अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भारत के लिए आज का दिन बेहद ऐतिहासिक है। लंबे समय से चल रही वार्ताओं और कूटनीतिक प्रयासों के बाद, आज 15 जुलाई 2026 से India-UK FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इस समझौते के लागू होने से न सिर्फ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। अब भारत के 99% सामानों को ब्रिटेन (UK) में 'जीरो टैरिफ' (शून्य आयात शुल्क) पर निर्यात किया जा सकेगा। वहीं, दूसरी तरफ UK के 99% सामानों पर भारत में औसत टैरिफ घटकर मात्र 3% रह जाएगा।READ ALSO:-गाजियाबाद में सरेराह लड़कियों के वीडियो बना रहा था मनचला, पब्लिक ने रंगे हाथ पकड़कर की धुनाई, फिर पुलिस ने कर दिया रिहा
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इस ऐतिहासिक India-UK FTA के लागू होने से पहले, भारत में ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा, "उल्टी गिनती शुरू हो गई है! यह आधुनिक यूके-भारत पार्टनरशिप के लिए एक ऐतिहासिक पल है। यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ग्रोथ के नए युग की शुरुआत करेगा।" अनुमान है कि इस एग्रीमेंट के जरिए 2030 तक दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर के पार पहुंच जाएगा। 
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India-UK FTA से भारत में क्या-क्या सस्ता होगा?

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आम भारतीय उपभोक्ता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस समझौते के बाद उनके लिए क्या सस्ता होगा। India-UK FTA के तहत UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटाकर 3% कर दिया गया है। अगले 10 सालों में 85% सामान पूरी तरह से टैरिफ-मुक्त हो जाएंगे। आइए जानते हैं किन चीजों के दाम गिरेंगे:
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    स्कॉच व्हिस्की और जिन: भारत में आयातित शराब के शौकीनों के लिए यह बड़ी खबर है। UK से आयात होने वाली स्कॉच व्हिस्की और जिन पर अब तक 150% का भारी-भरकम टैरिफ लगता था, जिसे घटाकर अब 75% कर दिया गया है। समझौते के दसवें साल तक इसे 40% तक लाया जाएगा। इसका सीधा असर कीमतों पर दिखेगा। उदाहरण के लिए, जो स्कॉच की बोतल पहले 5000 रुपए में मिलती थी, वह अब करीब 3500 रुपए में उपलब्ध होगी।
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    लग्जरी कारें: जगुआर लैंड रोवर (JLR) और रोल्स रॉयस जैसी ब्रिटेन निर्मित लग्जरी कारों पर पहले 100% का आयात शुल्क लगता था। अब इसे कोटा सिस्टम के तहत घटाकर 10% तक लाया जाएगा। इससे इन कारों की कीमत में 20 से 30% तक की भारी गिरावट आ सकती है, जिससे भारतीय बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ेगी।
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    खाद्य और पेय पदार्थ: ब्रिटेन से आयातित सैल्मन मछली, लैंब (भेड़ का मांस), चॉकलेट, प्रीमियम बिस्किट और सॉफ्ट ड्रिंक्स पर भी टैरिफ कम किया गया है। अब विदेशी चॉकलेट्स और स्नैक्स के लिए आपको कम पैसे चुकाने होंगे।
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    कॉस्मेटिक्स और फैशन: UK के प्रीमियम कॉस्मेटिक्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, ब्रांडेड कपड़े, होमवेयर और फैशन प्रोडक्ट्स पर भी आयात शुल्क 15% से घटकर 3% हो गया है। इसके अलावा मेडिकल उपकरण, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक्स भी भारतीय बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध होंगे। 
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भारतीय अर्थव्यवस्था और एक्सपोर्ट सेक्टर्स को बंपर फायदा

