जब भी हमारे मन में घर खरीदने, दुकान खोलने या किसी बड़े व्यावसायिक उपक्रम के लिए कर्ज (Loan) लेने की बात आती है, तो सबसे पहले देश के बड़े और कमर्शियल बैंकों जैसे कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) या एक्सिस बैंक का नाम ज़ेहन में आता है। ये बैंक शहरी और महानगरों की आर्थिकी को साधने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।READ ALSO:-स्पाइडर-मैन की बॉक्स ऑफिस आंधी में भी कायम रहा ‘दिल दीवाना हो गया’ का जादू, हॉलीवुड को टक्कर देकर नए कलाकारों ने रचा इतिहास!
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
लेकिन, जब हम भारत की असली आत्मा यानी गांवों, कस्बों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की ओर देखते हैं, तो वहां की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में 'ग्रामीण सहकारी बैंक' (Rural Co-operative Banks – RCBs) रीढ़ की हड्डी साबित होते हैं। इन बैंकों की पहुंच सीधे तौर पर देश के उस आम आदमी तक होती है जो बड़े कॉर्पोरेट बैंकों की जटिल औपचारिकताओं और लंबी कागजी कार्रवाई के जाल में नहीं फंसना चाहता।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इसी कड़ी में, देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन ग्रामीण सहकारी बैंकों को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत, पारदर्शी और सक्षम बनाने के लिए नए नियमों का एक व्यापक ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया है। आरबीआई के इस कदम का उद्देश्य न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग व्यवस्था को दुरुस्त करना है, बल्कि किसी भी संभावित वित्तीय धोखेधड़ी (Fraud) या बड़े वित्तीय जोखिमों पर लगाम कसना भी है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट के जरिए समझते हैं कि आरबीआई के इन नए प्रस्तावों से बैंकिंग सिस्टम में क्या बदलाव आएंगे और आम ग्राहकों को इससे क्या-क्या बड़े फायदे मिलने वाले हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आरबीआई का मुख्य उद्देश्य: ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी और मजबूती

\r\n\r\n
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लाए गए इन नए प्रस्तावों के केंद्र में ग्रामीण सहकारी बैंकों की कार्यक्षमता को बढ़ाना है। अक्सर यह देखा गया है कि कड़े और पुराने नियमों के कारण छोटे सहकारी बैंक ग्राहकों की बदलती और आधुनिक जरूरतों के हिसाब से लचीला रुख नहीं अपना पाते थे।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
आरबीआई का मुख्य उद्देश्य इन बैंकों को अधिक 'ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी' (काम करने की स्वतंत्रता) देना है। इसके तहत बैंक अपने स्थानीय स्तर की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए ऋण नीतियों को तय कर सकेंगे। जब ग्रामीण सहकारी बैंक अंदरूनी तौर पर मजबूत होंगे, तो वे गांवों और छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ कृषि और छोटे व्यवसायों को गति दे सकेंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

फ्रॉड और बड़े जोखिमों (Risks) पर नकेल कसने के लिए नए नियम

\r\n\r\n
बैंकिंग इतिहास में कई बार ऐसा देखा गया है कि कुछ सहकारी या छोटे बैंक किसी एक बड़े उद्योगपति या कॉर्पोरेट घराने को नियमों को ताक पर रखकर बहुत बड़ा लोन दे देते हैं। बाद में जब वह कर्ज नहीं चुकाया जाता, तो वह नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स यानी एनपीए (NPA) में तब्दील हो जाता है और बैंक डूबने के कगार पर पहुंच जाते हैं। आम जनता की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए आरबीआई ने इन नए प्रस्तावों में सख्त 'एक्सपोजर लिमिट्स' (Exposure Limits) तय की हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    सिंगल पर्सन या कंपनी के लिए सीमा (Single Borrower Limit): नए नियमों के प्रस्ताव के अनुसार, कोई भी ग्रामीण सहकारी बैंक अब अपनी कुल टियर-1 कैपिटल (Tier-1 Capital) का अधिकतम 20% ही किसी एक व्यक्ति या अकेली कंपनी को लोन के रूप में दे सकेगा। इस सीमा के तय होने से सारा पैसा किसी एक व्यक्ति के पाले में नहीं जाएगा।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    ग्रुप ऑफ कंपनीज के लिए सीमा (Group Exposure Limit): किसी एक कॉर्पोरेट समूह या 'ग्रुप ऑफ कंपनीज' को बैंक की टियर-1 पूंजी के अधिकतम 25% से ज्यादा का कर्ज नहीं दिया जाएगा।
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

