बिजनौर (Bijnor) के सिंगनीवाला गांव में आतंक का पर्याय बन चुके और एक मासूम की जान लेने वाले आदमखोर गुलदार को वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद पिंजरे में कैद कर लिया है। भाकियू लोकशक्ति ने कार्रव
Published at : 05 Aug 2026, 05:45 PM
Updated at : 10 Sep 2026, 10:50 PM
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bijnor leopard caught in cage forest department action
बिजनौर / सिंगनीवाला (खबरीलाल न्यूज़ डेस्क)। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गन्ने के खेतों और ग्रामीण इलाकों में मंडराता मौत का साया अब कुछ कम हुआ है। जिले के सिंगनीवाला गांव और उसके आस-पास के क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से दहशत का दूसरा नाम बन चुके एक खूंखार आदमखोर गुलदार (Leopard) को आखिरकार वन विभाग की टीम ने पकड़ने में सफलता हासिल कर ली है। इस गुलदार ने हाल ही में एक मासूम बच्चे पर जानलेवा हमला कर उसे अपना निवाला बना लिया था, जिसके बाद से पूरे इलाके में मातम और भारी आक्रोश का माहौल था।READ ALSO:-CCSU मेरठ के लाखों छात्रों के लिए जरूरी खबर: कांवड़ यात्रा के चलते 12 अगस्त तक बंद रहेगा विश्वविद्यालय, घर बैठे ऐसे मिलेगा 'प्रोविजनल सर्टिफिकेट
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गुलदार के पिंजरे में कैद होने की खबर जैसे ही गांव में फैली, दहशत के साये में जी रहे ग्रामीणों ने एक गहरी राहत की सांस ली। दूसरी ओर, किसानों के हक की आवाज बुलंद करने वाले संगठन भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) लोकशक्ति ने वन विभाग की इस त्वरित और सफल कार्रवाई की जमकर सराहना की है, लेकिन साथ ही मृतक बच्चे के गरीब परिवार को भारी-भरकम आर्थिक मुआवजा देने की पुरजोर मांग भी उठाई है।
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आइए खबरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि आदमखोर गुलदार को पकड़ने का यह ऑपरेशन कैसे सफल हुआ और इलाके के मौजूदा हालात क्या हैं।
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@Shakeel57767846 बिजनौर के सिंगनीवाला गांव में आतंक का पर्याय बन चुके और एक मासूम की जान लेने वाले आदमखोर गुलदार को वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद पिंजरे में कैद कर लिया है। भाकियू लोकशक्ति ने कार्रवाई की सराहना करते हुए पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग उठाई है। pic.twitter.com/3XHSnm54xm
बिजनौर जिले का भौगोलिक ढांचा ऐसा है कि यहां दूर-दूर तक फैले गन्ने के खेत वन्यजीवों, विशेषकर गुलदार के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन चुके हैं। सिंगनीवाला गांव में पिछले कुछ समय से इस गुलदार की लगातार चहलकदमी देखी जा रही थी। ग्रामीण खेतों में काम करने जाने से कतराने लगे थे।
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खौफ का यह माहौल तब एक भयानक त्रासदी में बदल गया, जब इस आदमखोर गुलदार ने गांव के ही एक मासूम बच्चे पर अचानक हमला बोल दिया। बच्चा अपने घर के आस-पास ही मौजूद था, जब घात लगाए बैठे गुलदार ने उसे अपना शिकार बना लिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद मासूम की दर्दनाक मौत हो गई थी। बच्चे की मौत से पूरे गांव में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और ग्रामीणों में वन विभाग तथा स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भारी गुस्सा पनपने लगा था।
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वन विभाग का मेगा ऑपरेशन: कड़ी मशक्कत के बाद बिछाया गया जाल
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मासूम की जान जाने और ग्रामीणों के बढ़ते उग्र विरोध को देखते हुए बिजनौर वन विभाग (Forest Department) पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर तत्काल एक विशेष रेस्क्यू टीम का गठन किया गया।
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रणनीति और पिंजरे की तैनाती: वन विभाग की टीम ने गुलदार के पैरों के निशान (पगमार्क) को ट्रैक किया और उसकी आवाजाही वाले संभावित रास्तों की पहचान की। गन्ने के खेतों और गांव के बाहरी छोर पर विशेष रूप से तैयार किए गए मजबूत लोहे के पिंजरे लगाए गए।
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चारा और इंतजार: गुलदार को पिंजरे की ओर आकर्षित करने के लिए उसमें चारा (बकरी/मांस) रखा गया। वन विभाग के कर्मचारी रात-दिन अपनी जान जोखिम में डालकर इलाके की निगरानी कर रहे थे।
