मानसून सीजन और पहाड़ी इलाकों में हो रही भारी बारिश को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में मुरादाबाद मंडल बाढ़ तैयारी के तहत मंडल के पांचों जिलों—मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, संभल और अमरोहा में सुरक्षा और राहत-बचाव के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वर्तमान में रामगंगा, गंगा और कोसी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से डेढ़ से दो मीटर नीचे है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। इसके बावजूद किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है।
\r\n\r\nमंडल भर में व्यापक प्रशासनिक इंतजाम और चौकियां
\r\n\r\nसंभावित बाढ़ के खतरों से निपटने के लिए पूरे मंडल में युद्ध स्तर पर तैयारियां की गई हैं। मंडल के विभिन्न जिलों में कुल 124 बाढ़ चौकियां और 98 बाढ़ आश्रय स्थल (शेल्टर) पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं।
\r\n\r\nइसके साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए पीएसी की फ्लड रेस्क्यू यूनिट, 100 से अधिक प्रशिक्षित गोताखोर और सैकड़ों आपदा मित्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। 'सचेत ऐप' और राहत चौपालों के जरिए गांव-गांव जागरूकता फैलाई जा रही है, ताकि ग्रामीण समय रहते सतर्क हो सकें।
\r\n\r\n1. मुरादाबाद: रामगंगा का जलस्तर स्थिर, 35 चौकियां तैनात
\r\n\r\nमुरादाबाद जिले में कटघर रेलवे पुल पर रामगंगा का जलस्तर 188.23 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के 190 मीटर के निशान से काफी नीचे है। जिला प्रशासन ने कृषि क्षेत्र के 199 और आबादी वाले 12 से 15 अतिसंवेदनशील गांवों पर विशेष नजर रखी है।
\r\n\r\nशहरी इलाकों में भोलानाथ कॉलोनी और नागफनी के निचले हिस्सों की निगरानी की जा रही है। जिले में कुल 35 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं और हर तहसील में राहत चौपालों का आयोजन कर लोगों को 1078 टोल-फ्री नंबर की जानकारी दी जा रही है।
\r\n\r\n2. बिजनौर: गंगा और मालन नदी पर कड़ी निगरानी
\r\n\r\nबिजनौर जिले में गंगा, मालन और खोह नदियों के प्रवाह पर लगातार नजर रखी जा रही है। सिंचाई विभाग के मुताबिक, जिले में 24 संवेदनशील और 5 अतिसंवेदनशील गांव चिन्हित किए गए हैं।
\r\n\r\nप्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से 32 बाढ़ चौकियां और 35 बाढ़ आश्रय स्थल सक्रिय कर दिए हैं। जिला कंट्रोल रूम से हर दो घंटे में मौसम का अपडेट और अलर्ट सीधे ग्राम प्रधानों तथा फील्ड अधिकारियों तक पहुंचाया जा रहा है।
\r\n\r\n3. रामपुर: कोसी और रामगंगा के तटवर्ती इलाकों पर नजर
\r\n\r\nरामपुर जिले में कोसी और रामगंगा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव पर प्रशासनिक अमला नजर बनाए हुए है। निचले कृषि क्षेत्रों में पानी फैलने की आशंका के चलते 12 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है।
\r\n\r\nजिले में 30 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं और रामनगर बैराज तथा रामगंगा डैम के कंट्रोल रूम से लगातार कोऑर्डिनेशन किया जा रहा है। जिलाधिकारी खुद संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं।
\r\n\r\n4. संभल: गुन्नौर तहसील क्षेत्र में सबसे ज्यादा सतर्कता
\r\n\r\nसंभल जिले की गुन्नौर तहसील बाढ़ के दृष्टिकोण से सर्वाधिक संवेदनशील मानी जाती है। यहां गंगा का जलस्तर 178.04 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान से नीचे है।
\r\n\r\nप्रशासन ने डूब क्षेत्र के 6 अतिसंवेदनशील गांवों समेत कुल 36 गांवों की सघन निगरानी शुरू कर दी है। जिले में 16 बाढ़ चौकियां और 13 शेल्टर बनाए गए हैं, जबकि आपात स्थिति के लिए 52 स्थानीय गोताखोरों और 100 आपदा मित्रों को तैनात किया गया है।
\r\n\r\n5. अमरोहा: धनौरा और हसनपुर में पुख्ता सुरक्षा प्रबंध
\r\n\r\nअमरोहा में गंगा नदी का जलस्तर सामान्य और खतरे के निशान से नीचे चल रहा है। संभावित खतरे को देखते हुए धनौरा और हसनपुर तहसील में 11 बाढ़ चौकियां और 15 शरणालय सक्रिय हैं।
\r\n\r\nजिले के 25 अतिसंवेदनशील और लगभग 80 संवेदनशील गांवों को चिन्हित किया गया है। पीएसी की 15वीं बटालियन की एक टीम और 25 गोताखोरों का दल मुस्तैद है, जो 24 घंटे क्रियाशील कंट्रोल रूम के संपर्क में है।
\r\n\r\nकुल मिलाकर, मुरादाबाद मंडल बाढ़ तैयारी यह साबित करती है कि प्रशासन किसी भी आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। नदियों का जलस्तर फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर उठाए गए कदम क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद कारगर साबित हो रहे हैं।
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