नई दिल्ली (हेल्थ एंड फूड डेस्क): आजकल बाजार में 'हेल्दी', 'शुगर-फ्री' और 'ऑर्गेनिक' उत्पादों की बाढ़ सी आ गई है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता अक्सर आकर्षक पैकेजिंग और लुभावने दावों के जाल में फंस जाते हैं और इन उत्पादों के लिए मुंहमांगी कीमत चुकाते हैं। लेकिन क्या ये प्रोडक्ट वाकई उतने ही सेहतमंद हैं, जितना वे दावा करते हैं? READ ALSO:-राशन कार्ड धारकों के लिए सरकार का महा-तोहफा: अब ATM की तरह काम करेगा आपका राशन कार्ड, एक दुकान से लें गेहूं तो दूसरी से चावल; पढ़ें पूरी डिटेल
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भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देश के 14 नामी फूड ब्रांड्स को नोटिस जारी किया है। इन कंपनियों पर ग्राहकों को गुमराह करने, मेडिकल दावे करने और खराब हाइजीन के गंभीर आरोप लगे हैं। FSSAI ने सख्त रुख अपनाते हुए इन सभी को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने और जवाब दाखिल करने का अल्टीमेटम दिया है। आइए, एक-एक करके जानते हैं कि किस ब्रांड ने ग्राहकों के साथ कैसा धोखा किया है।
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इन 14 बड़े ब्रांड्स की खुली पोल, जानिए क्या है इनके दावों की सच्चाई
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1. प्लक्क मैंगो फ्रूट जूस (Pluckk Mango Fruit Juice)
\r\n\r\nदावा: पैकेट के ठीक सामने बड़े अक्षरों में "नो ऐडेड शुगर" (No Added Sugar) लिखा गया था। सच्चाई: जब FSSAI ने पीछे दी गई सामग्री (Ingredients) की जांच की, तो पता चला कि जूस में 51% आम का पल्प और 49% गन्ने का रस (Sugarcane Juice) मिलाया गया है। गन्ने का रस प्राकृतिक रूप से शुगर ही है, इसलिए 'नो ऐडेड शुगर' का दावा पूरी तरह से ग्राहकों को भ्रमित करने वाला पाया गया।
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2. नेचुरल पनीर (Natural Paneer)
\r\n\r\nदावा: ब्रांड ने अपने प्रोडक्ट को बाजार में "नेचुरल पनीर" नाम से उतारा था। सच्चाई: FSSAI के अनुसार, किसी भी प्रोडक्ट के नाम में 'नेचुरल' शब्द का इस तरह से इस्तेमाल करना फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस 2018 के 'शेड्यूल V' के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
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3. गौर हेल्दी फूड - सिल्कन टोफू (Gaur Healthy Food - Silken Tofu)
\r\n\r\nदावा: पैकेट पर "100% वेज", "विटामिन्स से भरपूर" और सबसे चौंकाने वाला "कैंसर-रोधी गुण" (Anti-cancer properties) का दावा किया गया था। सच्चाई: FSSAI ने इसे गंभीर माना है। खाद्य पदार्थों पर बिना मेडिकल प्रमाण के किसी भी बीमारी (जैसे कैंसर) को ठीक करने का दावा करना सख्त वर्जित है। साथ ही, विटामिन्स की कोई सटीक मात्रा भी पैकेट पर नहीं बताई गई थी।
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4. मास्टरचौ फूड्स - रैमन नूडल्स (MasterChow Foods - Ramen Noodles)
\r\n\r\nदावा: युवाओं में मशहूर इस नूडल्स ब्रांड ने पैकेट पर "100% नेचुरल", "फ्रेशली मेड" और इसे "हाई-क्वालिटी ऑर्गेनिक फ्लोर" (High-quality organic flour) से बना बताया था। सच्चाई: जब पीछे सामग्री की सूची पढ़ी गई, तो उसमें "प्रीमियम क्वालिटी व्हाइट फ्लोर" लिखा था, जिसे आम भाषा में मैदा कहा जाता है। ऑर्गेनिक आटे के नाम पर मैदा बेचना एक बहुत बड़ा धोखा है।
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5. फेरैरो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड - किंडर जॉय (Kinder Joy)
