बिजनौर के नजीबाबाद में कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने कसी कमर। मोटा महादेव मंदिर से कोटावाली पुल तक जंगली रास्तों पर गुलदार से बचाव के लिए ड्रोन और AI कैमरों से
Published at : 01 Aug 2026, 12:15 PM
Updated at : 10 Sep 2026, 03:49 PM
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Bijnor Kanwar Yatra Drone AI Camera Surveillance Leopard Security
बिजनौर (विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): पवित्र श्रावण मास में कांवड़ यात्रा आस्था, श्रद्धा और समर्पण का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है। हर साल लाखों शिवभक्त (कांवड़िये) गंगा जल लेने के लिए हरिद्वार की ओर कूच करते हैं। इस यात्रा मार्ग में उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला एक बेहद अहम पड़ाव है। लेकिन, बिजनौर का यह मार्ग जितना प्राकृतिक सौंदर्य से भरा है, उतना ही खतरनाक भी है, क्योंकि हरिद्वार जाने वाला मुख्य राजमार्ग घने जंगलों के बीच से होकर गुज़रता है। इन जंगलों में 'गुलदार' (Leopard) और अन्य जंगली जानवरों का भारी आतंक रहता है।READ ALSO:-ज्ञान और तर्क के महासंग्राम में पिथौरागढ़ की शानदार जीत: आर्मी पब्लिक स्कूल मेरठ में 'सेंट्रल कमांड नॉलेज कॉन्क्लेव 2026' का भव्य आयोजन
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इसी खतरे को देखते हुए और कांवड़ियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए, इस बार बिजनौर पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के अभूतपूर्व और हाई-टेक इंतज़ाम किए हैं। प्रशासन ने कांवड़ यात्रा की निगरानी के लिए पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़ते हुए ड्रोन कैमरे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैमरों का व्यापक जाल बिछा दिया है, ताकि शिवभक्त बिना किसी भय के अपनी यात्रा पूरी कर सकें।
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@Shakeel57767846 बिजनौर के नजीबाबाद में कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने कसी कमर। मोटा महादेव मंदिर से कोटावाली पुल तक जंगली रास्तों पर गुलदार से बचाव के लिए ड्रोन और AI कैमरों से हो रही है 24 घंटे निगरानी। पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट। pic.twitter.com/U7JpMPgTkQ
बिजनौर जिले का वन क्षेत्र जंगली जानवरों, विशेषकर गुलदार (तेंदुए) के लिए जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में बिजनौर और उसके आस-पास के ग्रामीण एवं जंगली इलाकों में गुलदार के हमलों की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। चूंकि कांवड़िये दिन-रात पैदल यात्रा करते हैं और कई बार थकावट मिटाने के लिए सड़क किनारे या पेड़ों के नीचे विश्राम करते हैं, ऐसे में जंगली जानवरों के हमले का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इस गंभीर खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने इस साल 'जीरो टॉलरेंस और जीरो इंसिडेंट' की नीति अपनाई है। शिवभक्तों को गुलदार से बचाने के लिए जंगलों में लगातार ड्रोन कैमरे उड़वाए जा रहे हैं। ये ड्रोन घने पेड़ों के ऊपर से उड़ान भरते हैं और अपने उच्च-रिज़ॉल्यूशन लेंस और थर्मल इमेजिंग सेंसर के जरिए जंगल के भीतर छिपे जानवरों की गतिविधि को बहुत पहले ही भांप लेते हैं। यदि कोई जंगली जानवर सड़क की ओर बढ़ता हुआ दिखाई देता है, तो कंट्रोल रूम तुरंत सक्रिय हो जाता है और उस क्षेत्र में गश्त कर रही पुलिस एवं वन विभाग की टीम को अलर्ट कर देता है।
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मोटा महादेव मंदिर से कोटावाली पुल तक का संवेदनशील स्ट्रेच
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थाना नजीबाबाद के अंतर्गत आने वाला हरिद्वार मार्ग कांवड़ियों के लिए सबसे प्रमुख मार्गों में से एक है। इस मार्ग पर मोटा महादेव मंदिर से लेकर कोटावाली पुल तक का हिस्सा सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है। यह पूरा इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है और यहाँ रात के समय घना अंधेरा और सन्नाटा पसरा रहता है।
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प्रशासन ने इसी विशेष स्ट्रेच (Mota Mahadev to Kotawali Pul) को सुरक्षा के लिहाज से सबसे अधिक प्राथमिकता दी है।
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ड्रोन पेट्रोलिंग: इस पूरे स्ट्रेच पर हर एक घंटे में ड्रोन से पेट्रोलिंग की जा रही है। विशेषकर सुबह तड़के और रात के समय ड्रोन की उड़ानें बढ़ा दी गई हैं।
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AI कैमरों का नेटवर्क: पूरे मार्ग पर जगह-जगह आधुनिक AI आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे सिर्फ रिकॉर्डिंग नहीं करते, बल्कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अचानक होने वाली भगदड़, या जंगल से सड़क की ओर आने वाले बड़े जानवरों की आकृति को पहचान कर सीधे पुलिस कंट्रोल रूम में अलार्म भेजते हैं।
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सुरक्षा व्यवस्था की मुख्य झलकियाँ (Key Highlights)
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बिजनौर प्रशासन द्वारा लागू की गई इस हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
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सुरक्षा का माध्यम
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उपयोग और विशेषता
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लाभ / प्रभाव
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ड्रोन कैमरे (Drone Cameras)
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जंगल के ऊपर हवाई निगरानी, थर्मल इमेजिंग।
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गुलदार व अन्य जानवरों की पूर्व सूचना, दुर्गम स्थानों की निगरानी।
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AI सीसीटीवी (AI CCTV)
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मार्ग पर भीड़ नियंत्रण, फेशियल रिकग्निशन, मोशन डिटेक्शन।
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संदिग्ध तत्वों की पहचान, भगदड़ या दुर्घटना पर तुरंत रिस्पांस।
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वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम
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ट्रैंकुलाइज़र गन और जाल के साथ 24 घंटे तैनाती।
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जानवर के सड़क पर आने की स्थिति में तुरंत रेस्क्यू और बचाव।
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पुलिस पिकेट और सायरन
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हर कुछ किलोमीटर पर पुलिस की गाड़ियां और लाउडस्पीकर।
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सायरन की आवाज़ से जानवरों को दूर रखना और भक्तों का मनोबल बढ़ाना।
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पुलिस और प्रशासन का संकल्प: 'सुरक्षित कांवड़, सुगम कांवड़'
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थाना नजीबाबाद पुलिस और उच्चाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि शिवभक्तों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) के बीच बेहतरीन समन्वय (Coordination) स्थापित किया गया है। एक संयुक्त कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है जहाँ 24 घंटे बड़ी स्क्रीन्स पर पूरे मार्ग की लाइव फीड (Live Feed) देखी जा रही है।
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अधिकारियों के अनुसार, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैमरों की मदद से हमें भीड़ के घनत्व (Crowd Density) का भी पता चल रहा है। अगर किसी जगह पर कांवड़ियों की भीड़ ज्यादा इकट्ठी हो रही है, तो हम तुरंत ट्रैफिक को डायवर्ट कर सकते हैं। इसके अलावा, जंगली रास्तों पर ड्रोन की आवाज़ और उसकी चमकती लाइटों से भी जंगली जानवर सड़क से दूर रहते हैं, जो अपने आप में एक बचाव का तरीका है।"
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भक्तों में उत्साह और प्रशासन के प्रति आभार
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प्रशासन की इस अभूतपूर्व और हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था को देखकर कांवड़ियों में भारी उत्साह और सुरक्षा की भावना है। दूर-दराज के राज्यों से पैदल चलकर आ रहे शिवभक्तों का कहना है कि जब वे आसमान में ड्रोन को मंडराते हुए और चप्पे-चप्पे पर पुलिस को मुस्तैद देखते हैं, तो उनका डर पूरी तरह से खत्म हो जाता है।
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हरिद्वार से जल लेकर लौट रहे एक कांवड़िये ने कहा, "जंगल का रास्ता होने के कारण रात में बहुत डर लगता था, खासकर गुलदार की खबरें सुनकर। लेकिन इस बार जिस तरह से पुलिस कैमरे और ड्रोन से निगरानी कर रही है, हम बेफिक्र होकर 'बम-बम भोले' के जयकारे लगाते हुए अपनी यात्रा कर रहे हैं।"
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बिजनौर प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम यह साबित करता है कि आस्था के इस महापर्व में प्रौद्योगिकी (Technology) का सही उपयोग किस प्रकार श्रद्धालुओं के लिए वरदान साबित हो सकता है। ड्रोन और AI कैमरों की इस पहल ने न केवल 'गुलदार' के खतरे को कम किया है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के सुरक्षा प्रबंधन (Security Management) के लिए एक नई और उत्कृष्ट मिसाल भी कायम की है। नजीबाबाद-हरिद्वार मार्ग पर शिवभक्तों की यह सुरक्षित और निर्बाध यात्रा पुलिस की इसी मुस्तैदी और तकनीकी दूरदर्शिता का सुखद परिणाम है।
Sabse pehle comment karne wale banein.