प्रकृति और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में हर छोटे-बड़े जीव-जंतु का अहम योगदान होता है। किसी दौर में हमारे घरों के आंगनों, छतों और मुंडेरों पर सुबह-सुबह चहचहाने वाली 'गौरैया' आज के मोबाइल टावरों और पक्के मकानों के दौर में कहीं खो सी गई है। लेकिन बिजनौर जिले के स्योहारा निवासी जमाल शेख ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने ही घर को गौरैया का एक सुरक्षित आशियाना बना दिया है।READ ALSO:-यूपी में 22 मई से बजेगा डिजिटल जनगणना का बिगुल: पहली बार मोबाइल ऐप से होगी मकानों की गिनती, जानिए 33 सवालों और सरकार के महा-प्लान की पूरी डिटेल
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जमाल शेख की इस निस्वार्थ सेवा और पर्यावरण संरक्षण की खबर जब बिजनौर प्रशासन तक पहुंची, तो जिले की सर्वोच्च अधिकारी खुद उनके इस अद्भुत काम को देखने से खुद को रोक नहीं पाईं।
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संपूर्ण समाधान दिवस के बाद सीधे स्योहारा पहुंचीं DM

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शनिवार, 2 मई 2026 का दिन बिजनौर प्रशासन के लिए काफी व्यस्त था।
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    तहसील धामपुर में आयोजन: जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर सुबह से ही तहसील धामपुर में आयोजित 'संपूर्ण समाधान दिवस' (Sampoorna Samadhan Diwas) में जनता की समस्याएं सुन रही थीं और उनका निस्तारण कर रही थीं।
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    जमाल शेख के घर अचानक दौरा: समाधान दिवस की समाप्ति के बाद, डीएम जसजीत कौर का काफिला सीधे स्योहारा कस्बे की तरफ मुड़ गया। वे बिना किसी बड़े तामझाम के स्योहारा निवासी जमाल शेख के आवास पर पहुंचीं। प्रशासन की मुखिया को अचानक अपने घर और आंगन में देखकर जमाल शेख और उनका परिवार भी खुशी से गदगद हो गया।
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बड़े पैमाने पर 'गौरैया पालन एवं संरक्षण' का किया अवलोकन

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डीएम जसजीत कौर ने जमाल शेख के घर के उस हिस्से का बहुत ही बारीकी और दिलचस्पी के साथ अवलोकन किया, जिसे उन्होंने 'गौरैया संरक्षण केंद्र' में तब्दील कर दिया है।
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    सुरक्षित घोंसले और दाना-पानी: जमाल शेख ने अपने घर में छोटी गौरैया के लिए विशेष रूप से लकड़ी और मिट्टी के कृत्रिम घोंसले (Artificial Nests) बनवाए हैं। इसके अलावा गर्मी के मौसम को देखते हुए जगह-जगह पर दाना और साफ पानी रखने की अचूक व्यवस्था की गई है।
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    बड़ी संख्या में चिड़ियों का बसेरा: डीएम ने देखा कि जमाल के घर के आंगन में सैकड़ों की संख्या में नन्हीं गौरैया बिना किसी डर के चहचहा रही हैं और दाना चुग रही हैं। एक ऐसे दौर में जब शहरों में एक गौरैया दिखना भी दुर्लभ हो गया है, वहां इतनी बड़ी संख्या में इन चिड़ियों का संरक्षण देखना प्रशासन के लिए भी एक सुखद आश्चर्य था।
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DM जसजीत कौर ने जमाल शेख को दी बधाई और की तारीफ

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इस सराहनीय कार्य को देखने के बाद जिलाधिकारी जसजीत कौर ने जमाल शेख को इस उत्कृष्ट पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जहां लोग सिर्फ अपने बारे में सोच रहे हैं, वहां जमाल शेख जैसे लोग प्रकृति के सच्चे प्रहरी हैं।
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डीएम ने अपनी मीडिया 'बाइट' (Media Bite) में कहा: "आज धामपुर में संपूर्ण समाधान दिवस के उपरांत मुझे स्योहारा में जमाल शेख जी के घर आकर उनके द्वारा किए जा रहे गौरैया संरक्षण को देखने का अवसर मिला। यह देखकर बेहद खुशी हुई कि उन्होंने किस तरह से अपने घर को इन छोटी चिड़ियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण में बदल दिया है। पर्यावरण और इको-सिस्टम (Eco-system) को बचाने के लिए पक्षियों का संरक्षण बहुत जरूरी है। जमाल जी का यह प्रयास न केवल बिजनौर, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। मैं जिला प्रशासन की ओर से उनके इस नेक काम की भूरी-भूरी प्रशंसा करती हूं और उन्हें शुभकामनाएं देती हूं।"
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गौरैया संरक्षण क्यों है जरूरी? (पर्यावरणीय महत्व)

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जमाल शेख की यह मुहिम सिर्फ पक्षी प्रेम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्व भी है:
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    जैव विविधता (Biodiversity): गौरैया हमारे इको-सिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े-मकोड़ों को खाकर किसानों की मदद करती है।
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    विलुप्ति का खतरा: शहरीकरण, पेड़ों की कटाई और रसायनों (Pesticides) के अत्यधिक उपयोग के कारण यह मासूम पक्षी विलुप्ति की कगार पर है। जमाल शेख जैसे लोगों के प्रयास ही इन्हें बचा सकते हैं।
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हम सब के लिए एक प्रेरणा

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बिजनौर की डीएम श्रीमती जसजीत कौर द्वारा जमाल शेख के काम को सराहा जाना इस बात का प्रमाण है कि अच्छे और निस्वार्थ कामों को हमेशा पहचान मिलती है। यह खबर हम सभी को एक संदेश देती है कि प्रकृति को बचाने के लिए किसी बड़े सरकारी फंड या एनजीओ की जरूरत नहीं है, बल्कि अपनी छत या बालकनी में एक कटोरी पानी और मुट्ठी भर दाना रखकर हम भी जमाल शेख की तरह पर्यावरण संरक्षण के इस महायज्ञ में अपनी आहुति दे सकते हैं।
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