उत्तर प्रदेश के सर्राफा बाजार में सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। 'नो फेस, नो ज्वेलरी' (No Face, No Jewelry) की नीति अब बिहार के बाद उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी लागू हो गई है। वाराणसी, इटावा और झांसी समेत कई जिलों में सर्राफा कारोबारियों ने एक सुर में फैसला लिया है कि अब बुर्का, हिजाब, घूंघट, हेलमेट या मास्क पहनकर आने वाले ग्राहकों को आभूषण नहीं बेचे जाएंगे।READ ALSO:-UP Police 2.0: 'सिंघम' अब बनेगा 'साइबर योद्धा'! यूपी पुलिस के हाथों में आया AI का 'ब्रह्मास्त्र'; 5 दिन की विशेष ट्रेनिंग के बाद तैयार हुए 120 'डिजिटल सुपरकॉप', अपराधियों की अब खैर नहीं
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यह फैसला लगातार बढ़ती चोरी, लूट और टप्पेबाजी की घटनाओं को देखते हुए लिया गया है। दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर पोस्टर चस्पा कर दिए हैं, जिन पर साफ लिखा है कि सुरक्षा कारणों से चेहरा दिखाना अनिवार्य है। इस फैसले की पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है और इसे व्यापारियों की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
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वाराणसी में सुरक्षा प्रथम: 'चेहरा दिखाएं, गहने पाएं'
\r\n\r\nधर्मनगरी वाराणसी में सर्राफा कारोबारियों ने सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बना लिया है। उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ की वाराणसी इकाई ने स्पष्ट कर दिया है कि अब संदिग्ध वेशभूषा या चेहरा ढककर आने वालों को दुकान में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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संघ की वाराणसी इकाई के जिलाध्यक्ष कमल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह फैसला किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से सुरक्षा के नजरिए से लिया गया है।
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\r\n\r\n\r\n"वाराणसी में चेहरे ढककर आए ग्राहकों को हम आभूषण नहीं बेचेंगे। अगर कोई नकाबपोश व्यक्ति किसी वारदात को अंजाम देता है, तो सीसीटीवी होने के बावजूद उसकी पहचान नहीं हो पाती। इसलिए हमने अपनी दुकानों के आगे पोस्टर लगाए हैं जिन पर लिखा है कि मास्क, बुर्का, हेलमेट और नकाब पहनकर दुकान में आना मना है।" - कमल सिंह\r\n
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दुकानदारों का कहना है कि आज सोने और चांदी के भाव आसमान छू रहे हैं। सोना 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ढाई लाख रुपये किलो के करीब है। ऐसे में ज्वैलर्स अपराधियों के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' बन गए हैं। एक छोटी सी चूक भी लाखों-करोड़ों का नुकसान करा सकती है।
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झांसी और इटावा में भी पोस्टर वार
\r\n\r\nवाराणसी की तर्ज पर ही बुंदेलखंड के झांसी और इटावा में भी यह मुहीम जोर पकड़ चुकी है। उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण सेठ ने बताया कि झांसी समेत प्रदेश के कई जिलों में सुनार की दुकानों के आगे इस तरह के पोस्टर लगाए जा रहे हैं।
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इटावा में इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने इस पहल का नेतृत्व किया है। एसोसिएशन के निर्देश पर जिले की आभूषण दुकानों और शोरूम्स में चेहरा ढककर प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। नियम बिल्कुल साफ हैं:
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- \r\n चाहे आप हेलमेट पहने हों,\r\n \r\n
- \r\n मफलर या गमछे से चेहरा ढका हो,\r\n \r\n
- \r\n या फिर बुर्का/नकाब पहना हो, काउंटर पर लेनदेन करने या ज्वैलरी देखने से पहले आपको अपना चेहरा दिखाना ही होगा। बिना पहचान जाहिर किए न तो कोई सामान दिखाया जाएगा और न ही बिक्री की जाएगी।\r\n \r\n
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मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या है नियम?
