आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने आम जनता के बीच काफी भ्रम पैदा कर दिया है। इस वीडियो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नाम का इस्तेमाल किया गया है। वायरल वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ने एक नई योजना शुरू की है जिसके तहत अब सभी सरकारी और निजी बैंक पुराने, दुर्लभ और एंटीक नोट व सिक्के खरीद रहे हैं।READ ALSO:-इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 'बालिगों के बीच आपसी सहमति से लंबे समय तक चले शारीरिक संबंध को बलात्कार नहीं माना जा सकता'
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वीडियो में यह भी कहा जा रहा है कि बैंक कर्मचारी खुद लोगों के घर-घर जाकर ऐसे पुराने नोट और सिक्के इकट्ठा कर रहे हैं और इसके बदले में लोगों को लाखों रुपये दिए जा रहे हैं। यह आकर्षक दावा उन लोगों को अपनी ओर बहुत तेजी से खींच रहा है, जिनके पास पुराने 5 रुपये, 10 रुपये के नोट (ट्रैक्टर वाले नोट) या माता वैष्णो देवी वाले पुराने सिक्के मौजूद हैं। रातों-रात अमीर बनने की चाहत में लोग इस वीडियो को बिना सोचे-समझे अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ शेयर कर रहे हैं।
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PIB Fact Check ने बताई वायरल वीडियो की सच्चाई
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इस भ्रामक और तेजी से फैलते वीडियो का संज्ञान लेते हुए, भारत सरकार की आधिकारिक फैक्ट चेक एजेंसी 'पीआईबी फैक्ट चेक' (PIB Fact Check) ने इसकी गहन जांच की है। PIB Fact Check ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी (Fake) है।
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एजेंसी ने अपने आधिकारिक एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल पर इस वीडियो को साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा कोई भी ऐलान नहीं किया है। यह वीडियो असली नहीं है, बल्कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का गलत इस्तेमाल करके बनाया गया है। इसे 'डीपफेक' (Deepfake) कहा जाता है। इस वीडियो में पीएम मोदी के पुराने भाषणों के वीडियो को लेकर एआई के जरिए उनकी आवाज (Voice Cloning) और होंठों के हिलने (Lip-syncing) को एडिट किया गया है, ताकि लोगों को यह लगे कि प्रधानमंत्री खुद यह बात कह रहे हैं।
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सरकार या RBI की तरफ से नहीं है ऐसी कोई योजना

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PIB Fact Check में यह बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि न तो प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), न ही वित्त मंत्रालय और न ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से ऐसी कोई योजना शुरू की गई है, जिसमें बैंक पुराने या एंटीक नोट और सिक्के खरीद रहे हों। बैंक का काम पुराने और कटे-फटे नोटों को बदलकर नए नोट देना है, न कि किसी 'एंटीक वैल्यू' के आधार पर लाखों रुपये देकर सिक्के खरीदना।
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी पूर्व में कई बार स्पष्टीकरण जारी किया है कि वह पुराने नोटों या सिक्कों की खरीद-फरोख्त में कभी शामिल नहीं होता है और न ही वह इस तरह के लेनदेन के लिए किसी से कोई कमीशन या शुल्क मांगता है। इस तरह के दावे सिर्फ और सिर्फ लोगों को भ्रमित करने और एक सुनियोजित साइबर ठगी (Cyber Fraud) को अंजाम देने के मकसद से फैलाए जा रहे हैं।
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साइबर ठगों का नया जाल: कैसे काम करता है यह स्कैम?

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विशेषज्ञों और साइबर सेल का कहना है कि यह फर्जी वीडियो एक बहुत बड़े घोटाले का हिस्सा हो सकता है। ठग अक्सर इस तरह के वीडियो के साथ एक संदिग्ध लिंक या मोबाइल नंबर देते हैं। जब कोई व्यक्ति अपने पुराने नोट या सिक्के बेचने के लिए उनसे संपर्क करता है, तो ठग उनसे कहते हैं कि उनके सिक्के की कीमत लाखों में है।
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इसके बाद ठग लोगों से 'रजिस्ट्रेशन फीस', 'आरबीआई चार्ज', या 'टैक्स' के नाम पर कुछ हजार रुपये की मांग करते हैं। कई बार वे लोगों से उनका बैंक खाता नंबर, आधार कार्ड और ओटीपी (OTP) भी मांग लेते हैं। जैसे ही पीड़ित व्यक्ति लालच में आकर पैसे ट्रांसफर करता है या जानकारी साझा करता है, ठग उनका खाता खाली कर देते हैं और नंबर ब्लॉक कर देते हैं।
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सरकार की अपील: सावधानी बरतें और अफवाहों से बचें

