खबरीलाल (Khabreelal) विशेष हेल्थ रिपोर्ट:
\r\n\r\nबदलती लाइफस्टाइल और गलत खानपान के कारण आज के समय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी तेजी से पैर पसार रही है। उत्तर प्रदेश (यूपी) से लेकर महाराष्ट्र तक, भारत में 'हेड एंड नेक कैंसर' (Head and Neck Cancer - सिर और गले का कैंसर) के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। हम अक्सर मुंह में होने वाले छालों (Mouth Ulcers) को गर्मी या पेट की खराबी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही छोटी सी लापरवाही कभी-कभी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।READ ALSO:-TPS Music पर रोमांस की नई बहार: 'तारा जो टूटा हुआ है' से सजेगा तिवारी सरकार के सुरों का आसमान, दिग्गजों के गानों की होगी बारिश
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हाल ही में 'विश्व हेड एंड नेक कैंसर दिवस' के अवसर पर मुंबई के प्रसिद्ध एसएसओ हॉस्पिटल (SSO Hospital) के जाने-माने हेड एंड नेक कैंसर सर्जन डॉ. अमित चक्रवर्ती ने एक बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि यदि कोई छाला सामान्य दवाइयों से ठीक नहीं हो रहा है, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। आइए, खबरीलाल की इस विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि विशेषज्ञों ने क्या चेतावनी दी है, कैंसर के कारण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।
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क्या है डॉ. अमित चक्रवर्ती की चेतावनी? (5 से 10 दिन का नियम)
\r\n\r\nमुंह का अल्सर या छाला यूं तो एक आम समस्या है, जो विटामिन की कमी या पेट की गर्मी से हो सकता है। लेकिन डॉ. अमित चक्रवर्ती ने स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि, "यदि आपके मुंह में कोई अल्सर या घाव 5 से 10 दिन से अधिक समय तक बना रहता है, तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यह हेड एंड नेक कैंसर (Oral Cancer) का शुरुआती लक्षण हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच (Biopsy) करानी चाहिए।"
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शुरुआती जांच और समय पर इलाज से न केवल मरीज की जान बचाई जा सकती है, बल्कि सर्जरी के दौरान चेहरे या जबड़े को होने वाले बड़े नुकसान से भी बचा जा सकता है।
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चिंताजनक आंकड़े: 40% मरीजों में लौट सकता है कैंसर
\r\n\r\nकैंसर का इलाज अपने आप में एक लंबी और दर्दनाक प्रक्रिया है, लेकिन इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि यह बीमारी दोबारा लौट सकती है। डॉ. चक्रवर्ती ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि, "हेड एंड नेक कैंसर का सफल इलाज करा चुके हर 100 मरीजों में से 20 से 40 मरीजों में (यानी 40 प्रतिशत तक) कैंसर दोबारा (Recurrence) होने की भारी आशंका बनी रहती है।"
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क्या है समाधान?
\r\n\r\nविशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के इलाज के बाद मरीज को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह पूरी तरह से मुक्त हो गया है। नियमित फॉलो-अप (Follow-up), समय-समय पर स्कैनिंग और एक बेहद स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर ही इसके दोबारा लौटने के खतरे को टाला जा सकता है।
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\r\n कैंसर को मात देने वाले 'योद्धाओं' की कहानी
\r\n\r\nइस अवसर पर कैंसर को मात देकर एक नई जिंदगी जीने वाले मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए, ताकि समाज में जागरूकता फैलाई जा सके।
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- \r\n मिहिर जोबनपुत्रा (43 वर्ष): 43 वर्षीय मिहिर ने बताया कि कैसे एक छोटी सी जांच ने उनकी जिंदगी बचा ली। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी लक्षण को छिपाएं नहीं और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।\r\n \r\n
- \r\n दिनकर आढाव (70 वर्ष): 70 वर्षीय दिनकर जी ने अपने इलाज के सफर को साझा करते हुए कहा कि, "उम्र चाहे जो भी हो, अगर इच्छाशक्ति मजबूत है और समय पर सर्जरी हो जाए, तो कैंसर को हराया जा सकता है।"\r\n \r\n
