रिपोर्टर: शकील अहमद
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स्थान: बिजनौर, उत्तर प्रदेश
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बिजनौर जिले के ग्रामीण अंचलों में पिछले काफी समय से जंगली जानवरों, विशेषकर गुलदार (Leopard) की दहशत ने आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रखा है। किसानों का खेतों में जाना दूभर हो गया था और बच्चों का घर से बाहर निकलना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं था। लेकिन अब बिजनौर के ग्राम रहाटा बिल्लोच और उसके आसपास के इलाकों के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की मांग और लगातार बढ़ती दहशत के बीच एक खूंखार गुलदार को पिंजरे में कैद करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है और लोगों ने चैन की सांस ली है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन दर्शाता है कि प्रशासन और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से किसी भी बड़े खतरे को टाला जा सकता है।
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सोमवार की मनहूस सुबह: किसान जाहिद कुरैशी पर हुआ अचानक हमला

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इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत सोमवार की सुबह से हुई। बिजनौर जिले के ग्राम रहाटा बिल्लोच के निवासी और एक मेहनतकश किसान जाहिद कुरैशी अपने रोजमर्रा के कामों को निपटाने के लिए सुबह-सुबह अपने खेतों की ओर गए थे। जाहिद कुरैशी अपने खेत में कृषि कार्य में व्यस्त थे और उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि मौत उनके कितने करीब घात लगाए बैठी है। गन्ने के घने खेतों और झाड़ियों की ओट में छिपे एक खूंखार गुलदार ने अचानक जाहिद कुरैशी पर जानलेवा हमला कर दिया।
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यह हमला इतना अचानक और भीषण था कि किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला। गुलदार ने जाहिद को अपना शिकार बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन किसान ने हिम्मत नहीं हारी। उनके शोर मचाने और अदम्य साहस दिखाने के कारण गुलदार थोड़ा घबरा गया। जाहिद कुरैशी की चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे अन्य किसान और ग्रामीण अपने हाथों में लाठी-डंडे और फावड़े लेकर तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। भारी भीड़ को अपनी तरफ आता देख और शोर-शराबा सुनकर गुलदार किसान को छोड़कर गन्ने के घने खेतों में छिप गया। इस जानलेवा हमले में किसान जाहिद कुरैशी बाल-बाल बच गए, लेकिन घटना ने पूरे गांव में दहशत का ऐसा माहौल पैदा कर दिया कि लोगों ने अपने खेतों की तरफ जाना ही बंद कर दिया।
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ग्रामीणों का आक्रोश और वन विभाग से तत्काल सुरक्षा की गुहार

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इस हमले की खबर जंगल की आग की तरह पूरे ग्राम रहाटा बिल्लोच और आसपास के गांवों में फैल गई। घटना के तुरंत बाद भारी संख्या में डरे हुए और आक्रोशित ग्रामीण इकट्ठा हो गए। किसानों का कहना था कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की आवाजाही देखी जा रही थी, जिससे हर समय जान का खतरा बना रहता है। डरे हुए ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) के अधिकारियों को इस पूरी घटना की सूचना दी। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग थी कि अगर जल्द से जल्द इस खूंखार जानवर को नहीं पकड़ा गया, तो उनका खेती करना और घर से निकलना असंभव हो जाएगा।
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वन विभाग की त्वरित कार्रवाई: रणनीति और जाल बिछाना
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मामले की संवेदनशीलता और ग्रामीणों के भारी दबाव को देखते हुए वन विभाग की टीम ने जरा भी देरी नहीं की। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर वन रक्षकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम तत्काल ग्राम रहाटा बिल्लोच पहुंची। टीम ने सबसे पहले घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया, गुलदार के पगमार्क (पैरों के निशान) तलाशे और यह समझने की कोशिश की कि गुलदार किस दिशा में भागा है और उसका संभावित ठिकाना कहां हो सकता है।
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ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह तय किया गया कि गुलदार को पकड़ने के लिए उसी खेत के पास एक मजबूत जाल और पिंजरा बिछाया जाएगा, जहां उसने किसान जाहिद पर हमला किया था। वन विभाग की टीम ने पूरी सावधानी बरतते हुए एक विशेष पिंजरा मंगवाया। पिंजरे को गन्ने के खेत के किनारे एक ऐसी जगह पर लगाया गया, जहां गुलदार के दोबारा आने की सबसे अधिक संभावना थी। पिंजरे के अंदर गुलदार को आकर्षित करने के लिए मांस का चारा (Bait) रखा गया। इसके साथ ही, वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी कि रात के समय कोई भी व्यक्ति उस पिंजरे के आसपास न जाए और अपने घरों में ही सुरक्षित रहे।
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रात का सन्नाटा और सुबह पिंजरे में दहाड़ता गुलदार