\r\n\r\nदावा: बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय किंडर जॉय के पैकेट पर "मिल्क सॉलिड्स से भरपूर" (Rich in milk solids) का दावा किया गया था। सच्चाई: नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि प्रोडक्ट की बनावट और इस्तेमाल की गई सामग्री इस बात की बिल्कुल पुष्टि नहीं करती है कि इसमें दूध (Milk Solids) का हिस्सा मुख्य या प्रमुख है। यह बच्चों के माता-पिता को लुभाने की एक मार्केटिंग ट्रिक पाई गई।
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6. मेडिज़न लैब्स - एटम PWR व्हे XL (Atom PWR Whey XL)
\r\n\r\nदावा: जिम जाने वालों के बीच बिकने वाले इस व्हे प्रोटीन पर "प्योर एंड हेल्दी", "100% ऑथेंटिक", "ईजी डाइजेस्ट" और "रैपिड रिकवरी" जैसे भारी-भरकम दावे किए गए थे। सच्चाई: FSSAI की जांच में इन बड़े-बड़े दावों को साबित करने के लिए कंपनी के पास कोई भी ठोस वैज्ञानिक प्रमाण (Scientific Proof) नहीं मिला।
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7. सफोला टोटल हार्ट प्रो कुकिंग ऑयल (Saffola Total Heart Pro)
\r\n\r\nदावा: दिल की सेहत के प्रति जागरूक लोगों को टारगेट करने के लिए तेल के पैकेट पर "हार्ट प्रो", "गुड फैट्स बैलेंस" और "लोसॉर्ब" (Losorb) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। सच्चाई: बिना FSSAI की पूर्व अनुमति के 'हार्ट (दिल)' के चित्र या ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना जो दिल की सेहत सुधारने का संकेत देते हों, गैरकानूनी है। रेगुलेटर ने कंपनी से इन दावों को सिद्ध करने के लिए वैज्ञानिक सबूत तलब किए हैं।
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8. ओरविले - माउंटेन बावर्ची बुरांश स्क्वैश (Buransh Squash)
\r\n\r\nदावा: बुरांश के औषधीय गुणों का बखान करते हुए प्रोडक्ट बेचा जा रहा था। सच्चाई: लेबल पर सबसे जरूरी जानकारी यानी बुरांश के पल्प का प्रतिशत (Percentage) ही गायब था। इसके अलावा पैकेजिंग पर बिना मंजूरी के औषधीय दावे भी लिखे पाए गए।
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9. नेक्सा इंडस्ट्रीज - एल्कलाइन न्यूट्रिएंट वॉटर (Alkaline Nutrient Water)
\r\n\r\nसच्चाई: आजकल 'एल्कलाइन वॉटर' का बहुत चलन है। लेकिन FSSAI ने साफ कर दिया है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत "एल्कलाइन न्यूट्रिएंट वॉटर" नाम की कोई भी कैटेगरी स्टैंडर्डाइज्ड (मानकीकृत) ही नहीं है। इस पर अनधिकृत हेल्थ दावे भी किए गए थे।
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10. रॉ प्रेसेरी - अल्फोंसो मैंगो फ्रूट ड्रिंक (Raw Pressery Mango Drink)
\r\n\r\nदावा: प्रीमियम ड्रिंक ब्रांड के फ्रंट लेबल पर "नेचुरल शुगर" होने का दावा किया गया था। सच्चाई: पैकेट के पीछे जब सामग्री देखी गई, तो उसमें फ्रुक्टोज (Fructose) को अलग से 'ऐडेड शुगर' के रूप में मिलाया गया था। यह सीधे तौर पर ग्राहकों की आंखों में धूल झोंकना है।
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11. इन्सिप्रो गोल्ड पाउडर वैनिला (Insipro Gold Powder)
\r\n\r\nदावा: 100% हाइड्रोलाइज्ड व्हे प्रोटीन, न्यूरो न्यूट्रिएंट्स और प्रोबायोटिक कंटेंट की मौजूदगी का दावा। सच्चाई: FSSAI ने इन सभी न्यूट्रास्युटिकल दावों को 'संदिग्ध' (Suspicious) माना है और नोटिस जारी किया है।
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12. हिमालयन ऑर्गेनिक्स कोरियन जिनसेंग (Korean Ginseng)
