खबरीलाल बिजनेस डेस्क: आजकल हम एक क्लिक पर राशन, पैक्ड फूड और बेबी प्रोडक्ट्स अपने घर मंगा लेते हैं, लेकिन क्या ऑनलाइन दिखाए जाने वाले स्वास्थ्य के दावे सच होते हैं?READ ALSO:-ट्रेन यात्रियों के लिए जरूरी खबर: तत्काल टिकट बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव, 1 अगस्त से लागू होंगे नए 'टोकन टाइमिंग' और 'प्राथमिकता श्रेणी'
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इसी मुद्दे पर 'उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण संबंधी संसदीय स्थायी समिति' ने लोकसभा में अपनी 15वीं रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट का शीर्षक है— "Regulation of Packaged Commodities with Specific Reference to Sugar Content in Baby Products and other Food Products" (पैकेट बंद वस्तुओं का विनियमन: बेबी उत्पादों और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की मात्रा के विशेष संदर्भ में)। इस रिपोर्ट में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक दावों को रोकने के लिए एक बेहद सख्त और समन्वित राष्ट्रीय निगरानी तंत्र बनाने की सिफारिश की गई है।
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1. ऑनलाइन खाद्य बिक्री और भ्रामक दावों की बढ़ती चुनौती

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समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि ई-कॉमर्स (E-commerce) के जरिए पैक्ड फूड की ऑनलाइन बिक्री में भारी उछाल आया है। इस तेजी ने उपभोक्ताओं के सामने सही लेबलिंग और सच्चे दावों को पहचानने की एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अक्सर उत्पादों के पोषक तत्वों (Nutrition Facts) को लेकर बड़े-बड़े और भ्रामक दावे किए जाते हैं, जो वास्तविकता में पूरी तरह सच नहीं होते और उपभोक्ता गुमराह हो जाते हैं।
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2. बनेगी एक संयुक्त निगरानी समिति (Joint Monitoring Framework)

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इस चुनौती से सख्ती से निपटने के लिए संसदीय समिति ने एक 'संयुक्त मोर्चा' बनाने की सिफारिश की है, जिसमें ये प्रमुख संस्थाएं शामिल होंगी:
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    उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs)
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    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)
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    केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA)
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    राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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यह संयुक्त निगरानी तंत्र (Monitoring Framework) सभी ई-कॉमर्स साइटों पर लिस्टेड खाद्य उत्पादों की बारीकी से जांच करेगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जो ऑनलाइन दावा किया जा रहा है, वही पैकेट के अंदर मौजूद है।
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3. FOPNL: पैकेट के सामने होगी 'रंगीन चेतावनी' (Color-coded Warnings)

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संसदीय समिति ने सितंबर 2022 से लंबित पड़े 'फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग' (FOPNL) नियमों को बिना किसी देरी के तुरंत लागू करने का निर्देश दिया है।
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    नंबरों का खेल होगा खत्म: समिति का मानना है कि पैकेट के पीछे बहुत छोटे अक्षरों में केवल संख्याओं (नंबरों) में चीनी (Sugar), नमक (Sodium) या फैट की मात्रा लिख देने से आम उपभोक्ता यह नहीं समझ पाता कि उत्पाद सेहत के लिए कितना खतरनाक है।
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    क्या होगा नया नियम? अब पैकेट के ठीक सामने वाले हिस्से पर साफ, सरल और आसानी से समझ आने वाली 'रंगीन चेतावनी' (जैसे अधिक चीनी होने पर लाल रंग का निशान) होनी चाहिए। यह वर्गीकरण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिक मानकों पर आधारित होना चाहिए।
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4. बेबी फूड और बच्चों के खाने पर बेहद कड़े नियम (Strict Rules for Baby Food)

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हाल ही में कई बड़ी कंपनियों के बेबी फूड में अत्यधिक शुगर मिलने के विवाद के बाद, समिति ने बच्चों की सेहत को लेकर सबसे सख्त रुख अपनाया है:
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    एडेड शुगर की जानकारी: शिशुओं और बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के पैकेट के ठीक सामने यह लिखना अनिवार्य किया जाए कि उसमें कितनी 'एडेड शुगर' (Added Sugar) है (ग्राम प्रति सर्विंग)।
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    दैनिक ऊर्जा आवश्यकता: यह भी बताया जाए कि यह शुगर बच्चे की दैनिक ऊर्जा आवश्यकता (Daily Energy Requirement) का कितना प्रतिशत है।
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    चीनी की अधिकतम सीमा: समिति ने सुझाव दिया है कि बच्चों के पैक्ड फूड में चीनी की एक अधिकतम वैज्ञानिक सीमा (Maximum Limit) तय की जाए और इन बेबी फूड नियमों की हर दो से तीन साल में कड़ी समीक्षा हो।
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5. नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर लगेगा भारी जुर्माना (Heavy Penalties)

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भ्रामक और झूठे विज्ञापन देने वाली फूड कंपनियों पर नकेल कसने के लिए समिति ने कड़े दंड का प्रावधान करने की बात कही है।
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    श्रेणीबद्ध जुर्माना (Graded Penalties): बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं पर उनके अपराध के अनुसार श्रेणीबद्ध जुर्माना लगाया जाना चाहिए।
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    विज्ञापन हटाना और नाम सार्वजनिक करना: भ्रामक विज्ञापनों को तुरंत बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाएगी। साथ ही, उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के नाम सार्वजनिक (Publicly Shamed) किए जाएंगे।
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संसदीय समिति की ये सिफारिशें अगर जल्द ही कानून का रूप लेती हैं, तो यह भारतीय उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य अधिकारों की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम होगा। इससे ई-कॉमर्स कंपनियों और फूड ब्रांड्स की जवाबदेही तय होगी और कोई भी कंपनी 'हेल्दी' (Healthy) होने का झूठा दावा करके अपना सामान नहीं बेच सकेगी। खबरीलाल बिजनेस डेस्क इन नियमों से जुड़े हर नए अपडेट पर नजर बनाए रखेगा।
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