उत्तर प्रदेश में मिलावटखोरों पर नकेल कसने की तैयारी तेज हो गई है। इसी कड़ी में बिजनौर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम एक्शन में आ गई है। जिले के अलग-अलग इलाकों से खाद्य पदार्थों के कई संदिग्ध नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।READ ALSO:-रक्षक की वर्दी में छिपा था भेड़िया: 'तुम बेहद खूबसूरत हो, पत्नी को छोड़ दूंगा...' कहकर दरोगा ने एक साल तक किया महिला का शारीरिक शोषण, 8 लाख के जेवर भी लूटे
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जिलाधिकारी के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई

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कार्यालय आयुक्त खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन (लखनऊ) के आदेश और जिलाधिकारी बिजनौर के निर्देशानुसार यह अहम कदम उठाया गया है। जिले में निर्धारित साप्ताहिक कार्रवाई के क्रम में यह विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
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बिजनौर में खाद्य सुरक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य आम जनता को पूरी तरह से शुद्ध खाद्य और पेय पदार्थ उपलब्ध कराना है। इस बड़े अभियान के तहत जिले भर की निर्माणशालाओं और खाद्य सामग्री की दुकानों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है।
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जिले की पांच तहसीलों में हुई सघन चेकिंग

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मिलावटखोरी रोकने के लिए विभागीय टीम ने जिले की पांच प्रमुख तहसीलों में एक साथ चेकिंग अभियान चलाया। इन क्षेत्रों में सदर तहसील बिजनौर, नगीना, चाँदपुर, नजीबाबाद और धामपुर तहसील मुख्य रूप से शामिल हैं।
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इन तहसीलों में मुख्य रूप से मसालों, अचार, सॉस और मुरब्बा बनाने वाली फैक्ट्रियों की गहन जांच की गई। इसके अलावा थोक और फुटकर दुकानों पर भी टीम ने छापेमारी कर उत्पादों की गुणवत्ता को बारीकी से परखा।
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मसालों और पानी सहित कुल 16 नमूने लिए गए

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निरीक्षण के दौरान टीम ने संदिग्ध प्रतीत होने वाली खाद्य सामग्रियों के नमूने एकत्र किए। इनमें रेड चिली सॉस का एक, ग्रीन चिली सॉस का एक और टोमटो कैचअप के दो नमूने शामिल हैं।
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इसके साथ ही मिक्स अचार का एक, ग्रीन चिली पिकल का एक, लाल मिर्च पाउडर के दो, धनिया पाउडर के दो और हल्दी पाउडर के दो नमूने लिए गए। टीम ने पैकेज़्ड ड्रिंकिंग वाटर (बोतलबंद पानी) के भी चार नमूने भरे हैं। इस तरह कार्रवाई में कुल 16 नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए हैं।
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राजकीय खाद्य प्रयोगशाला में होगी सटीक जांच

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अभियान के दौरान लिए गए सभी 16 नमूनों को नियमों के तहत सील कर दिया गया है। इन सभी नमूनों को वैज्ञानिक और सटीक जांच के लिए राजकीय खाद्य प्रयोगशाला में भेज दिया गया है।
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प्रयोगशाला की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही खाद्य पदार्थों की असली गुणवत्ता का पता चल सकेगा। बिजनौर में खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जांच रिपोर्ट में यदि कोई भी खाद्य पदार्थ मिलावटी या अधोमानक पाया जाता है, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है मिलावटी खाना

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बाजार में बिकने वाले मिलावटी मसाले और केमिकल युक्त सॉस आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम रंग और अशुद्धियां पेट और लीवर की गंभीर बीमारियों का कारण बनती हैं।
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इसीलिए खाद्य पदार्थों की समय-समय पर गुणवत्ता जांच बहुत जरूरी है। लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाने की दिशा में विभाग द्वारा उठाया गया यह कदम बेहद अहम और जरूरी है।
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अभियान में शामिल रही पूरी खाद्य सुरक्षा टीम

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इस व्यापक जांच अभियान को सफल बनाने में विभागीय अधिकारियों ने पूरी मुस्तैदी दिखाई। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व जिले के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री राम अशीष मौर्य ने किया।
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उनके साथ पूरी टीम सक्रिय और मुस्तैद रही। टीम के सदस्यों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री राजीव कुमार, श्री शम्भू दयाल, श्री डी.के. वर्मा, श्री अनिल कुमार, श्री नरेश कुमार, श्री अमित सिंह और श्रीमती रेनु सिंह शामिल रहे। अधिकारियों ने बताया कि जिले में यह चेकिंग अभियान आगे भी सतत जारी रहेगा।
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आम नागरिकों के लिए भी जागरूकता बेहद जरूरी

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खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की जागरूकता भी बेहद जरूरी है। खरीदारी करते समय ग्राहकों को हमेशा लाइसेंस प्राप्त और विश्वसनीय दुकानों से ही सामान खरीदना चाहिए।
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इसके अलावा, डिब्बाबंद सामग्री खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट और एफएसएसएआई (FSSAI) का मानक मार्क जरूर चेक करना चाहिए। जन जागरूकता से ही बिजनौर में खाद्य सुरक्षा के इस बड़े अभियान को पूरी तरह से सफल और प्रभावी बनाया जा सकता है।
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निष्कर्ष के तौर पर, बिजनौर में खाद्य सुरक्षा विभाग का यह अभियान मिलावटखोरों के खिलाफ एक बहुत कड़ा संदेश है। प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की इस निरंतर सक्रियता से बाजार में खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित होगी। आम जनता को भी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ की बिक्री की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए।
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