कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सिखों पर दिए गए उनके बयान से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने वाराणसी की विशेष अदालत (एमपी/एमएलए) के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति समीर जैन ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।READ ALSO:-ब्रेकिंग: ट्रम्प का फार्मा 'टैरिफ बम'! 1 अक्टूबर से ब्रांडेड दवाओं पर 100% ड्यूटी
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इस आदेश के बाद, वाराणसी की विशेष अदालत (MP/MLA) में राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मुकदमे की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
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क्या था पूरा मामला?
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- \r\n विवादित बयान: मामला सितंबर 2024 का है, जब राहुल गांधी ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर कहा था कि भारत में सिखों के लिए माहौल अच्छा नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया था, "क्या सिख पगड़ी पहन सकते हैं, कड़ा रख सकते हैं और गुरुद्वारे जा सकते हैं?"\r\n \r\n
- \r\n शिकायत: इस बयान को भड़काऊ और समाज में विभाजनकारी बताते हुए नागेश्वर मिश्र ने सारनाथ थाने में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।\r\n \r\n
- \r\n मजिस्ट्रेट कोर्ट से खारिज: एफआईआर दर्ज न होने पर मिश्र ने न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय वाराणसी की अदालत में अर्जी दी, लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि केंद्र सरकार की अनुमति के बिना ऐसी अर्जी पोषणीय नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n विशेष अदालत का आदेश: इस आदेश के विरुद्ध विशेष अदालत (MP/MLA) में पुनरीक्षण अर्जी दी गई। विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर दिया और नए सिरे से विचार कर आदेश करने के लिए प्रकरण वापस न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेज दिया। राहुल गांधी ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।\r\n \r\n
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हाईकोर्ट में राहुल गांधी की दलीलें
\r\n\r\nराहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी ने तर्क दिया कि:
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- \r\n आरोप निराधार हैं, और घटना की तारीख तक का कोई उल्लेख नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n सिर्फ खबरों के आधार पर अर्जी दी गई है और याची के खिलाफ कोई आपराधिक केस नहीं बनता।\r\n \r\n
- \r\n विशेष अदालत ने कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर विचार किए बिना आदेश दिया।\r\n \r\n
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सरकार और वादी पक्ष का तर्क
\r\n\r\nप्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और वादी के वकील सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी व अमन सिंह बिसेन ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा।
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- \r\n याचिका समय पूर्व: उन्होंने कहा कि अभी तक कोई एफआईआर दर्ज भी नहीं हुई है, और विशेष अदालत ने सिर्फ मजिस्ट्रेट को गुण-दोष के आधार पर विचार करने के लिए केस वापस भेजा है, इसलिए याचिका समय पूर्व दाखिल की गई है।\r\n \r\n
- \r\n विवेचना से स्पष्टता: वादी पक्ष ने तर्क दिया कि अपराध बनता है या नहीं, यह विवेचना (जांच) से स्पष्ट होगा, जिसके लिए साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n अवैधानिकता नहीं: अपर महाधिवक्ता गोयल ने कहा कि विशेष अदालत का मजिस्ट्रेट कोर्ट को विवेक से फैसला लेने के लिए प्रकरण वापस भेजना कानून के मुताबिक सही है, क्योंकि पुनरीक्षण अदालत सीधे मजिस्ट्रेट की शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकती।\r\n \r\n
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कोर्ट ने इस पूरे मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है। कोर्ट के इस फैसले से अब वाराणसी की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर आगे की सुनवाई का रास्ता खुल गया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.