यदि आप घर से बाहर निकल रहे हैं और सोच रहे हैं कि रास्ते में किसी एटीएम (ATM) से नकद निकासी कर लेंगे, तो यह खबर आपके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। भारत के कई प्रमुख राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश (UP), दिल्ली (Delhi) और हरियाणा (Haryana) में इन दिनों एटीएम कैश हड़ताल के कारण भारी नकद संकट (Cash Crunch) पैदा हो गया है। एटीएम में कैश डालने वाली कंपनियों के कर्मचारियों ने अपनी वेतन वृद्धि (Wage Hike) और अन्य मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसके परिणामस्वरूप, इन राज्यों के ज्यादातर एटीएम मशीनों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें देखी जा रही हैं या फिर उन पर 'नो कैश' (No Cash) का बोर्ड लटक गया है।READ ALSO:-रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर: 15 जुलाई से बदल गया IRCTC टिकट बुकिंग का पूरा प्रोसेस, ऑनलाइन जनरल टिकट पर फोटो आईडी हुई अनिवार्य
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या है पूरा मामला और क्यों हुई यह एटीएम कैश हड़ताल?

\r\n\r\n
देशभर के एटीएम नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए बैंक कैश मैनेजमेंट कंपनियों (Cash Management Companies) की सेवाएं लेते हैं। इन कंपनियों के कर्मचारी सुरक्षा के साथ बैंकों के चेस्ट (Bank Chest) से पैसा निकालकर शहर के अलग-अलग एटीएम में लोड करते हैं। पिछले कुछ समय से इन कर्मचारियों और कंपनियों के बीच वेतन (Salary) को लेकर भारी विवाद चल रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि महंगाई के इस दौर में उनका वेतन काफी कम है और लंबे समय से उनके वेतन में कोई संतोषजनक वृद्धि नहीं की गई है। इसी के विरोध में उन्होंने काम का बहिष्कार करते हुए एटीएम कैश हड़ताल का ऐलान कर दिया है। कर्मचारियों की चेतावनी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे काम पर नहीं लौटेंगे। जैसे-जैसे हड़ताल लंबी खिंच रही है, एटीएम में रखे पुराने नोट खत्म हो रहे हैं और नए नोट डाले नहीं जा रहे हैं। इसका सीधा और सबसे बुरा असर आम जनता की दैनिक जरूरतों पर पड़ रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

किन राज्यों में दिख रहा है सबसे ज्यादा असर?

\r\n\r\n
शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, इस एटीएम कैश हड़ताल का सबसे ज्यादा प्रभाव दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहरों (जैसे नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर) और हरियाणा (गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक) में भी कैश की किल्लत साफ तौर पर महसूस की जा रही है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
राहत की बात फिलहाल यह है कि यह हड़ताल अभी कुछ ही राज्यों और इलाकों तक सीमित है। लेकिन बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही बैंकों, कैश मैनेजमेंट कंपनियों और हड़ताली कर्मचारियों के बीच बातचीत का कोई ठोस हल नहीं निकला, तो यह संकट देश के अन्य राज्यों (जैसे राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश) में भी आग की तरह फैल सकता है।
\r\n\r\n
सरकारी बैंकों के एटीएम पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस एटीएम कैश हड़ताल का सबसे बड़ा खामियाजा सरकारी बैंकों (Sarkari Banks) के ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है। इसका कारण यह है कि देश के सबसे बड़े बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) अपने एटीएम में कैश लोड करने का काम बड़े पैमाने पर आउटसोर्स (Outsource) करते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सरकारी बैंकों का नेटवर्क बहुत विशाल होता है और रोजाना लाखों की संख्या में ग्रामीण और शहरी लोग इन एटीएम से पैसे निकालते हैं। जब कैश वैन ही एटीएम तक नहीं पहुंचेंगी, तो सबसे ज्यादा हाहाकार इन्हीं इलाकों में मचेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कौन सी कंपनियां हैं इस हड़ताल में शामिल?

\r\n\r\n
भारत के कैश लॉजिस्टिक्स मार्केट (Cash Logistics Market) में कुछ चुनिंदा कंपनियों का ही दबदबा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में एटीएम तक नकदी पहुंचाने का मुख्य काम करने वाली दो सबसे बड़ी कंपनियों – Hitachi Payment Services (हिताची पेमेंट सर्विसेज) और CMS Info Systems (सीएमएस इंफो सिस्टम्स) के कर्मचारियों ने इस एटीएम कैश हड़ताल में मुख्य रूप से हिस्सा लिया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
ये दोनों कंपनियां भारत के एक बहुत बड़े हिस्से के एटीएम नेटवर्क को संभालती हैं। यदि इन कंपनियों के पहिए थम गए, तो समझ लीजिए कि पूरी अर्थव्यवस्था का नकद प्रवाह (Cash Flow) धीमा पड़ जाएगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कैटमी (CATMi) ने जताई चिंता: "खर्च बढ़ने से बिगड़ा गणित"