इन नियमों का प्रभाव:

\r\n\r\n
आरबीआई के इन सख्त और स्पष्ट प्रावधानों से लोन डूबने (Default) का खतरा नगण्य हो जाएगा। किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या अंदरूनी फ्रॉड पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सकेगी, जिससे बैंक में जमा आम जनता का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

अब ग्रामीण इलाकों में मिलेगा पूरे 3 करोड़ रुपये तक का होम लोन

\r\n\r\n
भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में पक्के, आधुनिक और बड़े मकानों के निर्माण की मांग में जबरदस्त तेजी आई है। लोग अब कच्चे या छोटे घरों की जगह बेहतर आवासीय सुविधाओं वाले मकान बनाना चाहते हैं। आम नागरिकों की इसी जरूरत को समझते हुए आरबीआई ने होम लोन की सीमा को काफी हद तक बढ़ा दिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    10,000 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि वाले बैंक: जिन ग्रामीण सहकारी बैंकों के पास 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की कुल जमा राशि (Deposit Base) मौजूद है, वे अब अपने ग्राहकों को 3 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम होम लोन मुहैया करा सकेंगे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    बोर्ड को मिली स्वायत्तता (Board Autonomy): इन बड़े और मजबूत बैंकों के बोर्ड को यह अधिकार दे दिया गया है कि वे अपने ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए होम लोन की अवधि (Tenure) और मोरेटोरियम पीरियड (Moratorium Period) खुद तय कर सकें।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कस्टमाइज्ड विकल्प: इस छूट के मिलने से ग्राहकों को अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार लोन चुकाने के बेहद लचीले और अनुकूल विकल्प प्राप्त होंगे।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

लोकल बिजनेस, एमएसएमई (MSME) और खेती को मिलेगी जबरदस्त रफ्तार

\r\n\r\n
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गाड़ी मुख्य रूप से कृषि और छोटे उद्योगों पर टिकी होती है। आरबीआई ने ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए एक और बड़ा सकारात्मक बदलाव करते हुए अधिकांश सेक्टरों के लिए तय की जाने वाली 'सेक्टर-वाइज लिमिट्स' (Sector-wise Limits) को हटाने का प्रस्ताव रखा है—सिर्फ 'रियल एस्टेट' सेक्टर को छोड़कर।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस बदलाव का सीधा और व्यावहारिक मतलब यह है कि अब ग्रामीण बैंक अपने स्थानीय क्षेत्र और वहां की भौगोलिक व आर्थिक जरूरतों के मुताबिक फैसले ले सकेंगे। बैंक कृषि क्षेत्र (Agriculture), ग्रामीण एमएसएमई (MSME), हस्तशिल्प और स्थानीय छोटे कारोबारियों को पहले की तुलना में अधिक मात्रा में और आसानी से ऋण वितरित कर पाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर व्यापार फूलेगा-फलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिलेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आंकड़ों और प्रावधानों की त्वरित तालिका (At a Glance Overview)

