नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय लोगों का दिन बिना नुक्कड़ की चाय, समोसे, वड़ा पाव या चटपटे छोले-भटूरे के पूरा नहीं होता। लेकिन अब आपके इस पसंदीदा जायके पर वैश्विक महंगाई की बुरी नजर लग गई है। दुनिया के एक हिस्से—खासकर मिडिल ईस्ट (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और जंग का सीधा असर अब भारत के आम आदमी की थाली और जेब पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई चेन प्रभावित होने और कमर्शियल गैस सिलेंडरों (Commercial Gas Cylinders) के दामों में आए उछाल की वजह से खाने-पीने की जरूरी चीजों की उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है।READ ALSO:-मेरठ न्यूज़: आबूलेन के हुक्का बार में भारी हंगामा, नाम बदलकर हिंदू छात्रा के साथ बैठे मुस्लिम युवक की पिटाई, FIR दर्ज
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अब तक जो महंगाई सिर्फ बड़े बाजारों, मॉल या पेट्रोल पंपों के मीटर तक सीमित लग रही थी, वह अब गलियों और नुक्कड़ की ठेलियों तक पहुंच गई है। चाय की चुस्की से लेकर चावल तक, और समोसे से लेकर ठंडी लस्सी तक, हर चीज महंगी हो रही है। इस बढ़ती महंगाई का सबसे ताजा और बड़ा शिकार देश के दो सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड—मुंबई का वड़ा पाव और दिल्ली-एनसीआर का मशहूर छोले-भटूरा—बने हैं।
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दिल्ली-मेरठ का फेवरेट जायका: पहाड़गंज के मशहूर छोले-भटूरे की कीमत में इजाफा दिल्ली-एनसीआर और मेरठ बेल्ट के लोगों के लिए संडे का नाश्ता बिना छोले-भटूरे के अधूरा माना जाता है। महंगाई का यह ट्रेंड पुरानी दिल्ली के पहाड़गंज स्थित ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध दुकान ‘सीताराम दीवान चंद’ (Sitaram Diwan Chand) तक भी पहुंच गया है। यह वह जगह है जहां न केवल दिल्ली के, बल्कि देश-विदेश से लोग सिर्फ एक प्लेट छोले-भटूरे के खास जायके के लिए खिंचे चले आते हैं।
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लेकिन लागत बढ़ने के कारण, दशकों पुरानी इस दुकान को भी अब अपनी कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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    फुल प्लेट छोले-भटूरे: इस मशहूर दुकान की सबसे पुरानी ब्रांच पर अब ग्राहकों को एक प्लेट के लिए 95 रुपये की जगह 100 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
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    सिंगल भटूरा: वहीं, अगर कोई ग्राहक एक्स्ट्रा या सिंगल भटूरा लेता है, तो उसे अब 55 रुपये के बजाय 60 रुपये का भुगतान करना होगा।
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मुंबई की बेकरियों में उछाल: आम आदमी का सुलभ नाश्ता 'पाव' हुआ महंगा देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की रफ्तार जिस नाश्ते से तय होती है, वह है 'वड़ा पाव' और 'पाव भाजी'। यह न सिर्फ सबसे स्वादिष्ट है, बल्कि मुंबईकरों के लिए सबसे सस्ता और सुलभ विकल्प भी है। लेकिन अब इस 'गरीबों के बर्गर' पर भी महंगाई की आंच आ गई है।
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कच्चे माल (मैदा, तेल, यीस्ट) और बेकिंग में इस्तेमाल होने वाले ईंधन के दाम बढ़ने से मुंबई की स्थानीय बेकरियों ने पाव की कीमतों में वृद्धि कर दी है।
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    प्रति पीस बढ़ोतरी: जो सिंगल पाव पहले 3 रुपये में आसानी से मिल जाता था, उसके लिए अब ग्राहकों को 4 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। प्रति पाव 1 रुपये की यह बढ़ोतरी सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसका प्रभाव बहुत बड़ा है।
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    थोक पैकेट (लादी) का रेट: अगर थोक खरीदारी की बात करें, तो 12 पीस वाले पाव के एक पूरे पैकेट (जिसे स्थानीय भाषा में 'लादी' कहा जाता है) की कीमत में सीधा 10 रुपये का भारी उछाल आया है।
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इस वृद्धि का सीधा और सबसे बुरा असर शहर के उन हजारों छोटे वड़ा पाव और पाव भाजी विक्रेताओं की दैनिक लागत पर पड़ेगा, जो दिन भर में सैकड़ों पाव बेचते हैं। मार्जिन कम होने के कारण, बहुत जल्द गली-मोहल्ले के वेंडर भी अंतिम उपभोक्ताओं (Consumers) के लिए वड़ा पाव की कीमत में 2 से 5 रुपये तक का इजाफा कर सकते हैं।
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एक नजर में समझें कीमतों का अंतर (Price Comparison)

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फूड आइटम / सामग्री
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पहले की कीमत (Old Price)
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नई कीमत (New Price)
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कुल बढ़ोतरी
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सीताराम छोले भटूरे (फुल प्लेट)
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₹ 95
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₹ 100
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₹ 5
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सीताराम (सिंगल भटूरा)
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₹ 55
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₹ 60
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₹ 5
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मुंबई बेकरी पाव (सिंगल पीस)
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₹ 3
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₹ 4
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₹ 1
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पाव का पूरा पैकेट (12 पीस)
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(पुरानी दर)
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(नई दर)
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₹ 10 का सीधा उछाल
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क्यों बढ़ रहे हैं दाम? गैस की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई दुकानदारों की मजबूरी अर्थशास्त्रियों और बाजार के जानकारों का कहना है कि यह महंगाई दुकानदारों की अपनी इच्छा से नहीं आई है। दुकानदारों के लिए कीमतें बढ़ाना अब अधिक मुनाफा कमाने की रणनीति नहीं, बल्कि कारोबार को बचाए रखने की एक आर्थिक मजबूरी बन गया है।
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सीताराम छोले-भटूरे के स्टाफ ने स्पष्ट रूप से बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से उनकी दैनिक उत्पादन लागत (Production Cost) बहुत ज्यादा बढ़ गई है। भटूरे तलने के लिए लगातार हाई-फ्लेम पर तेल गरम रखना पड़ता है, जिसमें गैस की भारी खपत होती है। इसके अलावा, खाना पकाने के तेल (Edible Oil), मैदा और छोलों के भाव में भी पिछले कुछ समय में तेजी आई है। ऐसे में व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने और क्वालिटी से समझौता न करने के लिए कीमतों में यह 5-10 रुपये की मामूली बढ़ोतरी अनिवार्य हो गई थी।
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क्या है ग्राहकों का रिएक्शन? स्वाद के आगे बजट फेल दिलचस्प बात यह है कि कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी के बावजूद, स्ट्रीट फूड के शौकीनों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। पहाड़गंज की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही और भीड़ पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है।
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दुकान पर सवेरे से लाइन में लगे ग्राहकों का कहना है, "हम यहां पेट भरने नहीं, बल्कि एक खास स्वाद और पुरानी यादों के लिए आते हैं। अगर क्वालिटी वही पुरानी मिल रही है, तो 5 या 10 रुपये अतिरिक्त देना आज के समय में कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है।" आज का आम कंज्यूमर भी दुनिया भर की खबरों से वाकिफ है। लोगों को इस बात का भली-भांति अंदाजा है कि वैश्विक स्तर पर तनाव और युद्ध के कारण तेल-गैस की किल्लत चल रही है। फिलहाल, ग्राहकों से लेकर दुकानदारों तक सभी को इसी बात की उम्मीद है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हालात सुधरेंगे, मिडिल ईस्ट में शांति बहाल होगी और ग्लोबल सप्लाई चेन सामान्य होगी, बाजार में महंगाई का यह दबाव भी धीरे-धीरे कम हो जाएगा। तब तक के लिए, स्वाद के शौकीनों को अपनी जेब थोड़ी एक्स्ट्रा ढीली करनी ही पड़ेगी।
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