केंद्र सरकार की सेवा में लगे लाखों कर्मचारियों के लिए बुधवार का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के बाद, यह शायद पहला मौका है जब सरकार ने अपने कर्मचारियों की 'जेब' और 'जिंदगी' दोनों को सुरक्षित करने के लिए इतना बड़ा और व्यापक कदम उठाया है। अक्सर एक सरकारी कर्मचारी अपनी पूरी नौकरी के दौरान होम लोन की ईएमआई (EMI), बच्चों की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन और परिवार की सुरक्षा के लिए बीमा की प्रीमियम भरने में ही उलझा रहता है। लेकिन अब, वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने इन सभी चिंताओं पर पूर्णविराम लगाने की तैयारी कर लिया है।READ ALSO:-बाजार में कोहराम: 'रॉकेट' बनी चांदी अचानक हुई 'धड़ाम', 7.3% की ऐतिहासिक गिरावट; ट्रंप के 'यू-टर्न' और मुनाफावसूली ने निवेशकों की सांसें अटका दीं
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वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services - DFS) ने बुधवार को एक ऐतिहासिक पहल करते हुए ‘संयुक्त वेतन खाता पैकेज’ (Composite Salary Account Package) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह सिर्फ एक सैलरी अकाउंट नहीं, बल्कि एक 'संपूर्ण वित्तीय सुरक्षा कवच' (All-in-One Financial Shield) है।
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इस पैकेज के लॉन्च के दौरान डीएफएस सचिव एम. नागराजू ने जो रोडमैप पेश किया, उसने बैंकिंग सेक्टर और कर्मचारी यूनियनों में हलचल मचा दी है। कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सहित देश के सभी प्रमुख सरकारी बैंकों (PSBs) के एमडी और सीईओ मौजूद थे। यह उपस्थिति बताती है कि यह योजना कितने बड़े पैमाने पर लागू होने जा रही है।
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आइए, 3000 से अधिक शब्दों की इस विशेष रिपोर्ट में समझते हैं कि यह पैकेज एक चपरासी से लेकर सचिव स्तर तक के अधिकारी की जिंदगी कैसे बदलने वाला है।
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आखिर क्या है 'कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज'? (The Concept) 

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सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि सरकार को इसकी जरूरत क्यों पड़ी? अब तक, अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के कर्मचारियों के सैलरी अकाउंट अलग-अलग बैंकों में होते थे। किसी बैंक में बीमा का फायदा ज्यादा था, तो किसी में लोन महंगा था। 'अर्धसैनिक बलों' (Paramilitary Forces) को अलग पैकेज मिलता था, जबकि सिविल कर्मचारियों को अलग।
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'कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज' ने इस असमानता की दीवार को गिरा दिया है। डीएफएस (DFS) ने बैंकों के साथ मिलकर एक ऐसा 'यूनिफाइड मॉडल' तैयार किया है, जो तीन मुख्य स्तंभों पर खड़ा है:
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  1. \r\n
    प्रीमियम बैंकिंग सुविधाएं (Banking Benefits): जिसमें बचत और सहूलियत पर जोर है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    सुरक्षा कवच (Insurance Coverage): जो अब तक का सबसे व्यापक कवरेज है।
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  4. \r\n
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    डिजिटल और कार्ड लाभ (Lifestyle Perks): जो कर्मचारी के जीवन स्तर को आधुनिक बनाएगा।
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सरकार का संदेश स्पष्ट है— "आप देश की सेवा करें, आपकी और आपके परिवार की वित्तीय चिंता अब सरकार और बैंकों की जिम्मेदारी है।"
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बैंकिंग सुविधाएं - अब नहीं कटेगा एक भी पैसा

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एक मध्यम वर्गीय सरकारी कर्मचारी के लिए बैंक के छोटे-छोटे चार्ज भी साल भर में हजारों रुपये का बोझ बन जाते हैं। इस पैकेज में इन चार्जेस को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
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1. जीरो बैलेंस अकाउंट की असली आजादी (Total Zero Balance) 

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आमतौर पर, प्राइवेट और सरकारी बैंकों में सैलरी अकाउंट में भी कुछ शर्तें होती हैं। लेकिन इस पैकेज के तहत, खाता पूरी तरह से 'जीरो बैलेंस' होगा।
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    फायदा: अगर महीने के अंत में आपके खाते में एक भी रुपया नहीं बचता, तो भी बैंक आपसे 'नॉन-मेंटेनेंस चार्ज' (Non-maintenance charge) के नाम पर कोई पेनल्टी नहीं वसूलेगा। यह सुविधा विशेष रूप से ग्रुप-सी (Group C) और ग्रुप-डी के कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगी, जिनका बजट अक्सर टाइट रहता है।
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2. ट्रांजेक्शन पर 'फ्रीडम' (Unlimited Free Transactions)

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डिजिटल इंडिया के दौर में हर कोई ऑनलाइन पेमेंट कर रहा है।
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    NEFT/RTGS/IMPS: चाहे आपको अपने गांव पैसे भेजने हों, बच्चों की स्कूल फीस भरनी हो, या मकान का किराया देना हो—अब ये सभी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पूरी तरह मुफ्त होंगे।
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  • \r\n
    अनलिमिटेड एटीएम: किसी भी बैंक के एटीएम से पैसे निकालने पर लगने वाला चार्ज (जो आमतौर पर 3 या 5 ट्रांजेक्शन के बाद लगता है) इस पैकेज में हटा दिया गया है।
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  • \r\n
    मल्टी-सिटी चेक बुक: चेक बुक के लिए भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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3. लोन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव (Concessional Loans)

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सरकारी कर्मचारी बैंकों के लिए सबसे सुरक्षित ग्राहक होते हैं क्योंकि उनकी सैलरी समय पर आती है। इस विश्वसनीयता का इनाम अब उन्हें 'सस्ते लोन' के रूप में मिलेगा।
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    होम लोन (Home Loan): मान लीजिए बाजार में होम लोन की दर 8.50% है। इस पैकेज के तहत कर्मचारियों को इसमें 0.25% से 0.40% तक की छूट मिल सकती है।
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      गणित: अगर आप 50 लाख का लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो 0.25% की छूट से आप पूरी अवधि में लगभग 2 लाख रुपये की बचत करेंगे।
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  • \r\n
    प्रोसेसिंग फीस माफ़: लोन लेते समय बैंक 'फाइल चार्ज' या 'प्रोसेसिंग फीस' के नाम पर 5,000 से लेकर 20,000 रुपये तक वसूलते हैं। इस पैकेज में प्रोसेसिंग फीस पर 100% छूट का प्रावधान है।
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    वाहन और पर्सनल लोन: कार लोन और पर्सनल लोन पर भी बाजार से कम ब्याज दरें लागू होंगी।
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4. लॉकर और ओवरड्राफ्ट की सुविधा

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    लॉकर रेंट: बैंक लॉकर के वार्षिक किराए में 25% से 50% तक की छूट दी जाएगी।
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    ओवरड्राफ्ट (Overdraft): सैलरी आने से पहले अगर पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो कर्मचारी अपनी नेट सैलरी का एक हिस्सा (जैसे 2 महीने की सैलरी) एडवांस के तौर पर निकाल सकेंगे।
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बीमा सुरक्षा - 1.5 करोड़ का 'सुरक्षा चक्र' (The Biggest Highlight)

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इस पैकेज का सबसे बड़ा आकर्षण और सबसे मजबूत पक्ष इसका 'इंश्योरेंस कवरेज' है। अगर कोई कर्मचारी बाजार से इतनी सुविधाओं वाला बीमा (Term & Accidental Plan) खरीदे, तो उसे साल भर में 15,000 से 25,000 रुपये का प्रीमियम देना पड़ेगा। लेकिन यहाँ यह बिल्कुल मुफ्त (Free of Cost) है।
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1. ₹1.5 करोड़ का पर्सनल एक्सीडेंट कवर (Personal Accident Insurance - PAI)