\r\n\r\n
एटीएम इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख संस्था 'कैटमी' (CATMi - Confederation of ATM Industry) ने भी इस पूरे प्रकरण पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संस्था का कहना है कि समस्या केवल कर्मचारियों के वेतन की नहीं है, बल्कि पूरे एटीएम इकोसिस्टम के अस्तित्व की है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कैटमी ने पिछले महीने ही इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को एक विस्तृत चिट्ठी लिखी थी, जिसमें एटीएम नेटवर्क पर लगातार बढ़ रहे आर्थिक दबाव के बारे में आगाह किया गया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
कैटमी (CATMi) का तर्क: नए वेज कोड (Wage Code) के नियमों के लागू होने और बाजार में लगातार बढ़ते डीजल-पेट्रोल के दामों की वजह से एटीएम चलाने का कुल खर्च (Operating Cost) लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है। बैंकों द्वारा कंपनियों को दी जाने वाली फीस में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिसके कारण कंपनियों और कर्मचारियों के बीच सैलरी को लेकर यह बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

डिजिटल इंडिया के दौर में कैश की अहमियत

\r\n\r\n
भले ही आज भारत 'डिजिटल इंडिया' (Digital India) की राह पर तेजी से दौड़ रहा है और गली-मोहल्ले की दुकानों पर यूपीआई (UPI), गूगल पे (Google Pay), और फोनपे (PhonePe) जैसे डिजिटल पेमेंट्स का बोलबाला है, लेकिन नकद (Cash) की अहमियत को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
आज भी भारत की एक बड़ी आबादी, विशेषकर दिहाड़ी मजदूर, बुजुर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग, अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह नकदी पर निर्भर हैं। इसके अलावा, कई बार बैंक का सर्वर डाउन होने, इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या होने, या मेडिकल इमरजेंसी (Medical Emergency) के समय केवल 'कैश' ही काम आता है। ऐसे में एटीएम कैश हड़ताल का लंबा खिंचना आम आदमी के लिए एक डरावना सपना साबित हो सकता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
हमारी सलाह: किसी भी आपात स्थिति के लिए जेब में रखें थोड़ा कैश!
\r\n\r\n
इस अनिश्चितता के माहौल में हम अपने सभी पाठकों को यही सलाह देंगे कि वे पूरी तरह से डिजिटल पेमेंट्स के भरोसे न रहें। यदि आप यूपी, दिल्ली या हरियाणा के निवासी हैं, तो कोशिश करें कि अपनी जरूरत भर का नकद (Cash Advance) पहले से ही सुरक्षित रख लें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
जब तक यह एटीएम कैश हड़ताल आधिकारिक रूप से समाप्त नहीं हो जाती और स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक अनावश्यक नकद खर्च से बचें। यदि आपके घर के आस-पास का कोई एटीएम चालू है, तो वहां से कुछ रुपये निकालकर अपनी इमरजेंसी किट में जरूर रख लें ताकि सर्वर डाउन होने या किसी अन्य आपातकालीन स्थिति में आपको परेशान न होना पड़े।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में कैश मैनेजमेंट कर्मचारियों की हड़ताल के कारण एटीएम मशीनों में पैसों की भारी किल्लत हो गई है। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 'हिताची' और 'सीएमएस' जैसी कंपनियों के कर्मचारियों ने एटीएम कैश हड़ताल कर दी है। इससे सबसे ज्यादा असर आउटसोर्स किए गए सरकारी बैंकों के एटीएम पर पड़ा है। कैटमी (CATMi) ने बताया है कि ईंधन के दाम बढ़ने और नए वेज कोड के कारण परिचालन लागत 20% तक बढ़ गई है। जब तक यह संकट नहीं सुलझता, जनता को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल पेमेंट के साथ-साथ आपातकालीन स्थिति के लिए अपने पास थोड़ा कैश जरूर निकाल कर रखें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

डिस्क्लेमर (Disclaimer) 

\r\n\r\n
यह न्यूज़ रिपोर्ट विभिन्न मीडिया आउटलेट्स, कर्मचारी यूनियनों के बयानों और CATMi द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्तियों के आधार पर विशुद्ध रूप से जन-जागरूकता के लिए संकलित की गई है। बैंकों के एटीएम में कैश की उपलब्धता क्षेत्रीय परिस्थितियों और कंपनियों व कर्मचारियों के बीच चल रही बातचीत पर निर्भर करती है। 'Khabreelal' न्यूज़ पोर्टल किसी भी प्रकार की वित्तीय घबराहट (Panic) फैलाने का समर्थन नहीं करता है। पाठकों से अनुरोध है कि वे अपनी वित्तीय जरूरतों का प्रबंधन समझदारी से करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें