नई दिल्ली: जब पूरी दुनिया की निगाहें पश्चिम एशिया (West Asia) में सुलग रहे तनाव और युद्ध के हालात पर टिकी हैं, तब भारत सरकार ने देश के आम नागरिकों की रसोई को महंगाई की आग से बचाने के लिए एक 'गेम चेंजर' रणनीति तैयार कर ली है। मिडिल ईस्ट के देशों में जारी उथल-पुथल का सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की कीमतों और उसकी सप्लाई चेन पर पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।READ ALSO:-महा-राहत: आधार कार्ड धारकों की सबसे बड़ी टेंशन खत्म! बिना 'एड्रेस प्रूफ' के भी चुटकियों में अपडेट होगा घर का पता; UIDAI ने लागू किया नया नियम
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लेकिन, भारत सरकार ने स्थिति बिगड़ने से पहले ही एक अचूक 'प्लान-बी' पर काम तेज कर दिया है। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—घरेलू रसोई गैस (LPG) पर देश की निर्भरता को कम करना और लोगों को 'इलेक्ट्रिक कुकिंग' (बिजली से खाना पकाने) की ओर शिफ्ट करना। इसके लिए देश में इंडक्शन चूल्हों (Induction Cooktops) को इतना सस्ता किया जाएगा कि यह हर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार की पहुंच में आ जाए।
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हॉर्मुज स्ट्रेट का संकट और भारतीय रसोई पर मंडराता खतरा
\r\n\r\nआखिर सरकार को अचानक यह फैसला क्यों लेना पड़ रहा है? इसे समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार को समझना होगा। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण 'हॉर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह बाधित हो गई है। यह वही समुद्री 'चोक पॉइंट' है, जहां से दुनिया भर में और विशेषकर भारत में तेल और गैस के बड़े जहाजों की सप्लाई होती है।
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इस महत्वपूर्ण मार्ग पर खतरे के बादल मंडराने से रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। अगर सप्लाई रुकती है, तो गैस सिलेंडरों के दाम आसमान छू सकते हैं। इसी खतरे को भांपते हुए देश की जनता ने भी स्मार्ट कदम उठाते हुए तेजी से इंडक्शन यानी इलेक्ट्रिक चूल्हे और इसके अनुकूल बर्तनों की खरीदारी शुरू कर दी है।
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GST 18% से 5% करने की सिफारिश, घटेंगी कीमतें
\r\n\r\nइंडक्शन चूल्हों को हर घर तक पहुंचाने के लिए सबसे बड़ी बाधा इनकी कीमत है। इसे दूर करने के लिए वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Commerce and Industry Ministry) ने एक बड़ा प्रस्ताव तैयार किया है। एक शीर्ष अधिकारी ने 'खबरीलाल' को बताया कि सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और पश्चिम एशिया संकट के बीच कीमतों में वृद्धि से निपटने के लिए इंडक्शन चूल्हे के महत्वपूर्ण उपकरणों (Components) पर लगने वाले सीमा शुल्क (Customs Duty) में भारी कटौती करने पर विचार कर रही है।
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सबसे बड़ी राहत टैक्स के मोर्चे पर मिलने वाली है। मंत्रालय ने इन चूल्हों को और अधिक किफायती बनाने के लिए इन पर जीएसटी (GST) की दर को 18 प्रतिशत से घटाकर सीधा 5 प्रतिशत करने की जोरदार सिफारिश की है। इस कदम से बाजार में इंडक्शन चूल्हों की कीमतों में भारी गिरावट आएगी और 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू स्तर पर इनके निर्माण को भी ऐतिहासिक गति मिलेगी।
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DPIIT ने कसा तंज: डिमांड और सप्लाई में नहीं होने देंगे गैप
\r\n\r\nइंडक्शन कुकटॉप सेक्टर में अचानक बढ़ने वाली इस डिमांड को पूरा करने के लिए उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। विभाग ने वाणिज्य विभाग और बिजली मंत्रालय के साथ मिलकर उद्योग के सभी बड़े हितधारकों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की हैं।
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घरेलू कंपनियों को राहत देते हुए सरकार ने कुछ सख्त नियमों में ढील दी है:
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- \r\n QCO डेडलाइन में इजाफा: कुछ बिजली उपकरणों पर अनिवार्य 'क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर' (QCO) के कार्यान्वयन की समय सीमा को तत्काल प्रभाव से छह महीने बढ़ाकर अक्टूबर 2026 तक कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n ऊर्जा दक्षता नियमों में मोहलत: अनिवार्य ऊर्जा दक्षता समय सीमा को भी आगे बढ़ाया गया है, ताकि कंपनियों पर अचानक दबाव न पड़े और वे अपना उत्पादन तेजी से बढ़ा सकें।\r\n \r\n