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यह इस पैकेज की हेडलाइन है। सड़क हादसे, रेलवे दुर्घटना या किसी भी अन्य दुर्घटना में अगर कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके नॉमिनी (परिवार) को 1.5 करोड़ रुपये की बीमा राशि मिलेगी।
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    क्यों है यह खास? पहले यह राशि बैंकों के सैलरी पैकेज में 20 से 40 लाख रुपये तक सीमित थी। इसे बढ़ाकर 1.5 करोड़ करना दिखाता है कि सरकार अपने कर्मचारियों की जान की कीमत समझती है। यह कवर 'ऑन-ड्यूटी' (On Duty) और 'ऑफ-ड्यूटी' (Off Duty) दोनों स्थितियों में लागू रहने की संभावना है।
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2. ₹2 करोड़ का एयर एक्सीडेंट कवर (Air Accident Cover)

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हवाई यात्रा के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के लिए बीमा राशि को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह उन अधिकारियों के लिए बड़ी राहत है जो सरकारी काम या एलटीसी (LTC) पर हवाई यात्रा करते हैं। शर्त बस इतनी होती है कि हवाई टिकट उसी सैलरी अकाउंट के डेबिट/क्रेडिट कार्ड से खरीदा गया हो।
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3. ₹1.5 करोड़ का स्थायी विकलांगता कवर (Permanent Total Disability)

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मौत से बदतर स्थिति तब होती है जब दुर्घटना में व्यक्ति की जान तो बच जाए, लेकिन वह कमाने लायक न रहे (जैसे दोनों हाथ या पैर खो देना)। ऐसी स्थिति में परिवार पर आर्थिक पहाड़ टूट पड़ता है।
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    इस पैकेज के तहत, स्थायी पूर्ण विकलांगता की स्थिति में भी 1.5 करोड़ रुपये तक की सहायता राशि मिलेगी, ताकि कर्मचारी अपना बाकी जीवन सम्मान के साथ जी सके।
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4. आंशिक विकलांगता कवर (Partial Disability)

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अगर दुर्घटना में आंशिक नुकसान होता है (जैसे एक आंख या एक पैर की क्षति), तो भी एक निश्चित राशि (जैसे 10 लाख से 50 लाख के बीच) मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।
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5. ₹20 लाख का टर्म लाइफ इंश्योरेंस (Term Life)

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दुर्घटना के अलावा, अगर किसी प्राकृतिक कारण या बीमारी से मृत्यु होती है, तो उसके लिए 20 लाख रुपये का टर्म कवर दिया गया है।
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  • \r\n
    टॉप-अप सुविधा: कर्मचारी चाहे तो बहुत ही कम प्रीमियम देकर इस राशि को बढ़ा सकता है।
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6. एड-ऑन फायदे (Add-on Benefits)

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    बच्चों की शिक्षा: खाताधारक की मृत्यु होने पर बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए 5 से 10 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि।
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    बेटी की शादी: बालिका विवाह के लिए अतिरिक्त सहायता।
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    शव परिवहन: पार्थिव शरीर को घर तक लाने का खर्च (Repatriation of remains) भी इसमें शामिल है।
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कार्ड, लाइफस्टाइल और फैमिली बैंकिंग (The Modern Perks)

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आज का सरकारी कर्मचारी सिर्फ 'रोटी-कपड़ा-मकान' तक सीमित नहीं है, वह एक अच्छी लाइफस्टाइल की भी ख्वाहिश रखता है। यह पैकेज उनकी इन आकांक्षाओं को पूरा करता है।
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1. प्रीमियम कार्ड्स (Debit & Credit Cards)