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यह समझौता सिर्फ आयात को सस्ता नहीं करता, बल्कि भारत के निर्यातकों के लिए ब्रिटेन के बाजार के दरवाजे पूरी तरह से खोल देता है। India-UK FTA से भारत के कई प्रमुख सेक्टर्स को संजीवनी मिलेगी:
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    टेक्सटाइल और कपड़े: यूके में भारतीय कपड़ों, चादरों और परदों पर 8 से 12% तक टैक्स लगता था, जो अब शून्य हो गया है। इससे तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे टेक्सटाइल हब को फायदा होगा। हमारे उत्पाद अब बांग्लादेश और वियतनाम के उत्पादों को कड़ी टक्कर देंगे, और अगले तीन साल में इस सेक्टर में 40% ग्रोथ का अनुमान है।
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    गहने और चमड़े का सामान: भारत से जाने वाली ज्वेलरी, लेदर बैग और जूतों पर अब ब्रिटेन में कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसका सबसे ज्यादा फायदा भारत के छोटे उद्योगों (MSME) और कारीगरों को मिलेगा।
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    इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स: भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और कार के पुर्जों पर इम्पोर्ट टैक्स खत्म होने से पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब को बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा। इससे इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन मजबूत होगी।
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    फार्मा और मेडिकल डिवाइस: भारतीय दवा कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यूके में रजिस्ट्रेशन की थी। इस डील के बाद जेनेरिक दवाओं को यूके की हेल्थ सर्विस (NHS) में आसानी से अप्रूवल मिलेगा, जिससे भारतीय फार्मा सेक्टर का दबदबा बढ़ेगा।
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    कृषि, चाय और मसाले: असम की प्रीमियम चाय, बासमती चावल, झींगा मछली (मरीन प्रोडक्ट्स) और भारतीय मसालों पर यूके का इम्पोर्ट टैक्स खत्म होने से गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल के किसानों और निर्यातकों की आय बढ़ेगी।
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    क्लीनटेक और ग्रीन एनर्जी: यह समझौता रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन, EV) में साझा निवेश के रास्ते खोलेगा। यूके की कंपनियां भारत के ग्रीन एनर्जी सेक्टर में नई तकनीक और भारी निवेश लेकर आएंगी।
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अर्थव्यवस्था और रोजगार पर व्यापक असर

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विशेषज्ञों का मानना है कि India-UK FTA भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होगा। 99% सामानों पर शून्य टैरिफ के कारण 2030 तक भारत का यूके को निर्यात 29 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे लेबर-बेस्ड सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल और चमड़ा उद्योग में बड़े पैमाने पर नई नौकरियां पैदा होंगी। अकेले टेक्सटाइल सेक्टर में रोजगार दोगुना होने की उम्मीद है।
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भारत के लगभग 6 करोड़ MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) इस डील के सबसे बड़े लाभार्थी होंगे। वर्तमान में ये उद्योग भारत के कुल निर्यात का 40% हिस्सा बनाते हैं। इसके अलावा, आईटी, वित्तीय सेवाओं और ग्रीन टेक्नोलॉजी में ब्रिटिश निवेश बढ़ने से भारत का सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और अधिक मजबूत होगा। 
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साढ़े तीन साल की लंबी वार्ता और भारत की ग्लोबल रणनीति

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आपको बता दें कि इस India-UK FTA को लेकर बातचीत की शुरुआत 13 जनवरी 2022 को हुई थी। करीब 3 साल के लंबे सफर और 14 राउंड की मैराथन वार्ताओं के बाद, 24 जुलाई 2025 को भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की मौजूदगी में इस पर हस्ताक्षर किए थे।
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ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) कई प्रकार के होते हैं, जैसे PTA, RTA और BTA। भारत ने हाल के वर्षों में मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया और EFTA के साथ भी सफल व्यापारिक समझौते किए हैं। अब भारत की व्यापारिक रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। पहले भारत का फोकस ईस्ट (जैसे ASEAN, जापान, कोरिया) पर था, लेकिन अब एक्सपोर्ट का विस्तार करने के लिए भारत अपना फोकस वेस्टर्न पार्टनर्स (US, UK, EU) पर शिफ्ट कर चुका है। यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ भी इसी तरह के समझौते पर तेजी से बातचीत चल रही है। 
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संक्षेप में कहा जाए तो, India-UK FTA एक ऐसा ऐतिहासिक कदम है जो दोनों देशों के लिए विन-विन (win-win) स्थिति लेकर आया है। जहां एक तरफ भारतीय उपभोक्ताओं को लग्जरी कारें, बेहतरीन व्हिस्की और कॉस्मेटिक्स सस्ते दामों पर मिलेंगे, वहीं दूसरी तरफ भारतीय किसानों, बुनकरों, छोटे कारोबारियों (MSME) और फार्मा कंपनियों को यूरोप के एक बहुत बड़े बाजार में जीरो-टैक्स एंट्री मिलेगी। रोजगार सृजन और विदेशी निवेश के लिहाज से यह समझौता आने वाले दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार देगा।
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