\r\n\r\nदावा: एनर्जी और शारीरिक परफॉर्मेंस को बढ़ाने का दावा। सच्चाई: FSSAI ने इस सप्लीमेंट की सुझाई गई खुराक (Serving Size) को निर्धारित मानकों और सामग्री सीमाओं से काफी ज्यादा पाया, जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
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13. बीकानेरवाला (Bikanervala) - साफ-सफाई पर उठे सवाल
\r\n\r\nसोशल मीडिया पर एक वीडियो/शिकायत वायरल हुई थी जिसमें बीकानेरवाला के किचन/सर्विस एरिया में काम चालू रहने के दौरान एक कर्मचारी वहीं पर खाना खा रहा था। यह घोर हाइजीन उल्लंघन है। FSSAI ने तुरंत एक्शन लेते हुए कंपनी को पूरी जांच रिपोर्ट, कर्मचारियों की स्वच्छता से जुड़े 'SOP' (Standard Operating Procedure) और 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' जमा करने का आदेश दिया है।
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14. परम डेयरी लिमिटेड (Param Dairy) - ट्रेनों के खाने में फंगस
\r\n\r\nIRCTC कैटरिंग (ट्रेनों में मिलने वाला खाना) के जरिए सप्लाई किए जाने वाले परम डेयरी के दही और रबड़ी में फंगस (फफूंद) लगने की शिकायतें ग्राहकों द्वारा की गई थीं। रेगुलेटर ने इसे गंभीरता से लेते हुए कंपनी से इन्वेंट्री मैनेजमेंट और एक्सपायर्ड सामान की बाजार में बिक्री रोकने की पूरी रिपोर्ट मांगी है।
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नॉलेज पार्ट (Knowledge Section): क्या है FSS Act, 2006 और आपके अधिकार?
\r\n\r\nएक जागरूक उपभोक्ता के रूप में आपको अपने अधिकारों और देश के खाद्य कानूनों की जानकारी होना बहुत जरूरी है।
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खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act), 2006 क्या है? यह भारत का वह मुख्य कानून है जो यह तय करता है कि देश में बिकने वाला कोई भी खाने-पीने का सामान सुरक्षित, शुद्ध और तय मानकों के अनुसार हो। इस कानून के तहत 2011 में FSSAI की स्थापना की गई थी।
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- \r\n भ्रामक विज्ञापन पर रोक: इस कानून की धारा 24 के तहत कोई भी कंपनी अपने मुनाफे के लिए पैकेट पर झूठे दावे, भ्रामक विज्ञापन या बीमारी ठीक करने का गारंटी कार्ड नहीं छाप सकती।\r\n \r\n
- \r\n कठोर सजा का प्रावधान: यदि कोई ब्रांड नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना (लाखों रुपये में) लगाया जा सकता है, प्रोडक्ट को बाजार से वापस (Recall) मंगाया जा सकता है और गंभीर मामलों में कंपनी का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।\r\n \r\n
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ग्राहक क्या कर सकते हैं? (Consumer Rights) अगर आप भी बाजार से कोई ऐसा प्रोडक्ट खरीदते हैं जिसके पैकेट के आगे कुछ और लिखा हो (जैसे '100% आटा') और पीछे सामग्री में कुछ और निकले (जैसे 'मैदा'), तो आप खामोश न बैठें। आप FSSAI के FoSCoS पोर्टल (Food Safety Compliance System) पर जाकर या उनकी 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' (Food Safety Connect) ऐप के जरिए सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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FSSAI का यह कदम उन कंपनियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो मार्केटिंग के नाम पर भारतीय ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ कर रही हैं। एक उपभोक्ता के तौर पर हमारा भी यह फर्ज बनता है कि हम 'फ्रंट लेबल' की आकर्षक पैकेजिंग से बाहर आएं और पैकेट के पीछे दी गई 'इनग्रेडिएंट्स लिस्ट' (Ingredients List) को पढ़ने की आदत डालें। जागो ग्राहक जागो!
Sabse pehle comment karne wale banein.