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रात भर गांव में अजीब सी खामोशी और डर का माहौल रहा। हर ग्रामीण को बस इसी बात का इंतजार था कि क्या यह आदमखोर जानवर पिंजरे में फंसेगा। आखिरकार, मंगलवार की सुबह जब सूरज की किरणें फूटीं, तो गांव वालों के लिए एक बड़ी कामयाबी लेकर आईं। सुबह-सुबह जब कुछ साहसी ग्रामीण और वन विभाग की टीम पिंजरे की स्थिति देखने के लिए खेत की ओर गए, तो उन्होंने देखा कि पिंजरे का भारी-भरकम दरवाजा बंद हो चुका है।
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जैसे ही टीम पिंजरे के करीब पहुंची, अंदर से गुलदार की तेज और खूंखार दहाड़ सुनाई दी। वन विभाग की रणनीति पूरी तरह से सफल रही थी। वह जानवर, जिसने पूरे इलाके की नींद हराम कर रखी थी और जो एक किसान की जान लेने पर उतारू था, अब लोहे की सलाखों के पीछे कैद था।
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गांव में जश्न का माहौल और सुरक्षित जंगलों में वापसी

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गुलदार के पकड़े जाने की खबर मिलते ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। देखते ही देखते पिंजरे के पास ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर कोई उस खूंखार जानवर को देखना चाहता था। वन विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए भीड़ को नियंत्रित किया और पूरी सुरक्षा के बीच पिंजरे को अपने विभागीय वाहन में लोड किया। वन अधिकारियों ने मीडिया और ग्रामीणों को जानकारी देते हुए बताया कि इस पकड़े गए गुलदार को आबादी वाले क्षेत्र से बहुत दूर, किसी घने और सुरक्षित वन अभयारण्य में छोड़ दिया जाएगा, ताकि यह दोबारा किसी रिहायशी इलाके में भटककर न आ सके।
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बिजनौर में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) का बढ़ता खतरा

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गौरतलब है कि बिजनौर जिले का एक बड़ा भौगोलिक हिस्सा जंगलों और गंगा खादर क्षेत्र से लगा हुआ है। इसके अलावा, गन्ने की सघन खेती भी जंगली जानवरों, विशेषकर गुलदार और हाथियों के लिए एक आदर्श छिपने की जगह बन जाती है। गन्ने के खेत उन्हें जंगल जैसा ही सुरक्षित माहौल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। वन विभाग लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन किसानों की मजबूरी है कि उन्हें अपनी आजीविका के लिए खेतों में जाना ही पड़ता है।
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ग्राम रहाटा बिल्लोच में हुई यह घटना इस बात का प्रमाण है कि अगर समय रहते सही कदम उठाए जाएं और प्रशासन मुस्तैद रहे, तो बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है। किसान जाहिद कुरैशी की जान बचना और वन विभाग द्वारा तत्परता दिखाते हुए गुलदार को महज कुछ ही घंटों में पकड़ लेना, दोनों ही बातें राहत देने वाली हैं। वन विभाग ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी बिजनौर के सभी ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों से अपील की है कि वे अकेले खेतों में न जाएं, हमेशा समूह में काम करें, और खेतों में जाते समय शोर करते रहें या अपने मोबाइल/रेडियो पर तेज आवाज में संगीत बजाएं, ताकि जंगली जानवर इंसानी आहट पाकर खुद ही दूर चले जाएं।
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फिलहाल, रहाटा बिल्लोच गांव के लोग अब चैन की नींद सो सकेंगे, क्योंकि उनके सिर पर मंडरा रहा मौत का साया अब हमेशा के लिए दूर जा चुका है।
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