\r\n\r\nइस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल बुर्का और नकाब को लेकर उठ रहा था। एसोसिएशन ने इस पर भी स्थिति स्पष्ट की है। यह नियम किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं है। मुस्लिम महिलाएं दुकान तक बुर्का पहनकर आ सकती हैं, लेकिन दुकान में प्रवेश करते समय या काउंटर पर बैठते समय उन्हें एक बार अपना नकाब हटाना होगा। इसका उद्देश्य केवल इतना है कि दुकान में लगे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) में उनका चेहरा साफ-साफ रिकॉर्ड हो सके।
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कारोबारियों का तर्क है कि कई बार पुरुष अपराधी भी बुर्का पहनकर वारदातों को अंजाम देते हैं। ऐसे में पहचान सुनिश्चित करना पुलिस और व्यापारी दोनों के हित में है।
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अपराधियों की 'मॉडस ऑपरेंडी' तोड़ने की कोशिश
\r\n\r\nयह निर्णय अचानक नहीं लिया गया है। पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों में ज्वैलरी शॉप्स में लूट और चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस जांच में अक्सर यह बात सामने आती है कि अपराधी हेलमेट या नकाब पहने हुए थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
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इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रदेश सह प्रभारी आकाशदीप जैन ने इटावा के सभी सर्राफा व्यवसायियों से दिन के समय भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा:
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\r\n\r\n\r\n"कई मामलों में नकाबपोश लोग आभूषणों की दुकानों पर वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। बाद में सीसीटीवी कैमरों में उनके चेहरे साफ न होने के कारण पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए प्रत्येक दुकान पर साफ शब्दों में लिखा होना चाहिए कि चेहरा ढक कर प्रवेश वर्जित है।"\r\n
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क्या करें अगर दिखे कोई संदिग्ध?
\r\n\r\nएसोसिएशन ने दुकानदारों के लिए एक गाइडलाइन (Standard Operating Procedure) भी जारी की है:
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- \r\n प्रवेश निषेध: किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को जो चेहरा दिखाने से मना करे, उसे दुकान में प्रवेश न दें।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस को सूचना: यदि कोई व्यक्ति जबरदस्ती घुसने की कोशिश करे या दुकान के आसपास संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।\r\n \r\n
- \r\n जागरूकता पोस्टर: संस्था की ओर से दुकानों पर जागरूकता वाले पोस्टर लगाए जा रहे हैं ताकि ग्राहकों को भी इस नियम की जानकारी पहले से मिल सके।\r\n \r\n
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आकाशदीप जैन ने पुनः स्पष्ट किया कि इस फैसले का मकसद केवल और केवल सर्राफा व्यवसायियों, कर्मचारियों और वहां मौजूद अन्य ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। संस्था का मानना है कि इस नियम के कड़ाई से लागू होने पर आभूषण दुकानों पर होने वाली वारदातों में भारी कमी आएगी।
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'नो फेस, नो ज्वेलरी' (No Face, No Jewelry) की यह नीति समय की मांग है। जहां एक ओर यह व्यापारियों को सुरक्षा का एहसास दिलाती है, वहीं दूसरी ओर यह पुलिस प्रशासन के लिए भी मददगार साबित होगी। हालांकि, ग्राहकों को शुरुआत में थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह एक सकारात्मक कदम है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और आम जनता इस नए नियम को किस तरह से अपनाते हैं।
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यूपी के वाराणसी, इटावा और झांसी में ज्वैलर्स ने सुरक्षा के लिए 'नो फेस, नो ज्वेलरी' नियम लागू किया है। अब बुर्का, हेलमेट या मास्क पहनकर गहने नहीं खरीदे जा सकेंगे। दुकान में प्रवेश से पहले चेहरा दिखाना अनिवार्य होगा, ताकि सीसीटीवी में पहचान हो सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.