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सफलता का क्षण: कई दिनों की इस लुका-छिपी और थका देने वाली मेहनत के बाद, आखिरकार बीती रात भूख से तड़पता हुआ यह खूंखार गुलदार चारे के लालच में पिंजरे के अंदर दाखिल हो गया। जैसे ही उसने चारे को खींचा, पिंजरे का दरवाजा झटके से बंद हो गया और आदमखोर उसमें कैद हो गया।
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सुबह होते ही जब गुलदार की दहाड़ पिंजरे से गूंजी, तो ग्रामीणों की भीड़ मौके पर उमड़ पड़ी। वन विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर पिंजरे को तिरपाल से ढका और सुरक्षित रूप से गुलदार को वहां से रेस्क्यू कर अपने साथ ले गई। बताया जा रहा है कि नियमानुसार इस गुलदार का मेडिकल चेकअप कराने के बाद इसे किसी दूरस्थ जंगल या चिड़ियाघर (ZOO) में शिफ्ट किया जाएगा।
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ग्रामीणों ने ली राहत की सांस, लेकिन दर्द अभी भी बाकी है
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गुलदार के पकड़े जाने के बाद सिंगनीवाला और आस-पास के दर्जनों गांवों के किसानों और मजदूरों ने राहत की सांस ली है। जो किसान डर के मारे अपने गन्ने के खेतों में सिंचाई करने या चारा लेने नहीं जा पा रहे थे, वे अब धीरे-धीरे अपने काम पर लौटने की हिम्मत जुटा रहे हैं।
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हालांकि, राहत की इस भावना के बीच उस मासूम बच्चे के परिवार का दर्द और चीखें हर किसी की आंखों को नम कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि "भले ही आज यह आदमखोर पकड़ा गया हो, लेकिन जिस परिवार का चिराग बुझ गया, उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता।"
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भाकियू लोकशक्ति का कड़ा रुख: "कार्रवाई सराहनीय, लेकिन पीड़ित परिवार को मिले मुआवजा"
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इस संवेदनशील मामले में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) लोकशक्ति के पदाधिकारियों ने अहम भूमिका निभाई है। संगठन के नेताओं ने गुलदार के पकड़े जाने पर वन विभाग की टीम और उनके अथक प्रयासों की सार्वजनिक रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने अपनी जान पर खेलकर ग्रामीणों को एक बड़े खतरे से निजात दिलाई है।
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लेकिन, संगठन ने शासन-प्रशासन के सामने एक बेहद अहम और जायज मांग रखी है। भाकियू लोकशक्ति के पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है:
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आर्थिक मुआवजा: मासूम बच्चे की जान जाना प्रशासन की भी कहीं न कहीं चूक है, क्योंकि वन्यजीवों को रिहायशी इलाकों में आने से रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। इसलिए, उत्तर प्रदेश सरकार और वन विभाग तत्काल प्रभाव से पीड़ित परिवार को एक बड़ी आर्थिक सहायता (मुआवजा) राशि प्रदान करे, ताकि उस गरीब परिवार को जीवन यापन में सहारा मिल सके।
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स्थाई समाधान: बिजनौर में यह कोई पहला मामला नहीं है। संगठन ने मांग की है कि गन्ने के खेतों के आस-पास नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और वन्यजीवों को जंगल की सीमा में ही रोके रखने के लिए तारबाड़ या अन्य वैज्ञानिक उपाय किए जाएं।
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मुआवजे में देरी पर आंदोलन की चेतावनी: संगठन ने चेतावनी भी दी है कि यदि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द सरकारी सहायता और उचित मुआवजा नहीं मिला, तो भाकियू लोकशक्ति सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी।
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बिजनौर के सिंगनीवाला में गुलदार का पकड़ा जाना वन विभाग की एक बड़ी कामयाबी है और ग्रामीणों के लिए एक बड़ा सुकून। लेकिन यह घटना इंसान और वन्यजीवों के बीच लगातार बढ़ते संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) के उस खौफनाक सच को भी उजागर करती है, जिसका दंश बिजनौर के किसानों को हर दिन झेलना पड़ता है। अब देखना यह है कि प्रशासन भाकियू लोकशक्ति की मांग पर कितनी जल्दी अमल करते हुए पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने का काम करता है।
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(बिजनौर, धामपुर और पश्चिमी यूपी की हर छोटी-बड़ी और प्रामाणिक खबर सबसे पहले पढ़ने के लिए जुड़े रहें खबरीलाल न्यूज़ पोर्टल के साथ।)
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