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    कर्मचारियों को उनके ग्रेड के हिसाब से गोल्ड, प्लैटिनम या सिग्नेचर (Signature) श्रेणी के डेबिट और क्रेडिट कार्ड मुफ्त दिए जाएंगे।
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    नो मेंटेनेंस चार्ज: इन हाई-एंड कार्ड्स पर लगने वाला वार्षिक शुल्क (Annual Maintenance Charge), जो आमतौर पर 500 से 5000 रुपये होता है, पूरी तरह माफ़ होगा।
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2. एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस (Airport Lounge Access)

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अब सरकारी कर्मचारी भी हवाई अड्डों पर वीआईपी ट्रीटमेंट का आनंद ले सकेंगे। पैकेज के साथ मिलने वाले कार्ड्स पर डोमेस्टिक और इंटरनेशनल एयरपोर्ट लाउंज में फ्री एंट्री, खाना और आराम करने की सुविधा मिलेगी।
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3. रिवॉर्ड पॉइंट्स और कैशबैक

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पेट्रोल पंप पर फ्यूल सरचार्ज वेवर (Surcharge Waiver) और ऑनलाइन शॉपिंग पर बेहतरीन रिवॉर्ड पॉइंट्स की सुविधा दी जाएगी।
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4. फैमिली बैंकिंग (Family Banking)

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इस योजना की खूबसूरती यह है कि इसमें परिवार को भी शामिल किया गया है।
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    अगर कर्मचारी अपनी पत्नी/पति या बच्चों का खाता भी उसी बैंक में खुलवाता है, तो उन्हें भी 'जीरो बैलेंस' और अन्य प्रीमियम सुविधाएं मिलेंगी। इसे 'फैमिली सेविंग अकाउंट' के तौर पर लिंक किया जाएगा।
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सरकार और बैंकों के लिए यह सौदा 'फायदेमंद' क्यों? (The Economic Analysis)

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यह सवाल उठना लाजिमी है कि बैंक इतनी सारी सुविधाएं मुफ्त में क्यों दे रहे हैं? क्या इससे बैंकों को नुकसान नहीं होगा? इसका जवाब 'इकोनॉमिक्स ऑफ स्केल' में छिपा है।
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  1. \r\n
    CASA डिपॉजिट (CASA Deposits): बैंकों के लिए करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट (CASA) सबसे सस्ता फंड होता है। सरकारी कर्मचारियों की सैलरी हर महीने की 1 तारीख को बिना फेल हुए आती है। यह बैंकों के लिए एक बहुत बड़ा और स्थिर 'कैश फ्लो' है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    वफादार ग्राहक (Loyal Customer Base): सरकारी कर्मचारी बार-बार बैंक नहीं बदलते। एक बार खाता खुलने का मतलब है 30-35 साल का रिश्ता।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    क्रॉस सेलिंग (Cross Selling): जब कर्मचारी होम लोन या कार लोन लेगा, तो बैंक ब्याज से कमाई करेंगे। मुफ्त सुविधाएं देकर बैंक उन्हें लोन के लिए आकर्षित कर रहे हैं।
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    NPA का कम जोखिम: सरकारी कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित होती है, इसलिए उन्हें दिए गए लोन के डूबने (NPA बनने) का खतरा ना के बराबर होता है।
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इसलिए, यह सौदा बैंकों, सरकार और कर्मचारियों—तीनों के लिए 'विन-विन' (Win-Win) है।
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सभी कैडर के लिए समानता (Inclusivity)

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डीएफएस (DFS) ने स्पष्ट किया है कि यह पैकेज किसी खास वर्ग के लिए नहीं है।
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    ग्रुप A (Group A): क्लास-1 अधिकारी (IAS, IPS, IRS आदि)।
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    ग्रुप B (Group B): राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारी।
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  • \r\n
  • \r\n
    ग्रुप C (Group C): क्लर्क, एमटीएस और अन्य सपोर्ट स्टाफ।
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  • \r\n
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योजना को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि सुविधाओं का लाभ सभी को मिले। हालांकि, कार्ड की लिमिट और बीमा राशि में ग्रेड के हिसाब से थोड़ा अंतर हो सकता है (जैसे ग्रुप A को 2 करोड़ और ग्रुप C को 1 करोड़ का कवर), लेकिन 'जीरो बैलेंस' और 'फ्री ट्रांजेक्शन' जैसी बुनियादी सुविधाएं सबके लिए समान रहेंगी।
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कर्मचारी क्या कह रहे हैं? (Reactions)

