घर खाली होने पर डिलीवरी आना, किसी अनजान व्यक्ति का दरवाजे पर पहुंचना या आसपास की हलचल पर ध्यान न जा पाना आम परेशानी है। ऐसी स्थितियों में स्मार्ट सिक्योरिटी गैजेट्स निगरानी को आसान बना सकते हैं। एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट में स्मार्ट डोरबेल, सिक्योरिटी कैमरे, मोशन सेंसर, स्मार्ट लॉक और स्मार्ट सेफ के काम करने का तरीका बताया गया है।

कैमरे और वीडियो डोरबेल कैसे करते हैं मदद

स्मार्ट सिक्योरिटी कैमरे घर के मेन दरवाजे और आने-जाने के दूसरे रास्तों पर नजर रखने में मदद करते हैं। इंटरनेट से जुड़े होने पर इनका लाइव वीडियो स्मार्टफोन पर देखा जा सकता है। इससे घर से दूर रहने पर भी आसपास की गतिविधि पर नजर रखना आसान होता है।

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कुछ कैमरों में मोशन डिटेक्शन की सुविधा भी होती है, जो हलचल पकड़ने पर कैमरा चालू कर सकती है या अलर्ट भेज सकती है। वहीं स्मार्ट वीडियो डोरबेल सामान्य घंटी से आगे का काम करती है। इसमें कैमरा, माइक्रोफोन और स्पीकर दिए जा सकते हैं।

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कोई व्यक्ति घंटी बजाता है, तो फोन पर उसकी तस्वीर या लाइव वीडियो देखी जा सकती है। टू-वे ऑडियो की मदद से उससे बातचीत भी की जा सकती है। यह सुविधा डिलीवरी के समय निर्देश देने या किसी अनजान व्यक्ति से बात करने में उपयोगी बताई गई है।

सेंसर, लॉक और सेफ की भूमिका

स्मार्ट मोशन सेंसर आसपास हो रही हलचल का पता लगाकर तुरंत अलर्ट दे सकते हैं। इन्हें स्मार्ट लाइट्स से जोड़ने पर मूवमेंट पकड़ते ही लाइटें अपने आप जल सकती हैं। कुछ सेंसर लोगों और दूसरी गतिविधियों के बीच अंतर पहचानने के लिए भी बनाए जाते हैं, जिससे गैर-जरूरी अलर्ट कम हो सकते हैं।

स्मार्ट डोर लॉक में पिन, फिंगरप्रिंट या स्मार्टफोन के जरिए दरवाजा लॉक और अनलॉक किया जा सकता है। कुछ डिवाइस को दूर से भी नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे यह जांचना आसान रहता है कि दरवाजा लॉक है या नहीं। घर में रखे जरूरी दस्तावेजों और कीमती सामान के लिए स्मार्ट सेफ एक विकल्प है। इसमें आधुनिक लॉकिंग मैकेनिज्म और छेड़छाड़ से बचाव के फीचर मिल सकते हैं।

इंटरनेट और बैकअप पर भी ध्यान जरूरी

इन सभी डिवाइस को ठीक ढंग से चलाने के लिए स्थिर इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत हो सकती है। वाई-फाई या बिजली बंद हो जाने पर कुछ डिवाइस की निगरानी और अलर्ट प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ डिवाइस खरीद लेना पर्याप्त नहीं माना गया है।

ऐसे में बैटरी से चलने वाले कैमरे, मोबाइल नेटवर्क का बैकअप और यूपीएस जैसे विकल्प मददगार हो सकते हैं। इसके अलावा राउटर और डिवाइस का मजबूत पासवर्ड रखना तथा सॉफ्टवेयर को अपडेट करते रहना भी जरूरी बताया गया है, ताकि डिवाइस की सुरक्षा कमजोर न पड़े।

स्रोत: ABP News

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