Army Public School Meerut: आज के डिजिटल और इंटरनेट के दौर में जहां तकनीक ने हमारे जीवन को बेहद आसान बना दिया है, वहीं साइबर अपराधों (Cyber Crimes) और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में भी चिंताजनक रूप से वृद्धि हुई है। युवा वर्ग और स्कूली छात्र अक्सर अंजाने में इन साइबर अपराधियों का आसान शिकार बन जाते हैं। इसी गंभीर चुनौती को ध्यान में रखते हुए और 'साइबर जागरूकता माह' (अक्टूबर) के अंतर्गत, उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल (Army Public School Meerut) में एक वृहद साइबर सुरक्षा एवं महिला-बाल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित व जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करना, साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताना और मिशन शक्ति के तहत छात्राओं को उनके अधिकारों व सुरक्षा हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देना था। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विद्यालय की कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की।
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डिजिटल फुटप्रिंट्स और साइबर बुलिंग से बचाव की दी गई जानकारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेरठ साइबर सेल के उपनिरीक्षक (SI) नितिन पाण्डेय ने आज के समय में सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग और उसके खतरों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि इंटरनेट पर की गई कोई भी गतिविधि 'डिजिटल फुटप्रिंट' (Digital Footprints) के रूप में हमेशा के लिए दर्ज हो जाती है, इसलिए सोशल मीडिया का उपयोग बेहद जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। उन्होंने साइबर बुलिंग (Cyber Bullying), साइबर स्टॉकिंग और हैकिंग जैसे अपराधों से बचने के लिए अपने सोशल मीडिया खातों के पासवर्ड मजबूत और सुरक्षित रखने के अहम सुझाव भी छात्रों के साथ साझा किए।

ऑनलाइन गेमिंग और 'डिजिटल अरेस्ट' के नए खतरों से किया अलर्ट
वर्तमान में ऑनलाइन ठगी के बदलते स्वरूपों पर प्रकाश डालते हुए उपनिरीक्षक जागीर सिंह ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से सतर्क किया। उन्होंने युवाओं में बढ़ती 'ऑनलाइन गेमिंग' (Online Gaming) की लत और इसके जरिए होने वाले आर्थिक नुकसान के प्रति आगाह किया। साथ ही, हाल ही में तेजी से सामने आ रहे 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest), फर्जी कॉल (Fake Calls) और लॉटरी या इनाम के झूठे संदेशों (Spam Messages) से बचने के लिए छात्रों को व्यावहारिक और महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार (डिजिटल अरेस्ट) नहीं करती है, इसलिए ऐसे कॉल्स से घबराएं नहीं।
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साइबर ठगी होने पर 1930 पर करें तुरंत कॉल
साइबर अपराध का शिकार होने की स्थिति में घबराने के बजाय त्वरित कदम उठाने की सलाह देते हुए साइबर सेल के विशेषज्ञ उमेश कुमार ने शिकायत दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की वित्तीय या ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा, आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर जाकर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब हर पुलिस थाने में एक विशेष 'साइबर हेल्प डेस्क' (Cyber Help Desk) स्थापित की गई है, जहां पीड़ित नागरिक सीधे जाकर अपनी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

मिशन शक्ति छठा चरण: महिला एवं बाल सुरक्षा पर विशेष फोकस
साइबर सुरक्षा के साथ-साथ इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी 'मिशन शक्ति' (Mission Shakti) अभियान के छठे चरण के तहत महिला एवं बाल सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। थाना सदर बाजार, मेरठ की एंटी रोमियो (Anti Romeo) टीम ने इस सत्र का सफल संचालन किया।
कार्यक्रम में उपस्थित महिला उपनिरीक्षक और एंटी रोमियो प्रभारी पुष्पांजलि, उपनिरीक्षक नाजिम, साइबर प्रभारी उपनिरीक्षक सनी कुमार और महिला कांस्टेबल सीमा ने छात्राओं को आपातकालीन स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से निम्नलिखित नंबरों को याद रखने पर जोर दिया:
1090: वुमन पावर लाइन (महिला सुरक्षा के लिए)
112: आपातकालीन पुलिस सहायता
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1098: चाइल्डलाइन (बच्चों की सहायता के लिए)
1930: साइबर अपराध हेल्पलाइन
181: महिला हेल्पलाइन
1076: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन
पुलिस टीम ने 'मिशन शक्ति केंद्र' की भूमिका और वहां महिलाओं व बच्चों के लिए उपलब्ध सहायता सेवाओं के प्रति भी विद्यार्थियों को विस्तार से जागरूक किया।
शिक्षक-शिक्षिकाओं का रहा अहम योगदान, प्रधानाचार्या ने की सराहना
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को यह संकल्प दिलाया गया कि वे साइबर अपराधों से खुद का बचाव करेंगे और डिजिटल माध्यमों का सकारात्मक व जिम्मेदार नागरिक की तरह उपयोग करेंगे। इस बेहद सफल और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम के आयोजन में विद्यालय के शिक्षक सचिन शर्मा और अनुज कुमार शर्मा का विशेष और प्रमुख योगदान रहा।
आर्मी पब्लिक स्कूल मेरठ की प्रधानाचार्या डॉ. (श्रीमती) रीटा गुप्ता (Dr. Reeta Gupta) ने पुलिस टीम और विद्यालय के शिक्षकों के इस समर्पित प्रयास की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों को अपनी ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति सजग बनाते हैं, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास (Holistic Development) और एक सुरक्षित भविष्य की नींव रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह समाचार आर्मी पब्लिक स्कूल मेरठ और साइबर सेल पुलिस द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, अभिभावकों और आम नागरिकों के बीच साइबर सुरक्षा और मिशन शक्ति अभियान को लेकर जन-जागरूकता फैलाना है।
Sabse pehle comment karne wale banein.