नई दिल्ली: जब पूरी दुनिया की निगाहें पश्चिम एशिया (West Asia) में सुलग रही जंग और उसके कारण आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी हैं, तब भारत से एक बेहद सुकून देने वाली खबर सामने आई है। आम आदमी, जिसके घर का बजट सीधे तौर पर पेट्रोल (Petrol), डीजल (Diesel) और रसोई गैस (LPG) की कीमतों से तय होता है, उसे महंगाई के इस वैश्विक झटके से पूरी तरह बचा लिया गया है।READ ALSO:-रसोई गैस के नाम पर 'डिजिटल डकैती': WhatsApp पर आया एक मैसेज और पलक झपकते ही जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई साफ!
\r\n\r\n\r\n\r\n
बुधवार को पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश की जनता को यह भरोसा दिलाया है कि फ्यूल सप्लाई (Fuel Supply) को लेकर किसी भी तरह की घबराहट या 'पैनिक बाइंग' (Panic Buying) की जरूरत नहीं है। भारत का कच्चा तेल भंडार (Crude Stock) सुरक्षित है, हमारी रिफाइनरियां दिन-रात अपनी पूरी क्षमता (Peak Capacity) पर काम कर रही हैं, और सरकार तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies - OMCs) का पूरा घाटा खुद वहन कर रही है ताकि जनता की जेब पर एक रुपये का भी अतिरिक्त बोझ न पड़े।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आइए, इस पूरी खबर का हर वो पहलू विस्तार से समझते हैं जो आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, देश की अर्थव्यवस्था और भारत की कूटनीतिक ताकत से जुड़ा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कच्चे तेल का गणित: 70 डॉलर से 100 डॉलर का सफर और भारत की स्थिरता
\r\n\r\nवैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कच्चे तेल पर निर्भर करती है। पिछले दो महीनों में, भू-राजनीतिक तनाव (Geo-political Tensions) और पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम रॉकेट की रफ्तार से भागे हैं।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
- \r\n
- \r\n क्रूड का उछाल: जो कच्चा तेल मात्र दो महीने पहले 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा था, वह आज 100 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। आमतौर पर, जब कच्चा तेल इतना महंगा होता है, तो भारत जैसे देशों में (जो अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करते हैं) पेट्रोल-डीजल के दाम रातों-रात 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n भारत में क्यों स्थिर हैं दाम? भारत सरकार ने इस बार एक अलग रणनीति अपनाई है। घरेलू उपभोक्ताओं को इस भयंकर अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सरकार ने सीधे तौर पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में कटौती की रणनीति को बरकरार रखा है।\r\n \r\n
- \r\n आपको याद दिला दें कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम 6 अप्रैल, 2022 से नहीं बढ़ाए गए हैं। इसके विपरीत, मार्च 2024 में आम जनता को बड़ी राहत देते हुए दोनों ईंधनों के दाम 2 रुपये प्रति लीटर कम किए गए थे। 100 डॉलर क्रूड के बावजूद आज भी वही घटी हुई कीमतें लागू हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
30 हजार करोड़ का सरकारी पैकेज: तेल कंपनियों (OMCs) को कैसे बचाया जा रहा है?