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PESO का 'मिशन मोड': CNG और CBG स्टेशनों को धड़ाधड़ मिल रही मंजूरी
\r\n\r\nईंधन संकट से निपटने की जिम्मेदारी सिर्फ इलेक्ट्रिक कुकिंग पर नहीं छोड़ी गई है। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) ने मौजूदा संकट के बीच देश में ईंधन और गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई अहम सुधारात्मक और सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।
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डीपीआईआईटी की संयुक्त सचिव निधि केसरवानी ने इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कंप्रेस्ड प्राकृतिक गैस (CNG) और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
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- \r\n लंबित आवेदनों का निपटारा: 25 मार्च से 21 अप्रैल के बीच CNG और CBG डिस्पेंसिंग स्टेशनों के लिए आए सभी 467 आवेदनों का निपटारा रिकॉर्ड समय में किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n इनमें से 157 मामलों में अंतिम लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं, जबकि 38 मामलों में नए स्टेशनों के निर्माण के लिए पहले से (Prior) मंज़ूरी दे दी गई है।\r\n \r\n
- \r\n बायोगैस को बढ़ावा देने के लिए मार्च से अब तक 41 बायोगैस सिलेंडर भरने और भंडारण संयंत्रों को मंज़ूरी दी गई है, और 14 संयंत्रों को लाइसेंस भी जारी हो चुके हैं।\r\n \r\n
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LNG और केरोसिन के लिए जारी हुए नए और उदार दिशानिर्देश
\r\n\r\nईंधन आपूर्ति की किसी भी बाधा से निपटने के लिए PESO ने कई आपातकालीन नियम भी लागू किए हैं:
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- \r\n केरोसिन भंडारण सीमा में छूट: सुपीरियर केरोसिन ऑयल के लिए अस्थायी भंडारण नियमों में ढील दी गई है। अब डीलरों को 2,500 लीटर तक के भंडारण की अनुमति दे दी गई है।\r\n \r\n
- \r\n क्रायोजेनिक सिलेंडरों में LNG: दूरदराज या बिना पाइपलाइन वाले ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को आसान बनाने के लिए, विकेंद्रीकृत LNG आपूर्ति को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए क्रायोजेनिक सिलेंडरों में 'लिक्विफाइड नेचुरल गैस' (LNG) भरने की विशेष अनुमति देने वाले दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n पोरबंदर जेटी पर विशेष अनुमति: संकट की स्थिति में आयात को सुचारू रखने के लिए गुजरात के पोरबंदर जेटी पर LPG उतारने की त्वरित अनुमति दी गई है।\r\n \r\n
- \r\n अस्थायी छूट: डिस्पेंसिंग स्टेशनों को तेज़ी से चालू करने के लिए CNG/CBG कंप्रेसर की मंज़ूरी की सख्त ज़रूरतों से 6 महीने की अस्थायी छूट दी गई है।\r\n \r\n
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रात की शिफ्ट में भी होगा काम, LPG बॉटलिंग में आएगी तेजी
\r\n\r\nज़मीन की कमी की समस्या को हल करने और गैस वितरण के बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार करने के लिए CNG/CBG स्टेशनों पर 'डिस्ट्रिक्ट प्रेशर रेगुलेटिंग स्किड्स' लगाने के लिए पिछले महीने दिशानिर्देश जारी किए गए थे।
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इसके अलावा, सरकार ने 2 अप्रैल को एक बेहद अहम आदेश जारी करते हुए विशेष रूप से LPG बॉटलिंग संयंत्रों को रात के समय (Night Shift) काम करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से कंपनियों के काम करने के घंटे बढ़ेंगे, उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि होगी और बाजार में गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं (Shortage) होगी।
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अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भले ही कितने भी बादल क्यों न छाएं, भारत सरकार के ये 'प्रो-एक्टिव' (Pro-Active) कदम इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम आदमी की रसोई को किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। इंडक्शन चूल्हों को सस्ता करना भारत के ऊर्जा परिदृश्य में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है।
Sabse pehle comment karne wale banein.