भारतीय घरों और लॉकरों में पड़े निष्क्रिय सोने को देश की मुख्य अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाने के लिए केंद्र सरकार एक क्रांतिकारी कदम उठाने की तैयारी में है। अब आपको अपना सोना सुरक्षित रखने और उस पर मुनाफा कमाने के लिए केवल बैंकों के चक्कर नहीं काटने होंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अगले दो हफ्तों के भीतर एक नई और पूरी तरह से अपडेटेड ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ (Gold Monetization Scheme) का एलान कर सकती है।READ ALSO:-कांवड़ यात्रा से पहले पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल: मेरठ के SSP डॉ. अविनाश पांडेय का एक्शन, 33 चौकी प्रभारियों समेत कई पुलिसकर्मियों के तबादले
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इस नई योजना की सबसे खास बात यह है कि अब आम लोग अपने सोने को बैंक लॉकर की तरह स्थानीय सर्राफा व्यापारियों (ज्वेलर्स) के पास भी सुरक्षित जमा करा सकेंगे। इतना ही नहीं, इस जमा सोने पर ग्राहकों को सालाना 2.5% तक का आकर्षक ब्याज भी मिल सकता है। सरकार का यह आगामी कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस देशव्यापी अपील के बाद सामने आ रहा है, जिसमें उन्होंने देश के नागरिकों से एक साल तक नया सोना न खरीदने की बात कही थी, ताकि देश की आर्थिक स्थिति को और मजबूती दी जा सके।
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ज्वेलर्स बनेंगे 'कलेक्शन पार्टनर्स': गेम-चेंजर साबित होगा नया फ्रेमवर्क

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पुरानी योजनाओं से सबक लेते हुए सरकार इस बार इसके दायरे को बेहद व्यावहारिक और व्यापक बनाने जा रही है। नई स्कीम के तहत देशभर के मान्यता प्राप्त सराफा व्यापारियों को 'कलेक्शन पार्टनर्स' के रूप में शामिल करने की मंजूरी दी जा सकती है। इससे पहले तक भारत में सिर्फ अधिकृत बैंकों को ही इस प्रकार से सोना जमा करने और उस पर स्कीम चलाने की कानूनी अनुमति प्राप्त थी।
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'ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन' (AIJGF) का मानना है कि नए फ्रेमवर्क के तहत स्थानीय ज्वेलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाने से एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक बदलाव आएगा। आम भारतीय नागरिकों का अपने पारिवारिक और स्थानीय सुनारों के साथ पीढ़ियों पुराना भरोसा होता है। बैंकों की तुलना में लोग अपने परिचित सर्राफा व्यापारियों के पास जाने में अधिक सहज महसूस करते हैं। फेडरेशन को उम्मीद है कि इस बड़े बदलाव के कारण घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को तेजी से इकट्ठा किया जा सकेगा और सरकार बहुत ही कम समय में बाजार से 1000 टन से ज्यादा सोना जुटाने में सफल रहेगी।
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भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? आयात और डॉलर की घटेगी निर्भरता

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भारतीय परिवारों की सोने के प्रति दीवानगी किसी से छिपी नहीं है। यदि इस नई और संशोधित योजना के माध्यम से भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने का महज 5% हिस्सा भी सरकारी तंत्र और बाजार के आर्थिक चक्र में जमा हो जाता है, तो इसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले और देश हित में होंगे।
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विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स के आकलन के अनुसार, सिर्फ 5% सोने के आने से देश के घरेलू बाजार में करीब 90 अरब डॉलर यानी लगभग 8.57 लाख करोड़ रुपए की भारी-भरकम नकदी (Liquidity) का प्रवाह हो सकता है। इस विशाल लिक्विडिटी के कारण देश को कई स्तरों पर सीधे फायदे मिलेंगे:
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    सोने के आयात पर पूर्ण रोक: बाजार में पर्याप्त सोना उपलब्ध होने के कारण भारत को कम से कम अगले 2 साल तक विदेशों से सोना मंगाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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  2. \r\n
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    डॉलर की मांग में ऐतिहासिक गिरावट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। जब आयात रुकेगा, तो विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की मांग स्वतः ही घट जाएगी।
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    मजबूत होगा भारतीय रुपया: डॉलर की मांग घटने और घरेलू बाजार में ₹8.57 लाख करोड़ की नकदी आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अत्यधिक मजबूत और स्थिर स्थिति में आ जाएगा।
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भारतीय घरों और मंदिरों में रखा है दुनिया का सबसे बड़ा 'गोल्ड रिजर्व'

