देश में संपत्ति के अधिकार को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जो बच्चे अपने बूढ़े माता-पिता की देखभाल नहीं करते हैं, उन्हें उनकी संपत्ति से कभी भी बेदखल किया जा सकता है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने एक 80 वर्षीय बुजुर्ग के मामले में यह फैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्णय को पलट दिया और बेटों को पैतृक संपत्ति खाली करने का आदेश दिया।READ ALSO:-बरेली में I Love Mohommad पर बवाल : जुमे की नमाज के बाद सड़कों पर उतरी भीड़ ने किया पथराव; पुलिस ने किया लाठीचार्ज
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क्या था पूरा मामला?
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- \r\n अभागे पिता की गुहार: इस मामले में एक 80 साल के बुजुर्ग ने कोर्ट का रुख किया था। उनके बेटे ने उनकी पैतृक जायदाद पर कब्जा कर लिया था और उन्हें खुद उसी घर में रहने की इजाजत नहीं दे रहा था।\r\n \r\n
- \r\n ट्रिब्यूनल का फैसला: बुढ़ापे में देखभाल न करने के कारण बुजुर्ग ने 'भरण-पोषण एवं कल्याण एक्ट 2007' के तहत गठित ट्रिब्यूनल में अपील की थी। ट्रिब्यूनल ने बुजुर्ग के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके बेटे को संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दिया था।\r\n \r\n
- \r\n बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्णय: लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस फैसले को अमान्य करार दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा।\r\n \r\n
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि 'भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007' का मुख्य उद्देश्य वृद्ध व्यक्तियों की दुर्दशा को दूर करना और उनकी देखभाल व सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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- \r\n बेदखली का अधिकार: कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह कानून माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को अपनी संपत्ति से ऐसे बच्चों को बेदखल करने का अधिकार देता है, जो उनकी रहने-खाने की जिम्मेदारी से भागते हैं।\r\n \r\n
- \r\n अधिकारों की पुष्टि: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि माता-पिता के पास अपनी संपत्ति का पूर्ण मालिकाना हक है और वे अपने बच्चों को कभी भी उस जायदाद से बेदखल कर सकते हैं।\r\n \r\n
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यह फैसला उन लाखों बुजुर्गों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है, जो अपने ही घर में अपने बच्चों द्वारा प्रताड़ित किए जाते हैं। यह कानून और न्यायपालिका की ओर से एक मजबूत संदेश है कि माता-पिता की सेवा और देखभाल करना बच्चों का सिर्फ कर्तव्य नहीं, बल्कि एक कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी भी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.