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इस घोषणा के बाद से केंद्रीय सचिवालय से लेकर रेलवे और अन्य विभागों के कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
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    कर्मचारी यूनियनों का मत: कई कर्मचारी संगठनों ने वित्त मंत्रालय के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि "ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर चल रही बहस के बीच, यह पैकेज एक तरह का 'मरहम' है। 1.5 करोड़ का बीमा कवर परिवार को वो सुरक्षा देता है जिसकी हम लंबे समय से मांग कर रहे थे।"
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    आम कर्मचारी की राय: एक रेलवे कर्मचारी ने कहा, "हम अक्सर प्राइवेट बैंकों के ऑफर्स को ललचाई नजरों से देखते थे, लेकिन अब सरकारी बैंकों ने जो पैकेज दिया है, वह प्राइवेट से भी बेहतर है। प्रोसेसिंग फीस की माफी और सस्ता लोन हमारे घर के सपने को पूरा करेगा।"
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कैसे मिलेगा लाभ? (How to Avail)

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अब सबसे बड़ा सवाल—कर्मचारी इस सुविधा का लाभ कैसे उठा सकते हैं?
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    मौजूदा खाताधारक (Existing Account Holders): जिन कर्मचारियों का सैलरी अकाउंट पहले से ही एसबीआई (SBI), पीएनबी (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) आदि में है, उन्हें अपनी ब्रांच में जाकर एक साधारण फॉर्म भरकर अपने खाते को 'कंपोजिट सैलरी पैकेज' में अपग्रेड कराना होगा।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    नया खाता (New Account): नए कर्मचारी सीधे इस पैकेज के तहत खाता खुलवा सकते हैं।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    पोर्टेबिलिटी (Portability): अगर कोई कर्मचारी अपने मौजूदा बैंक से खुश नहीं है, तो वह आसानी से दूसरे बैंक में अपना सैलरी अकाउंट शिफ्ट कर सकता है और इस पैकेज का लाभ ले सकता है।
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  6. \r\n
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जरूरी दस्तावेज:

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    सैलरी स्लिप (Latest Salary Slip)
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  • \r\n
  • \r\n
    विभागीय आईडी कार्ड (ID Card)
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  • \r\n
  • \r\n
    आधार और पैन कार्ड
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  • \r\n
  • \r\n
    दो फोटो
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  • \r\n
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वित्तीय आजादी की ओर एक बड़ा कदम

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वित्त मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया 'संयुक्त वेतन खाता पैकेज' (Composite Salary Account Package) केवल बैंकिंग सुविधाओं का एक बंडल नहीं है, बल्कि यह सरकार की उस सोच को दर्शाता है जहां वह अपने कार्यबल (Workforce) को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना चाहती है।
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1.5 करोड़ रुपये का एक्सीडेंटल कवर और 20 लाख का टर्म इंश्योरेंस कर्मचारियों के परिवारों को अनहोनी की स्थिति में बिखरने से बचाएगा। वहीं, सस्ता होम लोन और जीरो बैलेंस सुविधा उनके वर्तमान जीवन को सुखद बनाएगी। यह कदम निश्चित रूप से सरकारी नौकरी के आकर्षण को और बढ़ाएगा और कर्मचारियों को पूर्ण मनोयोग से देश सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।
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अब देखना यह होगा कि यह योजना जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से लागू होती है और बैंक अपने वादों पर कितने खरे उतरते हैं। फिलहाल, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यह खबर किसी 'दिवाली बोनस' से कम नहीं है।
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