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भारत में सोने को सिर्फ एक धातु या आभूषण नहीं, बल्कि सुख-दुख का सबसे बड़ा साथी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। भारतीय व्यापारियों के शीर्ष संगठन 'एसोचैम' (The Associated Chambers of Commerce and Industry of India) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारतीय घरों और देश के विभिन्न ऐतिहासिक मंदिरों के खजानों में कुल मिलाकर लगभग 50,000 टन सोना रखा हुआ है।
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इस सोने की वैश्विक ताकत को आप इन आंकड़ों से समझ सकते हैं:

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    10 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू: इस संचित सोने का वर्तमान बाजार मूल्य करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग ₹830 लाख करोड़ के विशाल स्तर को छू रहा है।
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    सेंट्रल बैंकों से भी आगे: यह विशाल भंडार दुनिया के सबसे बड़े 10 देशों के सेंट्रल बैंकों (जैसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व, आईएमएफ आदि) के कुल संयुक्त स्वर्ण भंडार से भी कहीं अधिक है।
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    वैश्विक जीडीपी से बड़ी तुलना: भारतीयों के पास व्यक्तिगत और धार्मिक रूप से इतना अधिक सोना मौजूद है कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और चीन को छोड़ दिया जाए, तो यह दुनिया के लगभग हर देश की सालाना कुल जीडीपी (GDP) से भी बहुत ज्यादा है।
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हर महीने 57 हजार करोड़ रुपए का भारी-भरकम आयात बिल
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भारत वर्तमान समय में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर (सोने का उपभोक्ता) देश बना हुआ है। अपनी इसी भारी मांग को पूरा करने के लिए देश को हर साल अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। चालू वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत ने हर महीने औसतन 60 टन कच्चे और शुद्ध सोने का आयात विदेशों से किया है।
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इस विशाल आयात के कारण देश के खजाने पर हर महीने करीब 6 बिलियन डॉलर यानी लगभग 57,000 करोड़ रुपए का भारी वित्तीय खर्च आ रहा है। यह पैसा सीधे तौर पर देश से बाहर चला जाता है, जिससे देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ता है। सरकार की नई स्कीम इसी भारी-भरकम खर्च को रोककर देश का पैसा देश के भीतर ही घुमाने की एक सोची-समझी आर्थिक रणनीति है।
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पुरानी स्कीम (2015) का फ्लॉप शो: 10 साल में 25,000 टन में से आया सिर्फ 38 टन सोना

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यह पहली बार नहीं है जब सरकार घरों का सोना बाहर निकालने की कोशिश कर रही है। इससे पहले साल 2015 में भी केंद्र सरकार ने सोने के आयात को कम करने के उद्देश्य से 'गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम' की शुरुआत की थी। उस पुरानी योजना के तहत भी लोगों को अपना सोना अधिकृत बैंकों में जमा करने पर 2.25% से लेकर 2.5% तक का सालाना ब्याज कमाने का मौका दिया गया था।
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लेकिन, सरकारी आंकड़ों और बाजार के विश्लेषकों के मुताबिक, यह पुरानी योजना जमीन पर बुरी तरह विफल (फ्लॉप) साबित हुई। भारत के घरों में जहां अनुमानित रूप से 25,000 टन से अधिक का घरेलू सोना मौजूद है, वहीं पिछले 10 वर्षों के लंबे समय में इस सरकारी स्कीम के तहत पूरे देश से महज 38 टन सोना ही बैंकों तक पहुंच सका। लोगों की इस बेहद कम और निराशाजनक दिलचस्पी को देखते हुए सरकार को बाद में इस योजना के 'मीडियम टर्म' और 'लॉन्ग-टर्म' डिपॉजिट्स को पूरी तरह से बंद तक करना पड़ा था।
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पुरानी स्कीम के फेल होने की 4 सबसे बड़ी वजहें