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इस घटना के बाद सरकार और PIB Fact Check ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे भ्रामक वीडियो, मैसेज या लुभावने ऑफरों पर बिल्कुल भी भरोसा न करें। इंटरनेट पर मौजूद हर चीज सच नहीं होती। सरकार ने नागरिकों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सख्त सलाह दी है:
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    बिना जांचे फॉरवर्ड न करें: किसी भी संदिग्ध लिंक, ऑडियो या वीडियो को बिना उसकी सत्यता जाने अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स या फेसबुक पर शेयर न करें। आपकी एक गलती दूसरों को ठगी का शिकार बना सकती है।
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    निजी जानकारी साझा न करें: किसी भी अनजान व्यक्ति को फोन पर या किसी अनधिकृत वेबसाइट पर अपने बैंक खाते की डिटेल, डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर, CVV, या OTP न दें।
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    पैसे न भेजें: कोई भी सरकारी विभाग या बैंक किसी योजना का लाभ देने के लिए या पुराने नोट-सिक्के खरीदने के लिए अग्रिम शुल्क (Advance Fee) नहीं मांगता है।
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    शिकायत दर्ज करें: यदि आप अनजाने में ऐसी किसी ठगी का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाएं या 1930 डायल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
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सही जानकारी कहां से लें?

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सरकार ने नागरिकों को स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि किसी भी सरकारी योजना, घोषणा या नियम की सही और प्रामाणिक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट्स (जिनके अंत में .gov.in या .nic.in हो) का ही उपयोग करें।
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यदि आप किसी सरकारी योजना के बारे में जानना चाहते हैं, तो 'माईस्कीम' (MyScheme) पोर्टल एक बेहद भरोसेमंद प्लेटफॉर्म है। यह भारत सरकार का एक आधिकारिक पोर्टल है, जहां सभी मंत्रालयों और विभागों की सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध है। आप इस पोर्टल पर जाकर यह क्रॉस-चेक कर सकते हैं कि वायरल हो रही योजना असल में मौजूद है या नहीं।
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बढ़ता डीपफेक (Deepfake) का खतरा

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PIB Fact Check का यह हालिया मामला एक बार फिर से इस बात की पुष्टि करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का गलत इस्तेमाल कितनी तेजी से बढ़ रहा है। आज के समय में ठग किसी भी मशहूर राजनेता, अभिनेता या सेलिब्रिटी की आवाज और चेहरे का क्लोन बनाकर फर्जी वीडियो तैयार कर सकते हैं।
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ऐसे में देश के सभी नागरिकों के लिए डिजिटल जागरूकता (Digital Literacy) और सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है। जब भी आप इंटरनेट पर कोई ऐसा वीडियो देखें जो कुछ ज्यादा ही लुभावना या अविश्वसनीय लगे, तो उसे सच मानने से पहले प्रतिष्ठित समाचार वेबसाइट्स या पीआईबी फैक्ट चेक (PIB Fact Check) के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जाकर उसकी सच्चाई जरूर परख लें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और डिजिटल दुनिया के इन नए खतरों से खुद को बचाएं।
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सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का एक डीपफेक वीडियो वायरल है जिसमें पुराने नोट और सिक्के खरीदने का दावा किया गया है। PIB Fact Check ने इसे पूरी तरह फर्जी करार दिया है और स्पष्ट किया है कि सरकार या RBI ऐसी कोई योजना नहीं चला रहे हैं। यह वीडियो साइबर ठगों द्वारा लोगों से रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर पैसे ऐंठने की एक चाल है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें और आधिकारिक वेबसाइट्स पर ही भरोसा करें।
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