नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क): यदि आप सिगरेट पीने के शौकीन हैं, तो अब आपको अपनी इस आदत के लिए अपनी जेब काफी ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। देश में एफएमसीजी (FMCG) और टोबैको (तंबाकू) सेक्टर की दिग्गज कंपनियों ने सिगरेट के दामों में भारी इजाफा कर दिया है। सरकार द्वारा बजट में उत्पाद शुल्क (Excise Duty) बढ़ाए जाने के बाद कंपनियों ने इस अतिरिक्त टैक्स का पूरा बोझ ग्राहकों के कंधों पर डाल दिया है।READ ALSO:-देशभर में मेडिकल स्टोर हड़ताल (20 मई): मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं, जानें क्या खुला है और क्या रहेगा बंद!
\r\n\r\n\r\n\r\n
दामों में हुई इस बेतहाशा वृद्धि का सीधा और नकारात्मक असर बाजार के आंकड़ों पर देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल और मई के महीनों में सिगरेट की कुल बिक्री में लगभग 20 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। उपभोक्ता के लिए सिगरेट का कश अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है, जिसके चलते बाजार में एक बड़ा बदलाव (Shift) देखने को मिल रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पॉकेट पैक से लेकर किंग साइज तक, हर डिब्बी पर लगी महंगाई की आग
\r\n\r\nसिगरेट बाजार में सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड्स की कीमतों में कंपनियों ने सीधे तौर पर बड़ा बदलाव किया है। ब्रोकरेज फर्म 'बीएंडके सिक्योरिटीज' (B&K Securities) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा प्रभाव 'पॉकेट पैक' (Pocket Pack) ब्रांड्स पर पड़ा है, जिसे आम तौर पर युवा और मध्यम वर्ग का उपभोक्ता खरीदता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कीमतों में बदलाव का एक संक्षिप्त विवरण:
\r\n\r\n| \r\n सिगरेट ब्रांड (कंपनी) \r\n | \r\n \r\n पुरानी कीमत (रुपये) \r\n | \r\n \r\n नई कीमत (रुपये) \r\n | \r\n \r\n वृद्धि \r\n | \r\n
|---|---|---|---|
| \r\n पॉकेट मार्लबोरो (गॉडफ्रे फिलिप्स) \r\n | \r\n \r\n ₹70 \r\n | \r\n \r\n ₹85 \r\n | \r\n \r\n ₹15 का इजाफा \r\n | \r\n
| \r\n गोल्ड फ्लेक सुपरस्टार (ITC) \r\n | \r\n \r\n ₹70 \r\n | \r\n \r\n ₹79 \r\n | \r\n \r\n ₹9 का इजाफा \r\n | \r\n
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
कंपनियों की कुल बिक्री में इन उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 8 से 12 प्रतिशत तक होती है। एक ही झटके में 15 रुपये तक की वृद्धि ने ग्राहकों के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
बिक्री में भारी गिरावट का असली कारण क्या है?
\r\n\r\nबाजार में आई इस अचानक सुस्ती की जड़ें सरकार के नीतिगत फैसलों से जुड़ी हैं। दरअसल, 1 फरवरी, 2026 को पेश किए गए आम बजट में सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर नकेल कसने और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सरकार ने सिगरेट पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में 30 से 40 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी कर दी थी। सिगरेट कंपनियों (विशेषकर ITC और Godfrey Phillips) ने कुछ महीनों तक तो स्थिति को संभाला, लेकिन अंततः अपने मुनाफे (Profit Margins) को बनाए रखने के लिए उन्होंने कीमतें बढ़ा दीं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
एनडीटीवी प्रॉफिट (NDTV Profit) की एक रिपोर्ट के हवाले से यह साफ हो गया है कि बढ़ी हुई कीमतों के लागू होते ही, अकेले अप्रैल के महीने में सिगरेट की बिक्री का ग्राफ लगभग 20 प्रतिशत नीचे आ गिरा है। सबसे तगड़ा झटका 'प्रीमियम किंग-साइज' (Premium King-Size) कैटेगरी को लगा है, जहां कीमतों के बढ़ने से उपभोक्ता सीधे तौर पर दूरी बना रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव: महंगे ब्रांड्स छोड़ सस्ते विकल्पों की ओर रुख (Down-trading)
