर सकें।
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    प्रस्ताव की तैयारी: इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जल्द ही एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
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अन्य अंगों के प्रत्यारोपण में KGMU की प्रगति

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भले ही हार्ट ट्रांसप्लांट में डोनर की कमी आड़े आ रही हो, लेकिन अन्य अंगों के प्रत्यारोपण में KGMU ने बेहतरीन काम किया है।
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    लिवर और किडनी: वर्तमान में यहां लिवर (Liver) और किडनी (Kidney) ट्रांसप्लांट की सुविधा सुचारू रूप से चल रही है और सैकड़ों मरीजों को इसका लाभ मिला है।
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    फेफड़ा प्रत्यारोपण (Lung Transplant): केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जल्द ही फेफड़ा प्रत्यारोपण की सुविधा भी शुरू करने की तैयारी चल रही है।
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    हार्ट ट्रांसप्लांट: अब जैसे ही कोई डोनर मिलेगा, सीवीटीएस विभाग पहला हार्ट ट्रांसप्लांट करके प्रदेश में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।
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लखनऊ के चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे ये बदलाव बताते हैं कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। हृदय रोग संस्थान में Lucknow TAVI Surgery का मुफ्त होना न केवल चिकित्सा विज्ञान की जीत है, बल्कि यह लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को भी मजबूत करता है। 15 लाख रुपये की बचत और चीर-फाड़ रहित इलाज निश्चित रूप से हजारों मरीजों की जान बचाएगा।
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वहीं, KGMU की तैयारियां यह इशारा करती हैं कि भविष्य उज्ज्वल है, बस जरूरत है तो सामाजिक सोच में बदलाव की। अंगदान महादान है—इस मंत्र को जन-जन तक पहुंचाना अब केवल सरकार या डॉक्टरों की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हम अंगदान के प्रति जागरूक होते हैं, तो न जाने कितने घरों के चिराग बुझने से बच सकते हैं।
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लखनऊ के हृदय रोग संस्थान में दिल के वॉल्व की बीमारी का इलाज अब 'तावी' (TAVI) विधि से मुफ्त में किया जाएगा, जिसके लिए निजी अस्पतालों में 15 लाख रुपये लगते हैं। पहले चरण में 30 मरीजों का इलाज होगा। वहीं, KGMU में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारियां पूरी हैं, लेकिन अंगदान (डोनर) न मिलने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है, जिसके लिए अब जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
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