बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने दोषियों की सजा का एलान कर दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई गई है। इस मामले में सौरभ के परिवार ने दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।

सजा में रियायत की मांग करते हुए बचाव पक्ष ने मुस्कान की दो बेटियों के भविष्य का हवाला दिया। इनमें एक बच्ची कुछ महीने पहले जेल में पैदा हुई थी और अभी मुस्कान के साथ जेल में ही रह रही है। बचाव पक्ष ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की। वहीं, साहिल भी हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा। इसके बावजूद अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।

परिवार कोर्ट में, बहस पूरी

सजा के फैसले से पहले सौरभ की मां, मौसी, भाई और परिवार के अन्य सदस्य अदालत पहुंचे थे। परिवार फैसले के समय कोर्ट में मौजूद रहना चाहता था। मामले में सजा को लेकर अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच बहस पूरी हो चुकी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

13 महीने चला मुकदमा, 126 सुनवाई के बाद आया फैसला

खबरों के लिए ज्वाइन करें हमारा Whatsapp Channel

सौरभ राजपूत हत्याकांड की सुनवाई करीब 13 महीने तक चली। इस दौरान अदालत में 126 सुनवाई हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए। अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या और शव छिपाने से जुड़े मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद सजा पर फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी।

अभियोजन ने रखा अपना पक्ष

अभियोजन पक्ष ने अदालत में परिस्थितिजन्य साक्ष्य, तकनीकी जानकारी और गवाहों के बयानों के आधार पर अपना पक्ष रखा था। अभियोजन ने दोनों दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी।

मार्च 2025 में सामने आया था नीले ड्रम वाला मामला

सौरभ राजपूत पूर्व मर्चेंट नेवी कर्मचारी थे। मार्च 2025 में मेरठ में उनकी हत्या का मामला सामने आया था। पुलिस जांच के दौरान उनका शव घर में रखे नीले प्लास्टिक के ड्रम से बरामद हुआ था। ड्रम में शव के टुकड़ों को सीमेंट के साथ छिपाया गया था।

जांच में दोनों की भूमिका सामने आई

जांच में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की भूमिका सामने आई। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और गवाहों तथा साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ी।

सौरभ के परिवार ने मांगी थी फांसी

सौरभ के परिवार ने शुरुआत से ही दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की थी। परिवार का कहना था कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अधिकतम सजा मिलनी चाहिए। अदालत में भी अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड के पक्ष में दलीलें रखीं।

सजा के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया

अब सजा के एलान के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मृत्युदंड के मामलों में कानून के तहत उच्च न्यायालय की पुष्टि सहित निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें