बिजनौर: शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है, लेकिन शारीरिक रूप से अक्षम या दिव्यांग बच्चों, विशेषकर छात्राओं के लिए घर से स्कूल या कॉलेज तक का सफर अक्सर एक बड़ी चुनौती बन जाता है। परिवहन की कमी और शारीरिक सीमाओं के कारण कई होनहार छात्राएं अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। इसी गंभीर समस्या को दूर करने और दिव्यांग छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार एक बेहद कल्याणकारी योजना चला रही है।READ ALSO:-"शरीर को मंदिर बनाओ, नशे का घर नहीं..." लोहे की मोटी जंजीरों से 'जिम वाली कांवड़' खींच रहे दिल्ली पुलिस के सिपाही, रास्ते में युवाओं से लगवा रहे पुशअप्स
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इस योजना को बिजनौर जिले में शत-प्रतिशत धरातल पर उतारने के लिए जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर ने एक सराहनीय पहल की है। डीएम जसजीत कौर ने जानकारी देते हुए बताया कि 'दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश' के तत्वावधान में विद्यालय जाने वाली और विभिन्न शिक्षण/प्रशिक्षण संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर रही दिव्यांग छात्राओं को निःशुल्क ई-ट्राईसाइकिल (मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल) उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए जिले के सभी विकास खंड (ब्लॉक) मुख्यालयों पर विशेष चिन्हांकन शिविर (Identification Camps) लगाए जाएंगे, जहां पात्र छात्राओं का मौके पर ही रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
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शिविर का मुख्य उद्देश्य और लक्षित समूह

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इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिजनौर जिले की कोई भी पात्र और जरूरतमंद दिव्यांग छात्रा इस सरकारी योजना के लाभ से वंचित न रह जाए। अक्सर जानकारी के अभाव या सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की असमर्थता के कारण कई दिव्यांग जन योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। इसलिए, प्रशासन अब खुद उनके ब्लॉक स्तर तक पहुंच रहा है।
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यह योजना विशेष रूप से उन छात्राओं के लिए है, जिनकी आयु 16 वर्ष या उससे अधिक है और जो वर्तमान में किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय, कॉलेज, या प्रशिक्षण संस्थान (जैसे ITI, पॉलिटेक्निक आदि) में नियमित रूप से अध्ययनरत हैं। ई-ट्राईसाइकिल मिलने से इन छात्राओं का न केवल शारीरिक परिश्रम बचेगा, बल्कि उनके समय की भी बचत होगी, जिसका उपयोग वे अपनी पढ़ाई में कर सकेंगी।
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शिविरों का समय और विकास खंडवार तिथियां

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जिलाधिकारी जसजीत कौर ने बताया कि जनपद के सभी विकास खंड मुख्यालयों पर इन शिविरों का आयोजन प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक किया जाएगा। प्रशासन ने इसके लिए एक विस्तृत रोस्टर तैयार किया है ताकि हर ब्लॉक को कवर किया जा सके।
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शिविरों का विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है:

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    01 अगस्त 2026: विकास खंड किरतपुर (Kiratpur)
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    04 अगस्त 2026: विकास खंड नजीबाबाद (Najibabad)
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    05 अगस्त 2026: विकास खंड स्योहारा (Seohara)
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    06 अगस्त 2026: विकास खंड हल्दौर (Haldaur)
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    07 अगस्त 2026: विकास खंड अफजलगढ़ (Afzalgarh)
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    11 अगस्त 2026: विकास खंड अल्हैपुर (Alhepur)
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    12 अगस्त 2026: विकास खंड नूरपुर (Nurpur)
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    13 अगस्त 2026: विकास खंड कोतवाली (Kotwali)
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    14 अगस्त 2026: विकास खंड जलीलपुर (Jalilpur)
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    18 अगस्त 2026: विकास खंड नहटौर (Nehtaur)
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    19 अगस्त 2026: विकास खंड मोहम्मदपुर देवमल (Mohammedpur Deomal)
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पात्र छात्राएं और उनके अभिभावक अपने-अपने संबंधित विकास खंड की निर्धारित तिथि पर पहुंचकर शिविर का लाभ उठा सकते हैं।
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आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Eligibility & Documents)

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योजना का लाभ प्राप्त करने और शिविर में सफलतापूर्वक ऑनलाइन आवेदन करने के लिए छात्राओं को कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने साथ लाना अनिवार्य है। प्रशासन ने अपील की है कि शिविर में आने से पहले सभी दस्तावेजों की मूल प्रति और उनकी छायाप्रति (Photocopy) जरूर तैयार कर लें:
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    आय प्रमाण-पत्र (Income Certificate): परिवार की वार्षिक आय का नवीनतम प्रमाण-पत्र।
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    मूल निवास प्रमाण-पत्र (Domicile Certificate): उत्तर प्रदेश/बिजनौर के निवासी होने का साक्ष्य।
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  5. \r\n
    आधार कार्ड (Aadhaar Card): पहचान और पते के सत्यापन के लिए आधार कार्ड की छायाप्रति।
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  7. \r\n
    यूडीआईडी कार्ड / दिव्यांग प्रमाण-पत्र (UDID/Disability Certificate): मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा जारी किया गया दिव्यांगता प्रमाण-पत्र या यूडीआईडी कार्ड।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    पासपोर्ट साइज फोटो: आवेदिका के 2 नवीन (हाल ही में खींचे गए) पासपोर्ट आकार के फोटोग्राफ।
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  10. \r\n
  11. \r\n
    मोबाइल नंबर: आवेदन प्रक्रिया में ओटीपी (OTP) और भविष्य में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक चालू मोबाइल नंबर।
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  12. \r\n
  13. \r\n
    शिक्षण संस्थान का प्रमाण-पत्र: यह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। आवेदिका जिस भी स्कूल, कॉलेज या संस्थान में पढ़ रही है, वहां के प्रधानाचार्य/संस्था प्रमुख द्वारा जारी किया गया प्रमाण-पत्र (जिसमें यह स्पष्ट हो कि छात्रा वर्तमान में वहां अध्ययनरत/प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है)।
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अधिकारियों को डीएम के सख्त निर्देश: कोई कोताही न हो

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इस योजना को लेकर जिलाधिकारी जसजीत कौर का रुख बेहद सख्त और स्पष्ट है। उन्होंने जिले के सभी संबंधित आला अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। डीएम ने सभी उपजिलाधिकारियों (SDMs), खंड विकास अधिकारियों (BDOs), अधिशासी अधिकारियों, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला समन्वयक समेकित शिक्षा और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को कड़े निर्देश दिए हैं।
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उन्होंने स्पष्ट किया है कि इन शिविरों का आयोजन पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ होना चाहिए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक पात्र दिव्यांग छात्राओं की उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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शिविरों में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था: दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी शिविर स्थलों पर छाया, बैठने की समुचित व्यवस्था (कुर्सियां/बेंच), स्वच्छ पेयजल (पीने का पानी), आवश्यक फर्नीचर और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। चूंकि दिव्यांग छात्राओं को आने-जाने में परेशानी होती है, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें शिविर में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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व्यापक प्रचार-प्रसार की अपील

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अंत में, जिलाधिकारी जसजीत कौर ने जनपद बिजनौर की समस्त पात्र दिव्यांग छात्राओं और उनके अभिभावकों से भावपूर्ण अपील की है कि वे निर्धारित तिथियों और स्थानों पर आयोजित होने वाले इन चिन्हांकन शिविरों में जरूर उपस्थित हों और शासन की इस बेहतरीन योजना का लाभ उठाएं।
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इसके साथ ही, उन्होंने ग्राम पंचायतों के प्रधानों, पंचायत सचिवों, विद्यालयों के शिक्षकों और नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों से भी आह्वान किया है कि वे अपने स्तर पर गांव-गांव और मोहल्लों में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार (Publicity) करें। मुनादी कराएं या बैठकों के माध्यम से लोगों को जागरूक करें ताकि कोई भी पात्र और जरूरतमंद दिव्यांग बेटी ई-ट्राईसाइकिल पाने से महरूम न रह जाए।
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खबरीलाल भी बिजनौर के सभी नागरिकों से यह आग्रह करता है कि यदि आपके आस-पास कोई ऐसी दिव्यांग छात्रा है जो 16 वर्ष से ऊपर है और पढ़ाई कर रही है, तो उस तक यह खबर जरूर पहुंचाएं। आपकी एक छोटी सी मदद किसी बेटी के भविष्य की उड़ान को नए पंख दे सकती है।
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