बिजनौर (खबरीलाल न्यूज़ डेस्क):
\r\n\r\nबरसात के मौसम में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन इस दौरान अक्सर सोशल मीडिया और कुछ असत्यापित मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी खबरें फैलने लगती हैं, जो आम जनता में दहशत का माहौल पैदा कर देती हैं। हाल ही में बिजनौर बैराज (Bijnor Barrage) को लेकर भी कुछ ऐसी ही सनसनीखेज खबरें फैलाई गईं, जिनमें दावा किया गया कि बैराज का तटबंध टूट गया है और 100 मीटर लंबे कंक्रीट ब्लॉक गंगा नदी में समा गए हैं।
\r\n\r\nइन भ्रामक और डराने वाली खबरों का संज्ञान लेते हुए बिजनौर सिंचाई विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने आधिकारिक रूप से इन दावों का खंडन करते हुए इन्हें पूरी तरह से "असत्य, भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत" करार दिया है। सिंचाई विभाग ने जनहित में एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है, ताकि इलाके के लोगों में फैल रहे डर को दूर किया जा सके।
\r\n\r\nआइये, खबरीलाल की इस रिपोर्ट में समझते हैं कि आखिर बैराज पर क्या हो रहा है और सिंचाई विभाग ने क्या सफाई दी है।
\r\n\r\nक्या थी भ्रामक खबर?
\r\n\r\nपिछले कुछ दिनों से कुछ स्थानीय मीडिया पोर्टल्स और सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि गंगा के तेज बहाव के कारण बिजनौर बैराज का तटबंध (Embankment) क्षतिग्रस्त हो गया है। इन खबरों में यह भी कहा गया कि सुरक्षा के लिए लगाए गए 100 मीटर के कंक्रीट ब्लॉक पानी में बह गए हैं, जिससे आसपास के इलाकों में बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इन अफवाहों ने नदी के किनारे बसे गांवों के लोगों की नींद उड़ा दी थी।
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\r\n\r\nसिंचाई विभाग ने बताया सच: यह हादसा नहीं, आधुनिक तकनीक का 'फंक्शन' है
\r\n\r\nइन अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए, कार्यालय अधिशासी अभियंता, मध्य गंगा नहर निर्माण खंड 5 (सिंचाई विभाग, बिजनौर) ने घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है।
\r\n\r\nविभाग के अनुसार, गंगा नदी के बाएं तटबंध को मजबूत करने और कटान से बचाने के लिए लगभग एक किलोमीटर की लंबाई में एक बेहद आधुनिक और प्रभावी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक का नाम 'एसीबीएम' (ACBM - Articulating Concrete Base Mattress) है।
\r\n\r\nअधिशासी अभियंता ने इस तकनीक की कार्यप्रणाली (Technical Function) को विस्तार से समझाते हुए बताया:
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- \r\n तटबंध के स्लोप (ढलान) पर 8 से 10 मीटर तक और उसके आगे 24 से 26 मीटर तक नदी के तल (Apron) में एसीबीएम (कंक्रीट का एक विशेष जाल) बिछाई गई है।\r\n \r\n
- \r\n एप्रन के रूप में बिछाई गई इस एसीबीएम का मुख्य तकनीकी कार्य ही यह है कि जब नदी का तेज बहाव या धारा तटबंध की ओर प्रहार करे, तो यह जाल (एप्रन) अपनी जगह से खिसक कर (जिसे तकनीकी भाषा में 'लॉन्च' होना कहते हैं) नदी की धारा के सामने एक सुरक्षा दीवारनुमा आकार में खड़ा हो जाए।\r\n \r\n
- \r\n इसका मुख्य उद्देश्य तटबंध की मिट्टी को नदी की तेज धारा के कटान (Erosion) से बचाना है।\r\n \r\n
\r\n\r\nविभाग ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण नदी का बहाव तेज है। इस बहाव को रोकने के लिए कुछ स्थानों पर यह एसीबीएम एप्रन नियमानुसार ही अपनी जगह से 'लॉन्च' हो रहा है, ताकि तटबंध पर धारा के सीधे प्रहार को रोका जा सके।
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"यह इस तकनीक का एकदम सामान्य और सफल फंक्शन है, न कि किसी क्षति, कटान या दुर्घटना का संकेत।"
\r\n\r\nतटबंध पूरी तरह सुरक्षित, 24 घंटे हो रही निगरानी
\r\n\r\nसिंचाई विभाग ने जिले की जनता को पूरी तरह से आश्वस्त किया है कि बिजनौर बैराज का तटबंध पूर्णतया सुरक्षित है। वर्तमान में कहीं भी कोई कटान या टूट-फूट की समस्या नहीं है।
\r\n\r\nइसके साथ ही, बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा के प्रति सिंचाई विभाग पूरी तरह से गंभीर और मुस्तैद है। विभाग किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए निम्नलिखित एहतियाती और सुरक्षात्मक कदम उठा रहा है:
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- \r\n राउंड-द-क्लॉक मॉनिटरिंग: पूरे तटबंध क्षेत्र की 24 घंटे कड़ी निगरानी (Patrolling) की जा रही है। अधिकारियों की टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय: नदी के तेज बहाव का प्रभाव तटबंध पर कम करने के उद्देश्य से सुरक्षात्मक उपाय किए जा रहे हैं। इसमें 'बल्ला कटर' और मिट्टी व बालू से भरे 'नायलॉन क्रेट' (नदी किनारे रखे जाने वाले विशेष बोरे) लगाए जा रहे हैं, ताकि धारा की दिशा को मोड़ा जा सके।\r\n \r\n
- \r\n आपातकालीन तैयारी: सिंचाई विभाग की पूरी टीम, इंजीनियर और लेबर किसी भी अपरिहार्य परिस्थिति (Emergency) से तत्काल निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और अलर्ट मोड पर है।\r\n \r\n
\r\n\r\nअफवाहों पर ध्यान न दें, प्रशासन पर भरोसा रखें
\r\n\r\nअंत में, सिंचाई विभाग और बिजनौर प्रशासन ने आम जनता और विशेष रूप से तटबंध के आसपास रहने वाले ग्रामीणों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या कुछ गैर-जिम्मेदार मीडिया पोर्टल्स द्वारा फैलाई जा रही इन भ्रामक खबरों पर बिल्कुल भी विश्वास न करें। ऐसी खबरें केवल सनसनी फैलाने के उद्देश्य से प्रकाशित की जा रही हैं।
\r\n\r\nप्रशासन ने अनुरोध किया है कि बाढ़ या बैराज से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल सरकारी बयानों और आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। खबरीलाल मीडिया भी आपसे अपील करता है कि अफवाहों को आगे न बढ़ाएं; बिजनौर बैराज पूरी तरह सुरक्षित है और स्थिति प्रशासन के पूर्ण नियंत्रण में है।
Sabse pehle comment karne wale banein.