भारत में सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ चल रही मुहिम में एक और बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। जल्द ही आपको अपने आस-पास गुटखा, तंबाकू और पान मसाला के प्लास्टिक पाउच बिखरे हुए नजर नहीं आएंगे। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने पर्यावरण संरक्षण और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक सख्त ड्राफ्ट तैयार किया है। इस नए प्रस्ताव के तहत गुटखा, तंबाकू और पान मसाला की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक मटेरियल को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाएगा। इसकी जगह अब कागज, पेपरबोर्ड, सेल्युलोज और अन्य इको-फ्रेंडली मटेरियल का उपयोग अनिवार्य होगा। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि प्लास्टिक पाउच पर रोक का यह नियम क्या है, इसके क्या प्रभाव होंगे और इससे जुड़ी गाइडलाइंस क्या कहती हैं।READ ALSO:-मई में बैंकिंग और ट्रेडिंग पर लगेगा 'ब्रेक': 12 दिन बंद रहेंगे देश के बैंक और शेयर बाजार, घर से निकलने से पहले चेक करें RBI की ये पूरी लिस्ट!
\r\n\r\n\r\n\r\n
क्या है FSSAI का नया ड्राफ्ट और नियम?
\r\n\r\nफूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने मंगलवार को 'खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) विनियमन 2018' (Food Safety and Standards (Packaging) Regulation 2018) में संशोधन के लिए एक आधिकारिक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। यह कदम पर्यावरण में बढ़ रहे प्लास्टिक कचरे को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस नए ड्राफ्ट, जिसे 'प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम 2026' (Plastic Waste Management Rules 2026) का आधार माना जा रहा है, पर FSSAI ने अगले 30 दिनों तक सभी स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) से उनकी राय, सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इस 30 दिन की अवधि के समाप्त होने और सभी सुझावों की समीक्षा के बाद, इस नियम को अंतिम रूप देकर पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। एक बार यह नियम लागू हो गया, तो किसी भी पान मसाला या तंबाकू कंपनी को प्लास्टिक पैकेजिंग का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
गुटखा और तंबाकू के प्लास्टिक पाउच पर रोक: क्या-क्या होगा बैन?
\r\n\r\nनए प्रस्ताव के अनुसार, गुटखा, पान मसाला और तंबाकू के किसी भी पैकेज में किसी भी रूप में प्लास्टिक मटेरियल या विनाइल का इस्तेमाल पूरी तरह से वर्जित होगा। अभी तक इन उत्पादों की पैकेजिंग में नमी और हवा को रोकने के लिए कई तरह के हानिकारक प्लास्टिक और रसायनों का लेप किया जाता है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
विशेष रूप से, इस ड्राफ्ट में 'विनाइल एसीटेट-मेलिक एसिड-विनाइल क्लोराइड कोपोलिमर' (Vinyl acetate-maleic acid-vinyl chloride copolymer) जैसे केमिकल युक्त मटेरियल पर सख्त पाबंदी लगाने की बात कही गई है। यह रसायन न केवल पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है, बल्कि जब यह तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पादों के सीधे संपर्क में आता है, तो मानव स्वास्थ्य पर भी इसके गंभीर और जानलेवा प्रभाव पड़ सकते हैं। इसलिए, स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा के लिए प्लास्टिक पाउच पर रोक लगाना समय की सबसे बड़ी मांग बन गया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इको-फ्रेंडली मटेरियल (Eco-Friendly Material) बनेंगे नया विकल्प
\r\n\r\nप्लास्टिक पाउच पर रोक लगने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इन उत्पादों की पैकिंग कैसे होगी? FSSAI ने इसका भी स्पष्ट समाधान अपनी गाइडलाइंस में दिया है। रेगुलेटर ने सलाह दी है कि अब प्लास्टिक पाउच की जगह पूरी तरह से नेचुरल और बायोडिग्रेडेबल (biodegradable) सामान का इस्तेमाल किया जाए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कंपनियों को अब पैकेजिंग के लिए निम्नलिखित विकल्पों का उपयोग करना होगा:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n कागज (Paper): यह आसानी से नष्ट हो जाता है और रिसाइकिल किया जा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n गत्ता (Paperboard): यह थोड़ी मोटी पैकेजिंग के लिए एक बेहतरीन और मजबूत विकल्प है।\r\n \r\n
