उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के सरसावा में सोमवार की रात जो हुआ, उसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। एक पिता, एक बेटा और एक पति—अशोक राठी, जो पेशे से संग्रह अमीन था, एक ही झटके में 'कातिल' बन गया। कौशिक विहार कॉलोनी के एक बंद कमरे में पांच लाशें मिलीं। मरने वालों में अमीन की 70 वर्षीय बुजुर्ग मां, 35 वर्षीय पत्नी और दो मासूम बेटे शामिल थे, जिनके सुनहरे भविष्य के सपने अभी परवान चढ़ने थे।READ ALSO:-गाजियाबाद में 'खूनी इश्क': रील और नशे की लत में पत्नी बनी हैवान, प्यार का नाटक कर जड़ से काट दी पति की जीभ
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इस नृशंस हत्याकांड और आत्महत्या के पीछे की वजह अब भी एक पहेली बनी हुई है, लेकिन मरने से ठीक पहले अशोक राठी द्वारा अपनी बहनों को भेजा गया व्हाट्सएप ऑडियो इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बन गया है। उस ऑडियो में जिस 'मजबूरी' और 'अंत' का जिक्र है, उसने पुलिस से लेकर परिजनों तक सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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वो काली रात: व्हाट्सएप पर आई मौत की खबर
\r\n\r\nघटनाक्रम की शुरुआत मंगलवार तड़के हुई, लेकिन इसकी पटकथा सोमवार रात ही लिखी जा चुकी थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने के बाद और खुद को गोली मारने से पहले, अशोक राठी ने अपनी बहनों—पिंकेश और मोना—को व्हाट्सएप पर कई ऑडियो मैसेज भेजे थे।
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सुबह 3:52 बजे का वो आखिरी पैगाम पुलिस के मुताबिक, अशोक ने मंगलवार तड़के करीब 3:52 बजे अपनी बहनों को छह-सात ऑडियो मैसेज भेजे। इनमें से एक ऑडियो क्लिप 1 मिनट 18 सेकंड की है, जो अब इस केस का सबसे बड़ा सबूत है।
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इस ऑडियो में अशोक की आवाज में गहरा दर्द और हताशा थी। उसने कहा:
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\r\n\r\n\r\n"पिंकेश और मोना मैं माफी चाहता हूं, मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी है। मैंने तुम्हारा भाई होकर बहुत गलत काम कर दिया है। मेरे जाने का गम मत मनाना, जो काम मैंने छोड़े हैं वह तुम्हें पूरे करने हैं। मेरे जाने के बाद जो मेरा है वह सब तुम दोनों बहनों का है। मैं बहुत मजबूर हो गया था, मैं किसी को अपनी मजबूरी नहीं बता सकता था। मैं इतना मजबूर था कि अब अंत आ गया था, इसलिए मुझे मरना पड़ रहा है।"\r\n
उसने आगे कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"मुझे माफ कर देना मेरी बहनों। मनीष भाई, जयवीर, मेरी दोनों बहनों और मेरे दोस्तों माफ कर देना, मुझे जाना पड़ रहा है मेरी मजबूरी है।"\r\n
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दरवाजा टूटा तो सामने था खौफनाक मंजर
\r\n\r\nअशोक की बहन पिंकेश, जो घटनास्थल से महज 200 मीटर दूर सावन विहार कॉलोनी में रहती हैं, ने जब सुबह सोकर उठने के बाद मोबाइल देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। भाई के अजीबोगरीब मैसेज देखकर उन्होंने तुरंत कॉल किया, लेकिन फोन नहीं उठा।
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घबराहट में पिंकेश ने अपने बेटे प्रीत को मामा के घर भेजा। वहां दरवाजा अंदर से बंद था। अनहोनी की आशंका पर प्रीत ने अपने पिता जयवीर को बुलाया। बाप-बेटे ने सीढ़ी लगाकर घर में झांका और अंततः रसोई की खिड़की तोड़कर दरवाजा खोला।
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बिस्तर पर बिखरी थीं पांच लाशें कमरे के अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था। एक ही कमरे में पांचों सदस्यों के शव बिस्तर पर पड़े थे।
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- \r\n अशोक राठी (40): संग्रह अमीन (खुदकुशी की)।\r\n \r\n
- \r\n विद्यावती (70): अशोक की मां।\r\n \r\n
- \r\n अंजिता (35): अशोक की पत्नी।\r\n \r\n
- \r\n कार्तिक (16): बड़ा बेटा (10वीं का छात्र)।\r\n \r\n
- \r\n देव (13): छोटा बेटा (9वीं का छात्र)।\r\n \r\n
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, अशोक ने अपनी मां, पत्नी और दोनों बेटों को माथे पर सटाकर गोली मारी थी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद उसने खुद को खत्म किया।
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दो गोलियों का रहस्य: क्या इतना आसान है खुद को दो बार मारना?
\r\n\r\nइस हत्याकांड में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अशोक राठी के शरीर पर गोली के दो निशान मिले हैं।
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- \r\n पहली गोली: सीने में लगी। बताया जा रहा है कि यह गोली पसलियों से निकल गई, जिससे तुरंत मौत नहीं हुई।\r\n \r\n
- \r\n दूसरी गोली: कनपटी (सिर) पर।\r\n \r\n
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डॉक्टरों और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि सीने में गोली लगने के बाद व्यक्ति 5-7 मिनट तक जीवित रह सकता है। संभावना है कि पहली गोली से जब मौत नहीं हुई, तो अशोक ने दूसरी गोली अपनी कनपटी पर दाग दी। पुलिस ने मौके से तीन देसी पिस्टल बरामद की हैं, जिनका कोई लाइसेंस नहीं था। सवाल यह है कि एक सरकारी कर्मचारी के पास तीन अवैध हथियार कहां से आए?
