लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दवा माफिया और नशे के कारोबारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने कोडिनयुक्त कफ सिरप को नशे के तौर पर बेचने वाले एक विशाल अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। FSDA आयुक्त की सीधी निगरानी में लखनऊ, सीतापुर, और रायबरेली समेत प्रदेश के 13 जिलों में एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें इस काले कारोबार की परतें उधड़कर सामने आ गईं।READ ALSO:- Instagram पर 'वीडियो वॉर', पाकिस्तान से आई चांदपुर में बम रखने की धमकी! ATS-IB की एंट्री से हड़कंप
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यह पूरा नेटवर्क गुजरात से संचालित हो रहा था, जहाँ से नशीली कफ सिरप की खेप तैयार होकर लखनऊ आती थी और फिर पूरे प्रदेश में युवाओं को नशे की लत लगाने के लिए सप्लाई की जाती थी।
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गुजरात कनेक्शन और लखनऊ का गोदाम
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इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर से हुई, जहाँ मेसर्स इधिका लाइफसाइंसेज और मेसर्स आर्पिक फार्मास्यूटिकल्स के ठिकानों पर छापा मारा गया। जांच में पता चला कि इन फर्मों ने भारी मात्रा में कोडिनयुक्त कफ सिरप का भंडारण कर रखा था।
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    मालिक गुजरात में: इन फर्मों का मालिक मनोहर जैसवाल गुजरात में बैठकर यह पूरा नेटवर्क चला रहा था। गुजरात की निर्माता फर्म से भारी मात्रा में सिरप तैयार करवाकर उसे लखनऊ और अन्य जिलों में भेजा जा रहा था।
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    अवैध बिक्री का तरीका: जांच में यह भी सामने आया कि ये फर्में नियमों को ताक पर रखकर एक ही पार्टी को कफ सिरप का पूरा का पूरा लॉट बेच देती थीं, ताकि इसे आसानी से अवैध बाजार में खपाया जा सके।
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छापेमारी में सनसनीखेज खुलासे, सीतापुर में स्टोर सील
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FSDA ने लखनऊ मंडल के सहायक आयुक्त (औषधि) बृजेश कुमार के नेतृत्व में 13 जिलों के औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीमें बनाकर यह कार्रवाई की।
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    सीतापुर में बड़ी गड़बड़ी: सीतापुर स्थित मेसर्स नैमिस धाम मेडिकल स्टोर की जांच में पाया गया कि उसने 2600 बोतल कोडिनयुक्त सिरप खरीदी थी, लेकिन मौके पर केवल 1000 बोतलें ही मिलीं। 1600 बोतलें कहाँ गईं, इसका कोई हिसाब नहीं मिला। भारी अनियमितता के चलते फर्म को तत्काल सील कर दिया गया और स्थानीय थाने को सूचना दी गई।
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    कई फर्में बंद, कुछ के मालिक जेल में: छापे के दौरान कई फर्में बंद पाई गईं। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित नोवोन लाइफसाइंसेज तो कई दिन पहले ही खाली हो चुकी थी। वहीं, शुभाष मेडिकल एजेंसी की जांच में पता चला कि उसने खरीदी गई सिरप को बालाजी मेडिकल स्टोर और श्याम मेडिकल एजेंसी को बेचा था। श्याम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका है और उसका संचालक पहले से ही जेल में बंद है।
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क्या है कोडिनयुक्त कफ सिरप का यह 'काला खेल'?
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कोडिन एक नारकोटिक तत्व है, जिसका इस्तेमाल खांसी की दवाओं में सीमित मात्रा में किया जाता है। लेकिन इसकी अधिक मात्रा लेने पर यह शराब या अन्य नशीले पदार्थों जैसा असर करती है। इसी वजह से दवा माफिया इसे युवाओं को 'सस्ती शराब' या 'लिक्विड नशे' के तौर पर बेचते हैं। यह दवा डॉक्टर के पर्चे के बिना नहीं बेची जा सकती, लेकिन यह नेटवर्क नियमों की धज्जियां उड़ाकर इसे अवैध रूप से बेच रहा था।
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औषधि विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और जब्त किए गए दस्तावेजों के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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