- \r\n सेल्युलोज (Cellulose): यह पौधों से प्राप्त होने वाला एक प्राकृतिक पॉलीमर है, जो प्लास्टिक जैसी ही सुरक्षा देता है लेकिन पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।\r\n \r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
FSSAI का स्पष्ट रूप से कहना है कि ये सभी इको-फ्रेंडली चीजें खाने-पीने और चबाने वाले सामान को पैक करने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित हैं। साथ ही, आधुनिक तकनीक के चलते एफएमसीजी (FMCG) और तंबाकू कंपनियों के लिए भी इन नए मटेरियल को अपनाना, अपनी मशीनों में बदलाव करना और इनका इस्तेमाल करना आसान होगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
टीन और कांच के कंटेनर्स का विकल्प रहेगा बरकरार
\r\n\r\nजहां एक तरफ छोटे पाउच के लिए कागज और सेल्युलोज को अनिवार्य किया जा रहा है, वहीं बड़े पैक के लिए पुराने और सुरक्षित विकल्प जारी रहेंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जो निर्माता पहले से ही पाउच के बजाय टीन (Tin) या कांच (Glass) के कंटेनर्स का उपयोग कर रहे हैं, वे बिना किसी परेशानी के उसे जारी रख पाएंगे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस छूट का मुख्य उद्देश्य मैन्युफैक्चरर्स को अपनी कमर्शियल जरूरतों और प्रीमियम उत्पादों के हिसाब से थोड़ी फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) देना है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह छूट केवल तभी तक लागू रहेगी जब तक वे FSSAI के निर्धारित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और स्वास्थ्य मानकों के भीतर रहकर काम करेंगे। टीन और कांच दोनों ही पर्यावरण के अनुकूल हैं और इन्हें आसानी से रिसाइकिल (recycle) किया जा सकता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पर्यावरण और समाज पर 'प्लास्टिक पाउच पर रोक' का असर
\r\n\r\nभारत में पान मसाला और गुटखा के पाउच सबसे अधिक फैलाए जाने वाले कचरे (litter) में से एक हैं। नालियों के जाम होने से लेकर मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होने तक, इन छोटे प्लास्टिक पाउच का बहुत बड़ा नकारात्मक योगदान होता है। इसके अलावा, आवारा पशु अक्सर खाने की तलाश में इन प्लास्टिक पाउच को निगल लेते हैं, जो उनकी मौत का कारण बनता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस नए नियम के लागू होने से:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n कचरा प्रबंधन (Waste Management) में सुधार: कागज और सेल्युलोज आधारित कचरा आसानी से डीकंपोज (decompose) हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n प्रदूषण में कमी: मिट्टी और पानी में घुलने वाले माइक्रोप्लास्टिक्स (microplastics) में भारी कमी आएगी।\r\n \r\n
- \r\n स्वास्थ्य सुरक्षा: प्लास्टिक और केमिकल के तंबाकू के साथ रिएक्शन से होने वाले अतिरिक्त नुकसान से बचाव होगा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
अंत में, FSSAI द्वारा गुटखा, तंबाकू और पान मसाला के लिए लाया गया यह नया ड्राफ्ट एक बेहद सराहनीय कदम है। 'प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम 2026' के तहत प्लास्टिक पाउच पर रोक लगने से न केवल पर्यावरण को प्लास्टिक के जहर से मुक्ति मिलेगी, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि कंपनियों को पैकेजिंग के नए इको-फ्रेंडली विकल्पों (कागज, सेल्युलोज) को अपनाने में शुरुआती तकनीकी और वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन दीर्घकालिक नजरिए से यह देश के सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 30 दिनों के स्टेकहोल्डर फीडबैक के बाद इस नियम को कितनी जल्दी और सख्ती से धरातल पर उतारा जाता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
FSSAI ने 'प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम 2026' के आधार पर एक नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसके तहत गुटखा, तंबाकू और पान मसाला की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और विनाइल मटेरियल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके स्थान पर कंपनियों को अब कागज, पेपरबोर्ड और सेल्युलोज जैसे इको-फ्रेंडली मटेरियल का इस्तेमाल करना होगा। हालांकि, टीन और कांच की पैकिंग का विकल्प पहले की तरह ही मौजूद रहेगा। इस फैसले पर अगले 30 दिनों तक स्टेकहोल्डर्स से राय मांगी गई है, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम पहल है।
Sabse pehle comment karne wale banein.