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दोनों ही कैंसर सर्वाइवर्स ने आम जनता से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे तंबाकू, धूम्रपान और नशे से पूरी तरह दूर रहें।
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खुद देखिए तंबाकू का नुकसान: टोबैको कॉस्ट कैलकुलेटर
\r\n\r\nअक्सर लोग सोचते हैं कि दिन में 10-20 रुपये का गुटखा या तंबाकू खाने से क्या फर्क पड़ता है? लेकिन यह छोटी सी रकम सालों में कितना बड़ा आर्थिक और शारीरिक नुकसान करती है, यह आप खुद इस कैलकुलेटर से चेक करें:
\r\n\r\nहेड एंड नेक कैंसर के 5 सबसे बड़े कारण (Causes of Oral Cancer)
\r\n\r\nविशेषज्ञों के अनुसार, भारत में विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सिर और गले के कैंसर के मामले बढ़ने के पीछे ये प्रमुख कारण हैं:
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- \r\n तंबाकू और गुटखा (Tobacco): खैनी, गुटखा और पान मसाला चबाना मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। इसमें मौजूद केमिकल सीधे गालों के अंदरूनी हिस्से को सड़ा देते हैं।\r\n \r\n
- \r\n सुपारी (Betel Nut): कई लोग मानते हैं कि सादी सुपारी नुकसान नहीं करती, लेकिन डब्लूएचओ (WHO) के अनुसार सुपारी चबाने से भी कैंसर होता है।\r\n \r\n
- \r\n धूम्रपान (Smoking): बीड़ी, सिगरेट या हुक्का पीने से गले, वोकल कॉर्ड और फेफड़ों का कैंसर होता है।\r\n \r\n
- \r\n शराब (Alcohol): जो लोग शराब और तंबाकू दोनों का सेवन एक साथ करते हैं, उनमें हेड एंड नेक कैंसर होने का खतरा 15 गुना तक बढ़ जाता है।\r\n \r\n
- \r\n एचपीवी संक्रमण (HPV Infection): ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus) के कारण भी गले और टॉन्सिल का कैंसर तेजी से फैल रहा है।\r\n \r\n
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कैंसर के 5 शुरुआती लक्षण जिन्हें भूलकर भी न करें नजरअंदाज
\r\n\r\nखबरीलाल अपने पाठकों को सलाह देता है कि यदि आपके शरीर में ये बदलाव दिखें, तो तुरंत ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) से मिलें:
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- \r\n मुंह, जीभ या मसूड़ों पर लाल या सफेद दाग (Leukoplakia) पड़ना।\r\n \r\n
- \r\n 5 दिन से ज्यादा समय तक मुंह का छाला या घाव ठीक न होना।\r\n \r\n
- \r\n खाना निगलने में तेज दर्द या गले में कुछ फंसा हुआ महसूस होना।\r\n \r\n
- \r\n आवाज में अचानक भारीपन या बदलाव आना, जो हफ्तों तक ठीक न हो।\r\n \r\n
- \r\n गर्दन या जबड़े में कोई दर्द रहित गांठ (Lump) का उभरना।\r\n \r\n
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एसएसओ हॉस्पिटल की नई पहल: 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'
\r\n\r\nमरीजों की बढ़ती संख्या और उन्हें बेहतर इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से मुंबई स्थित एसएसओ हॉस्पिटल (SSO Hospital) जल्द ही एक 'हेड एंड नेक कैंसर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' शुरू करने जा रहा है। इस अत्याधुनिक सेंटर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि मरीजों को इलाज के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा।
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यहां ओपीडी जांच, बायोप्सी, जटिल सर्जरी, रिकंस्ट्रक्टिव उपचार (चेहरे के हिस्से को दोबारा बनाना), रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, और मरीजों के पुनर्वास (Rehabilitation) व फॉलो-अप की सभी विश्वस्तरीय सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
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कैंसर कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बशर्ते इसकी पहचान सही समय पर हो जाए। तंबाकू और गुटखे के चंद मिनटों के शौक के लिए अपनी और अपने परिवार की जिंदगी दांव पर न लगाएं। अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें और किसी भी असामान्य लक्षण को गंभीरता से लें।
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Sabse pehle comment karne wale banein.