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ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक भाविक पटेल और सर्राफा बाजार के अन्य दिग्गजों के मुताबिक, साल 2015 की योजना के फ्लॉप होने के पीछे चार मुख्य कारण जिम्मेदार थे:
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    सरकारी खजाने पर दोहरा वित्तीय बोझ: पुरानी योजना के तहत सरकार को जमाकर्ताओं को सालाना 2% या उससे अधिक का ब्याज तो देना ही पड़ता था, साथ ही जब स्कीम मैच्योर (पूरी) होती थी, तो उस समय सोने के जो भी बढ़े हुए दाम होते थे, वह भी सरकार को अपनी जेब से चुकाने पड़ते थे। बाजार में उचित और सुरक्षित इंतजाम (हेजिंग मैकेनिज्म) न होने के कारण सरकार को इस योजना से भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    पारंपरिक गहनों से गहरा भावनात्मक लगाव: भारतीय परिवारों, विशेषकर महिलाओं का अपने पुरखों के पुराने आभूषणों और शादी-ब्याह के गहनों से गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव होता है। लोग महज थोड़े से ब्याज के लालच में अपने उन पुश्तैनी गहनों को पिघलाने के लिए कभी तैयार नहीं होते, जिनसे उनकी पारिवारिक यादें, धर्म, परंपराएं और समाज में उनकी प्रतिष्ठा जुड़ी होती है।
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  4. \r\n
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    टैक्स स्क्रूटनी और पूछताछ का गहरा डर: आम जनता के मन में यह बहुत बड़ा डर बैठा हुआ था कि अगर वे अपने घरों में दशकों से रखा पुराना या अघोषित सोना बैंक में जमा करने जाएंगे, तो आयकर विभाग (Income Tax Department) उनके पीछे पड़ जाएगा। लोगों को डर था कि सरकार टैक्स की जांच शुरू कर देगी और दशकों पुराने सोने के बिल या पुख्ता कागजात मांगेगी, जो अमूमन किसी के पास सुरक्षित नहीं होते हैं।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    व्यावसायिक बैंकों की उदासीनता और कम दिलचस्पी: देश के वाणिज्यिक बैंकों को इस पूरी स्कीम को जमीन पर लागू करने या आगे बढ़ाने में कोई खास सीधा व्यावसायिक मुनाफा या इंसेंटिव नजर नहीं आ रहा था। यही वजह रही कि बैंकों के कर्मचारियों और प्रबंधन ने इस योजना को ग्राहकों के बीच प्रमोट करने या इसे सरल बनाने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिससे यह योजना आम लोगों तक पहुंच ही नहीं पाई।
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  8. \r\n
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भारतीय एजेंसियों के अनुसार सोने की वर्तमान कीमतें

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यदि आप इस नई स्कीम का लाभ उठाने या बाजार में सोने की वर्तमान स्थिति को समझना चाहते हैं, तो आधिकारिक स्रोतों के अनुसार देश में सोने के मौजूदा भाव जानना बेहद जरूरी है।
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प्रस्तुत संदर्भात्मक फाइल image_aeec4a.jpg के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बाजार में अलग-अलग कैरेट और देश के प्रमुख शहरों में सोने के भाव (प्रति 10 ग्राम) निम्नलिखित स्तर पर चल रहे हैं:
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कैरट के आधार पर सोने की शुद्धता का भाव (रुपए/10 ग्राम) | सोर्स: IBJA

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    14 कैरेट गोल्ड: ₹85,611
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    18 कैरेट गोल्ड: ₹1,09,758
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    22 कैरेट गोल्ड: ₹1,34,051
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    24 कैरेट शुद्ध गोल्ड: ₹1,46,344
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देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का ताजा भाव (रुपए/10 ग्राम) | सोर्स: goodreturns

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विभिन्न राज्यों के स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत के कारण अलग-अलग शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखा जा सकता है:
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शहर का नाम
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24 कैरेट सोने का भाव (रुपए/10 ग्राम)
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चेन्नई (Chennai)
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₹1,49,560
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दिल्ली (Delhi)
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₹1,47,150
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जयपुर (Jaipur)
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₹1,47,150
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लखनऊ (Lucknow)
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₹1,47,150
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अहमदाबाद (Ahmedabad)
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₹1,47,050
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भोपाल (Bhopal)
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₹1,47,050
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पटना (Patna)
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₹1,47,050
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मुंबई (Mumbai)
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₹1,47,000
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कोलकाता (Kolkata)
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₹1,47,000
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रायपुर (Raipur)
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₹1,47,000
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क्या सफल हो पाएगी सरकार की यह नई मुहिम?

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केंद्र सरकार द्वारा आगामी हफ्तों में लाई जाने वाली यह अपडेटेड 'गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम' निश्चित रूप से कागजों पर बेहद मजबूत और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली दिखाई देती है। सर्राफा व्यापारियों (ज्वेलर्स) को इस तंत्र का हिस्सा बनाकर सरकार ने सीधे उस नब्ज को पकड़ा है, जहां आम भारतीय ग्राहक सबसे ज्यादा भरोसा करता है।
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हालांकि, इस योजना की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार टैक्स स्क्रूटनी (पूछताछ) के नियमों को कितना लचीला और सुरक्षित बनाती है, ताकि आम नागरिक बिना किसी कानूनी डर के अपना सोना बाहर निकाल सकें। यदि सरकार आम जनता के मन से टैक्स का डर निकालने और आभूषणों को बिना पिघलाए डिजिटल या पेपर फॉर्म में रखने का कोई बीच का रास्ता निकाल लेती है, तो यह योजना भारत के आर्थिक इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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