आगरा: अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत के खिलाफ चल रहे एक कानूनी मामले में शनिवार को सुनवाई पूरी हो गई। अब इस मामले में 30 सितंबर को कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है। यह मामला पिछले साल से चल रहा है, जिसमें कंगना पर किसानों के अपमान और राष्ट्रद्रोह के आरोप लगाए गए हैं।Read also:-यूपी में 11 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! सरकारी विभागों में भर्ती का नया मॉडल, मिलेगा पेंशन और बीमा का लाभ
\r\n\r\n\r\n\r\n
क्या है पूरा मामला?
\r\n\r\nआगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस नेता रमाशंकर शर्मा ने 11 सितंबर 2024 को कंगना रनौत के खिलाफ आगरा की विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट में एक वाद दायर किया था। आरोप था कि कंगना ने 26 अगस्त 2024 को एक साक्षात्कार में केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को "हत्यारा" बताया था। इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था।
\r\n\r\nजंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶ \r\n\r\n
करीब नौ महीने तक चली सुनवाई के बाद, मई 2025 में एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह ने इस वाद को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह वाद आधारहीन है। न्यायाधीश ने तीन मुख्य बिंदुओं का हवाला दिया था, जिसमें कहा गया था कि वादी का परिवार किसान आंदोलन में शामिल नहीं था, महात्मा गांधी के परिवार का कोई व्यक्ति ही यह वाद कर सकता है, और वाद दायर करने से पहले मजिस्ट्रेट की मंजूरी नहीं ली गई थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सेशन कोर्ट में हुई सुनवाई
\r\n\r\nवाद खारिज होने के बाद, वादी रमाशंकर शर्मा ने जिला सत्र न्यायालय में एक रिवीजन याचिका दायर की थी। शनिवार को इसी याचिका पर दोनों पक्षों की ओर से जोरदार बहस हुई। वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह, अनूप शर्मा, बीएस फौजदार और अन्य अधिवक्ताओं ने अपने तर्क रखे। वहीं, कंगना रनौत की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अभिनव झा और स्थानीय सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मोहित पाल ने पक्ष रखा।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›
🏪 आपके शहर के ऑफर
विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →
सभी ऑफर देखें →
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जिला सत्र न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की निगाहें 30 सितंबर पर टिकी हैं, जब कोर्ट का अंतिम फैसला आएगा।
\r\n\r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.