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मासूम सपनों का कत्ल: होनहार थे कार्तिक और देव
\r\n\r\nइस घटना में सबसे दर्दनाक पहलू उन दो मासूम बच्चों की मौत है, जिनका न तो किसी विवाद से लेना-देना था और न ही कोई गलती थी।
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कार्तिक राठी (16 वर्ष): वह अंबहेटा के सीएस दयानंद इंटर कॉलेज में 10वीं का छात्र था।
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- \r\n विद्यालय प्रबंधक नरेश शर्मा ने बताया कि कार्तिक बेहद शांत और अनुशासित छात्र था। उसने हाल ही में प्री-बोर्ड परीक्षाएं दी थीं और शनिवार को ही अपना आखिरी पेपर दिया था।\r\n \r\n
- \r\n शौक: उसे क्रिकेट का जुनून था और वह एक अच्छा खिलाड़ी भी था।\r\n \r\n
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देव राठी (13 वर्ष): वह सरसावा के एमटीएस पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ता था।
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- \r\n प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश शर्मा के अनुसार, देव पढ़ाई में होनहार तो था ही, साथ ही खेलकूद में भी उसकी गहरी रुचि थी। वह अक्सर स्टेडियम में अभ्यास करता था।\r\n \r\n
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स्कूल के शिक्षकों और सहपाठियों को विश्वास नहीं हो रहा है कि अब ये दोनों चेहरे कभी कक्षा में नजर नहीं आएंगे।
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बहनें मांगती रहीं भाई के दीदार की भीख
\r\n\r\nएक ही परिवार के पांच सदस्यों की अर्थियां जब उठने को तैयार हुईं, तो माहौल गमगीन हो गया। अशोक की बहनें पिंकेश और मोना का रो-रोकर बुरा हाल था। वे पुलिस वालों के सामने गिड़गिड़ाती रहीं, "एक बार भाई का चेहरा दिखा दो"।
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जिस कमरे में शव पड़े थे, वहां पुलिस ने बहनों को जाने से रोक दिया था। दोनों बहनें दहाड़े मारकर रोते हुए बार-बार यही पूछ रही थीं, "भाई ऐसी क्या मजबूरी थी? हमें एक बार समस्या बताता, हम मिलकर हल निकालते"। उनकी चीखें सुनकर पड़ोसियों और वहां मौजूद भीड़ की आंखों में भी आंसू आ गए।
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सुलझने के बजाय उलझती जा रही गुत्थी:
\r\n\r\nपुलिस जांच कर रही है, लेकिन मौके से मिले सुराग और हालात कई सवाल खड़े कर रहे हैं, जिनके जवाब अभी तक नहीं मिले हैं:
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1. आखिर वो 'मजबूरी' क्या थी? ऑडियो में अशोक ने बार-बार कहा, "मैं किसी को अपनी मजबूरी नहीं बता सकता था।" आर्थिक तंगी के सबूत नहीं मिले हैं, क्योंकि वह एक सरकारी पद (संग्रह अमीन) पर था और हाल ही में उसने कमाई बढ़ाने के लिए एक जेसीबी मशीन भी खरीदी थी। फिर ऐसा कौन सा दबाव था?
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2. तीन अवैध पिस्टल कहां से आए? अशोक के पास से तीन देसी पिस्टल मिलीं। एक आम आदमी, जो सरकारी नौकरी में है, उसके पास अवैध हथियारों का जखीरा कैसे पहुंचा? क्या उसने यह हत्याएं महीनों पहले प्लान की थीं?
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3. मां और बच्चों को क्यों मारा? अगर अशोक का अपनी पत्नी से विवाद था (जैसा कि शहर और गांव में रहने को लेकर चर्चा है), तो उसने अपनी 70 साल की बूढ़ी मां और दो मासूम बेटों को क्यों मारा?
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4. शहर बनाम गांव का विवाद? सूत्रों के मुताबिक, अशोक अपनी मां के साथ गांव (खारीबांस) में रहना चाहता था, जबकि उसकी पत्नी और बच्चे सरसावा के नए मकान में शिफ्ट होना चाहते थे। क्या यह घरेलू कलह इतना बढ़ गया कि नौबत सामूहिक हत्याकांड तक पहुंच गई?
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5. वो 'अधूरे काम' क्या हैं? ऑडियो में अशोक ने बहनों से कहा, "जो काम मैंने छोड़े हैं वह तुम्हें पूरे करने हैं।" यह किस काम की ओर इशारा है? क्या कोई कर्ज था, कोई दुश्मनी थी, या कोई और पारिवारिक जिम्मेदारी?
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सहारनपुर का यह कांड एक चेतावनी है कि इंसान के दिमाग में चल रही उथल-पुथल कब ज्वालामुखी बनकर फट पड़े, कहा नहीं जा सकता। अशोक राठी ने अपनी जिस 'मजबूरी' को दुनिया से छिपाया, उसने आज पूरे परिवार को खत्म कर दिया। पड़ोसी बताते हैं कि पिछले कई दिनों से घर में किसी तरह के विवाद या तनाव के संकेत नहीं थे, सब कुछ सामान्य लग रहा था। यही खामोशी इस घटना को और भी भयावह बनाती है।
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पुलिस अब मोबाइल कॉल डिटेल्स, व्हाट्सएप चैट्स और जेसीबी खरीद के वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है ताकि उस 'मजबूरी' का पता लगाया जा सके जिसने पांच हंसते-खेलते लोगों को मौत की नींद सुला दिया।
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नोट: आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। यदि आप या आपके परिचित किसी भी तरह के मानसिक तनाव या अवसाद से गुजर रहे हैं, तो कृपया मनोचिकित्सक से संपर्क करें या सरकारी हेल्पलाइन की मदद लें।
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