\r\n\r\nअर्थशास्त्र में एक टर्म है 'डाउन-ट्रेडिंग' (Down-trading), जिसका अर्थ है महंगाई बढ़ने पर ग्राहकों का महंगे उत्पादों को छोड़कर उसी श्रेणी के सस्ते उत्पादों को अपना लेना। सिगरेट बाजार में इस समय बिल्कुल यही हो रहा है।
\r\n\r\n
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
किंग-साइज सिगरेट, जो भारत में एक स्टेटस सिंबल भी माना जाता है, अब आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n आईटीसी का 'क्लासिक' (Classic) और 'गोल्ड फ्लेक किंग्स' (Gold Flake Kings)\r\n \r\n
- \r\n गॉडफ्रे फिलिप्स का 'मार्लबोरो' (Marlboro)\r\n \r\n
\r\n\r\n
बाजार के जानकारों और स्थानीय डीलर्स के मुताबिक, पहले जो एक किंग-साइज सिगरेट 20 रुपये के आसपास मिल जाती थी, अब उसके लिए ग्राहकों को 25 से 28 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
डीलर्स का क्या कहना है? स्थानीय पान और सिगरेट विक्रेताओं का कहना है कि सिगरेट पीने वालों की कुल संख्या में या उनके सिगरेट पीने की लत में कोई खास कमी नहीं आई है। लोग सिगरेट छोड़ नहीं रहे हैं, बल्कि अपना खर्च नियंत्रित करने के लिए वे अब महंगे प्रीमियम ब्रांड्स छोड़कर सस्ते और लोकल विकल्पों (माइल्ड या मिनी साइज) की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
\r\n\r\nचूंकि इन कंपनियों के कुल राजस्व (Total Revenue) में किंग-साइज सेगमेंट का 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान होता है, इसलिए ग्राहकों का यह शिफ्ट (बदलाव) कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर मंडराता खतरा
\r\n\r\nबिक्री में इस 20 प्रतिशत की मंदी का सीधा और बुरा असर इन एफएमसीजी (FMCG) दिग्गजों की बैलेंस शीट पर पड़ना तय माना जा रहा है। सेक्टर पर पैनी नजर रखने वाले वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान है कि वॉल्यूम में आई इस भारी कमी के कारण वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में सिगरेट कंपनियों के मार्जिन में 800 बेसिस पॉइंट्स (8%) तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
यह गिरावट इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले महीनों में वॉल्यूम में कितनी कमी बनी रहती है और ग्राहक किस हद तक सस्ते ब्रांड्स की तरफ जाते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि आईटीसी (ITC) जैसी दिग्गज कंपनी का सिगरेट मार्जिन आमतौर पर 70 प्रतिशत तक ऊंचा रहता है, और यही मार्जिन कंपनी के अन्य एफएमसीजी व्यवसायों को फंड करने में मदद करता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
शेयर बाजार (Stock Market) का हाल: गिरावट के बावजूद स्थिरता
\r\n\r\nभले ही ग्राउंड जीरो पर बिक्री के आंकड़े डराने वाले हों, लेकिन शेयर बाजार के निवेशकों ने इन कंपनियों पर अब भी भरोसा जताया हुआ है। अक्सर तंबाकू कंपनियों के शेयर ऐसी कर नीतियों के झटके सहने के आदी होते हैं, क्योंकि तंबाकू उत्पादों की मांग इनइलास्टिक (Inelastic) मानी जाती है, जिसका मतलब है कि लंबे समय में ग्राहक वापस महंगे ब्रांड्स की ओर लौट आते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ताजा कारोबारी सत्र में शेयरों का प्रदर्शन:
\r\n\r\n| \r\n कंपनी का नाम \r\n | \r\n \r\n ताजा भाव (NSE) \r\n | \r\n \r\n बदलाव (बढ़त) \r\n | \r\n \r\n प्रतिशत बदलाव \r\n | \r\n
|---|---|---|---|
| \r\n गॉडफ्रे फिलिप्स (Godfrey Phillips) \r\n | \r\n \r\n ₹2,364.00 \r\n | \r\n \r\n + ₹49.10 \r\n | \r\n \r\n + 2.12% \r\n | \r\n
| \r\n आईटीसी लिमिटेड (ITC Ltd.) \r\n | \r\n \r\n ₹311.35 \r\n | \r\n \r\n + ₹1.20 \r\n | \r\n \r\n + 0.39% \r\n | \r\n
\r\n\r\n
बाजार की इस भारी उठापटक और बिक्री में 20% की गिरावट की खबरों के बीच भी शेयर बाजार में इन कंपनियों के शेयरों में स्थिरता और हल्की बढ़त देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि कंपनियां आने वाले समय में अपने उत्पाद पोर्टफोलियो (Product Portfolio) को इस तरह से एडजस्ट करेंगी कि छोटे और सस्ते पैक्स से होने वाले वॉल्यूम के जरिए प्रीमियम पैक में होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.