\r\n\r\nजब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है और देश में उसे पुरानी (सस्ती) कीमतों पर बेचा जाता है, तो तेल कंपनियों (जैसे Indian Oil, BPCL, HPCL) को भारी घाटा उठाना पड़ता है। अर्थशास्त्र की भाषा में इसे 'अंडर-रिकवरी' (Under-Recovery) कहा जाता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अगर तेल कंपनियां लगातार घाटे में रहेंगी, तो वे दिवालिया हो सकती हैं। इस संकट को टालने के लिए भारत सरकार ने अपना खजाना खोल दिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n 2022-23 का घाटा: पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि 2022-23 के वित्तीय वर्ष में जब ऐसा ही संकट आया था, तब भारत सरकार ने OMCs को उनके नुकसान की भरपाई के लिए लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की नकद सहायता प्रदान की थी।\r\n \r\n
- \r\n 2025-26 के लिए मास्टरस्ट्रोक: मौजूदा युद्ध के हालात और 100 डॉलर पार कर चुके कच्चे तेल के कारण कंपनियों को फिर से भारी घाटा होने का अनुमान है। इस 'अंडर-रिकवरी' को कवर करने के लिए भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए OMCs को लगभग 30,000 करोड़ रुपये (Rs 30,000 Crore) की भारी-भरकम वित्तीय मदद को मंजूरी दे दी है।\r\n \r\n
- \r\n इसका सीधा अर्थ है कि सरकार ने तेल कंपनियों का घाटा अपने सिर ले लिया है ताकि पेट्रोल पंप पर आम आदमी को महंगाई का झटका न लगे।\r\n \r\n
\r\n\r\n
'पैनिक बाइंग' न करें: एलपीजी और फ्यूल सप्लाई पर सरकार का स्पष्टीकरण
\r\n\r\nबाजार में अफवाहों का बाजार गर्म है कि आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडरों की भारी कमी होने वाली है। इसके कारण लोग घबराहट में अतिरिक्त गैस सिलेंडर बुक कर रहे हैं (Panic Buying) और पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लगाने की सोच रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने इन सभी अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए कहा:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n "हमारे पास पर्याप्त क्रूड स्टॉक है। भारत सरकार ने अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की सप्लाई का पूरा और पुख्ता इंतजाम कर लिया है। देश की सभी रिफाइनरियां अपनी पीक कैपेसिटी (100% क्षमता) पर काम कर रही हैं।"\r\n \r\n
- \r\n एलपीजी (LPG) का गणित: भारत रसोई गैस (LPG) के लिए लगभग 60% आयात (Import Dependency) पर निर्भर है। इसके बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG सिलेंडर की कीमत में एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है।\r\n \r\n
- \r\n डिजिटल और पारदर्शी बुकिंग: देश के किसी भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर के पास गैस की कमी नहीं है। सिस्टम को इतना पारदर्शी बना दिया गया है कि वर्तमान में लगभग 92% बुकिंग ऑनलाइन हो रही हैं और 81% डिलीवरी 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (DAC) के जरिए की जा रही है, जिससे कालाबाजारी की गुंजाइश खत्म हो गई है।\r\n \r\n
- \r\n सरकार ने 70% तक सप्लाई पहले ही पक्की (Secure) कर ली है और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त केरोसीन (Kerosene) का कोटा भी आवंटित कर दिया है।\r\n \r\n
- \r\n इसके साथ ही, पाइपलाइन वाली गैस (PNG) के नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। सिर्फ मार्च महीने में ही देश भर में लगभग 3 लाख 25 हज़ार नए PNG कनेक्शनों के लिए गैस सप्लाई शुरू की गई है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
जमाखोरों पर सरकार का चाबुक: 2800 रेड और 500 सिलेंडर जब्त
\r\n\r\nजहां एक तरफ सरकार राहत दे रही है, वहीं कुछ असामाजिक तत्व और कालाबाज़ारी करने वाले लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर अफवाहें फैला रहे हैं और गैस सिलेंडरों की होर्डिंग (जमाखोरी) कर रहे हैं, ताकि कृत्रिम कमी (Artificial Shortage) पैदा करके इसे ब्लैक में ऊंचे दामों पर बेचा जा सके।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
- \r\n
- \r\n कड़ी कार्रवाई: मंत्रालय ने राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अफवाह फैलाने वालों और जमाखोरों से सख्ती से निपटा जाए।\r\n \r\n
- \r\n छापेमारी: इसी कड़ी में मंगलवार को देशभर में बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया। कल एक ही दिन में करीब 2,800 जगहों पर रेड (छापेमारी) की गई और अवैध रूप से जमा किए गए करीब 500 कॉमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि पैनिक पैदा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
एक्सपोर्ट लेवी (Export Levy): घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता
\r\n\r\nभारत दुनिया के सबसे बड़े तेल रिफाइनिंग हब में से एक है। हमारी कंपनियां कच्चा तेल मंगाकर उसे रिफाइन करती हैं और फिर तैयार पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (Aviation Turbine Fuel - विमान ईंधन) को यूरोप और अन्य देशों में महंगे दामों पर एक्सपोर्ट (निर्यात) करती हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
100 डॉलर क्रूड के दौर में प्राइवेट रिफाइनरियां ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए घरेलू बाजार के बजाय विदेशों में तेल बेचना पसंद करती हैं। इस पर लगाम कसने के लिए भारत सरकार ने एक्सपोर्ट लेवी (Export Levy) का ब्रह्मास्त्र चलाया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकार ने ATF और डीजल पर एक्सपोर्ट लेवी लगा दी है। इसका मतलब है कि अगर कोई कंपनी भारत से बाहर डीजल बेचेगी, तो उसे सरकार को भारी टैक्स देना होगा।\r\n \r\n
- \r\n इस कड़े कदम से यह सुनिश्चित हो गया है कि कंपनियां पहले भारत के घरेलू बाजार (Domestic Market) की जरूरतें पूरी करेंगी। इसी का परिणाम है कि आज देश में पेट्रोल और डीजल की प्रचुर मात्रा उपलब्ध है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
युद्धग्रस्त पश्चिम एशिया: भारत का कूटनीतिक प्रयास और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन
\r\n\r\nतेल के इस खेल के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया (विशेषकर ईरान और इजराइल के बीच तनाव) का भू-राजनीतिक संकट है। इस संकट के बीच भारत न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को संभाल रहा है, बल्कि वहां फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की कूटनीतिक और रेस्क्यू सफलताओं की विस्तृत जानकारी दी:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n राजनयिक मोर्चे पर सक्रियता: भारत वैश्विक समुदाय के साथ लगातार संपर्क में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रॉब जेटन (Rob Jetten) से फोन पर विस्तृत बातचीत की है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ पश्चिम एशिया के बिगड़े हालात पर गंभीर चर्चा की। पीएम मोदी ने इस क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।\r\n \r\n
- \r\n विदेश मंत्री का दखल: विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भी पुर्तगाल के विदेश मंत्री पाउलो रंगेल (Paulo Rangel) से फोन पर बात की और पश्चिम एशिया के संघर्ष को रोकने के लिए वैश्विक दबाव बनाने की रणनीतियों पर विचार साझा किए।\r\n \r\n
\r\n\r\n
ऑपरेशन इवैक्यूएशन: तेहरान से 1,171 भारतीयों की सुरक्षित वापसी
\r\n\r\nयुद्ध के कारण ईरान (Iran) के आसमान में कमर्शियल उड़ानें बाधित हैं। ऐसे में वहां फंसे भारतीय छात्रों और कामगारों की जान खतरे में थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n प्रवक्ता ने बताया कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया है।\r\n \r\n
- \r\n अब तक 1,171 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वहां से निकाला जा चुका है।\r\n \r\n
- \r\n इनमें 818 भारतीय छात्र शामिल हैं, जो ईरान में मेडिकल और अन्य उच्च शिक्षा ले रहे थे।\r\n \r\n
- \r\n चूंकि हवाई मार्ग सुरक्षित नहीं है, इसलिए दूतावास ने 'लैंड बॉर्डर' (ज़मीनी रास्ते) का इस्तेमाल किया। इन सभी भारतीयों को सुरक्षित तरीके से ईरान की सीमा पार कराकर पड़ोसी देशों आर्मेनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) पहुंचाया जा रहा है, जहां से उन्हें विशेष विमानों के जरिए भारत लाया जाएगा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
एक मजबूत और सुरक्षित भारत
\r\n\r\nआज जब यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित देश ऊर्जा संकट (Energy Crisis) और महंगाई की मार से कराह रहे हैं, भारत की स्थिति एक मिसाल बनकर उभरी है। 100 डॉलर प्रति बैरल क्रूड ऑयल कोई छोटी चुनौती नहीं है, लेकिन 30 हजार करोड़ की सब्सिडी, रिफाइनरियों की फुल कैपेसिटी, जमाखोरों पर पुलिसिया डंडा और मजबूत कूटनीति के दम पर भारत सरकार ने अपने 140 करोड़ नागरिकों को इस तूफान से सुरक्षित बचा लिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जनता से बस एक ही अपील है—अफवाहों पर ध्यान न दें, गैस और पेट्रोल की कोई कमी नहीं है, इसलिए जरूरत से ज्यादा स्टॉक करके पैनिक का हिस्सा न बनें।
Sabse pehle comment karne wale banein.