\r\n\r\n\r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n \r\n
\r\n
नियामक बदलाव / प्रावधान
\r\n
\r\n
वर्तमान प्रस्तावित नियम (RBI Draft Guidelines)
\r\n
\r\n
इसका मुख्य उद्देश्य व लाभ
\r\n
\r\n
होम लोन की अधिकतम सीमा
\r\n
\r\n
बड़े सहकारी बैंकों (₹10,000 करोड़ से अधिक डिपाजिट वाले) के लिए 3 करोड़ रुपये तक।
\r\n
\r\n
ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़े और पक्के मकानों के निर्माण को बढ़ावा देना।
\r\n
\r\n
सिंगल एक्सपोजर लिमिट
\r\n
\r\n
कुल टियर-1 कैपिटल का अधिकतम 20%।
\r\n
\r\n
किसी एक व्यक्ति को भारी-भरकम लोन देकर बैंक को जोखिम में डालने से रोकना।
\r\n
\r\n
ग्रुप एक्सपोजर लिमिट
\r\n
\r\n
कुल टियर-1 कैपिटल का अधिकतम 25%।
\r\n
\r\n
कॉर्पोरेट समूहों से जुड़े डिफॉल्ट और फ्रॉड के जोखिम को कम करना।
\r\n
\r\n
लोन अवधि और मोरेटोरियम
\r\n
\r\n
संबंधित बैंक के बोर्ड को खुद तय करने का अधिकार।
\r\n
\r\n
ग्राहकों के अनुकूल रीपेमेंट स्ट्रक्चर तैयार करना।
\r\n
\r\n
सेक्टर-वाइज लिमिट्स
\r\n
\r\n
रियल एस्टेट को छोड़कर अधिकांश सेक्टरों से हटाने का प्रस्ताव।
\r\n
\r\n
कृषि, एमएसएमई और स्थानीय लघु उद्योगों को अधिक कर्ज देना।
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

आम उधारकर्ताओं और ग्राहकों को क्या-क्या डायरेक्ट फायदे मिलेंगे?

\r\n\r\n
भले ही ये सारे प्रावधान अभी ड्राफ्ट प्रस्ताव के रूप में सामने आए हैं और इन पर स्टेकहोल्डर्स के बीच चर्चाओं का दौर जारी है, लेकिन इनके धरातल पर उतरते ही आम जनता के लिए बैंकिंग और फाइनेंस का परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    बड़ा हाउसिंग फाइनेंस मिलना हुआ आसान: जो ग्रामीण परिवार पहले कम लोन लिमिट के कारण अपने सपनों का बड़ा घर नहीं बना पाते थे, वे अब आसानी से 3 करोड़ तक के होम लोन का लाभ उठा सकेंगे। इसके लिए उन्हें महानगरों के बड़े बैंकों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    ऋण चुकाने की शर्तों में सहूलियत: बोर्ड स्तर पर लिए जाने वाले फैसलों के कारण ग्राहकों को अपनी ईएमआई (EMI) और लोन की अवधि को अपनी सहूलियत के अनुसार कस्टमाइज कराने का बेहतरीन अवसर मिलेगा।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    सहकारी बैंकों पर बढ़ा हुआ भरोसा: कड़े एक्सपोजर नियमों और पारदर्शी प्रावधानों के चलते ग्रामीण सहकारी बैंकों की वित्तीय सेहत सुधरेगी। इससे ग्राहकों के मन में यह विश्वास और अधिक मजबूत होगा कि उनका जमा धन पूरी तरह सुरक्षित हाथों में है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
भारतीय रिजर्व बैंक का यह नया ड्राफ्ट प्रस्ताव ग्रामीण भारत की वित्तीय संरचना को एक नया आयाम देने वाला साबित होगा। जब देश के गांव आर्थिक रूप से मजबूत होंगे, तभी राष्ट्र की मुख्य अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बन सकेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ग्रामीण सहकारी बैंकों के नियमों में किया गया यह बदलाव न केवल इन बैंकों को भविष्य के बड़े वित्तीय संकटों से सुरक्षित रखेगा, बल्कि आम नागरिकों के लिए पक्के मकान का सपना साकार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार व कारोबार फैलाने के स्वर्णिम द्वार खोलेगा। आने वाले दिनों में जब ये प्रस्ताव पूर्ण रूप से लागू किए जाएंगे, तो यह भारतीय बैंकिंग सेक्टर और ग्रामीण जनता दोनों के लिए एक विन-विन (Win-Win) स्थिति साबित होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें