Meerut Family Poison Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। मेरठ के नौचंदी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेंट्रल मार्केट इलाके में आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से जूझ रहे एक 35 वर्षीय युवक ने अपनी आठ माह की गर्भवती पत्नी और दो मासूम बेटियों को जहर दे दिया। इसके बाद उसने स्वयं भी जहरीले पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया।
चारों को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गनीमत यह रही कि समय रहते पड़ोसियों ने मदद की, जिससे पत्नी और दोनों बच्चियों की जान बच गई और वे फिलहाल खतरे से बाहर हैं। हालांकि, युवक की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। इस पूरी घटना के पीछे दो अलग-अलग थ्योरी सामने आ रही हैं— एक तरफ स्थानीय लोग आवास एवं विकास परिषद की ध्वस्तीकरण कार्रवाई को इस त्रासदी का कारण बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस इसे पति-पत्नी के बीच का घरेलू विवाद मान रही है।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶रात डेढ़ बजे रची गई खौफनाक साजिश प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में रहने वाले 35 वर्षीय करुणेश का परिवार लंबे समय से भयंकर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था। गुरुवार रात करीब डेढ़ बजे जब पूरा परिवार सोने की तैयारी में था, तब करुणेश ने इस आत्मघाती कदम को उठाया। सबसे पहले उसने खुद एक कप चाय में जहरीला पदार्थ मिलाया और उसे पी लिया। इसके बाद उसने बड़ी चालाकी से अपनी आठ महीने की गर्भवती पत्नी काजल और दोनों मासूम बेटियों के लिए कोल्ड ड्रिंक तैयार की और उसमें भी वही जहरीला पदार्थ मिला दिया। पत्नी और बच्चियों ने अनजाने में वह कोल्ड ड्रिंक पी ली।
चीख-पुकार और पड़ोसियों की त्वरित मदद कोल्ड ड्रिंक पीने के कुछ ही देर बाद काजल और दोनों मासूम बच्चियों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं। इसी बीच करुणेश की हालत भी बिगड़ने लगी और वह बेसुध होने लगा। घबराहट और दर्द के बीच काजल ने जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। रात के सन्नाटे में काजल की आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत सक्रिय हो गए। पड़ोस में रहने वाली एक महिला को जब घर के अंदर की स्थिति का अंदाजा हुआ, तो उसने बिना समय गंवाए पास ही रहने वाले अभिनव नाम के एक अन्य युवक को मदद के लिए करुणेश के घर भेजा।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›चार अस्पतालों के चक्कर और वेंटिलेटर तक का सफर अभिनव ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत चारों पीड़ितों को अपनी गाड़ी में बैठाया और अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा।
लोकप्रिय अस्पताल: सबसे पहले अभिनव उन्हें लेकर लोकप्रिय अस्पताल पहुंचा, लेकिन वहां से उन्हें रेफर कर दिया गया।
पारस अस्पताल: इसके बाद चारों को पारस अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें किसी बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी गई।
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विज्ञापन · स्थानीय दुकानों की ताज़ा स्कीम · स्वाइप करें →सभी ऑफर देखें →आनंद अस्पताल: पारस से निकालकर परिवार को आनंद अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां चिकित्सकों ने करुणेश की बेहद गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रख दिया। वहीं पत्नी काजल और दोनों बच्चियों का उपचार शुरू किया गया।
जगदंबा अस्पताल: आनंद अस्पताल में कुछ घंटे के उपचार के बाद करुणेश को बेहतर चिकित्सकीय निगरानी के लिए जगदंबा अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां फिलहाल उसका इलाज जारी है। काजल और बच्चियों की हालत अब स्थिर और खतरे से बाहर बताई गई है।
आवास एवं विकास परिषद की कार्रवाई पर फूटा लोगों का गुस्सा इस पूरी घटना के पीछे की जो मुख्य वजह स्थानीय लोग बता रहे हैं, वह बेहद चिंताजनक है। पड़ोसियों और क्षेत्रवासियों के मुताबिक, करुणेश काफी समय से सेंट्रल मार्केट में चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। लेकिन, हाल ही में आवास एवं विकास परिषद (Avas Vikas Parishad) ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी, जिसमें करुणेश की चाय की दुकान भी टूट गई थी।
दुकान टूटने के बाद करुणेश के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया। आमदनी पूरी तरह बंद हो जाने के कारण परिवार आर्थिक रूप से टूट गया। करुणेश ने हार न मानते हुए परिवार पालने के लिए ठेला चलाना शुरू किया, लेकिन इससे होने वाली मामूली कमाई से घर का खर्च और गर्भवती पत्नी की दवाइयों का खर्च उठाना असंभव हो रहा था। पड़ोसी महिला का स्पष्ट आरोप है कि यदि आवास विकास ने करुणेश की दुकान नहीं तोड़ी होती, तो आज यह हंसता-खेलता परिवार इस बदहाली के कगार पर नहीं पहुंचता और न ही रोजी-रोटी की इतनी बड़ी समस्या पैदा होती। स्थानीय लोग इस घटना के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक ध्वस्तीकरण कार्रवाई को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
मानवता की मिसाल: चंदा जुटाकर भरा बिल, मुफ्त इलाज का ऐलान करुणेश के परिवार की माली हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि आनंद अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनके पास इलाज का बिल भरने तक के पैसे नहीं थे। ऐसे समय में क्षेत्र के लोगों ने इंसानियत की मिसाल पेश की और आपस में चंदा इकट्ठा करके आनंद अस्पताल का भारी-भरकम बिल चुकाया। कुछ निजी अस्पतालों ने भी बिल में आंशिक छूट प्रदान की। इसके बाद जब करुणेश को जगदंबा अस्पताल में शिफ्ट किया गया, तो वहां के संचालक रविंद्र गुर्जर ने दरियादिली दिखाते हुए एक बड़ा ऐलान किया। परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए रविंद्र गुर्जर ने करुणेश का पूरा इलाज पूरी तरह से निःशुल्क (Free of cost) करने का भरोसा दिलाया है। क्षेत्र के तमाम लोग अब इस पीड़ित परिवार की मदद के लिए स्वेच्छा से आगे आ रहे हैं।
पुलिस का पक्ष: शुरुआती जांच में घरेलू विवाद की आशंका एक तरफ जहां जनता इसे बेरोजगारी और प्रशासनिक कार्रवाई का नतीजा मान रही है, वहीं मेरठ की नौचंदी पुलिस की जांच एक अलग ही दिशा की ओर इशारा कर रही है। नौचंदी पुलिस का कहना है कि उनकी शुरुआती छानबीन में यह बात सामने आई है कि गुरुवार रात पति करुणेश और पत्नी काजल के बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक और विवाद हुआ था। पुलिस का मानना है कि इसी घरेलू विवाद और कलह के चलते तैश में आकर करुणेश ने यह खौफनाक कदम उठाया और परिवार सहित खुद को जहर दे दिया।
एसपी सिटी का बयान इस पूरे प्रकरण पर मेरठ के एसपी सिटी (SP City) विनायक गोपाल भोसले ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि, "प्रथम दृष्टया यह मामला घरेलू कलह में जहरीले पदार्थ का सेवन किए जाने का प्रतीत हो रहा है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर रही है और परिस्थितियों से जुड़े सभी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।" एसपी सिटी ने आगे स्पष्ट किया कि, "फिलहाल पीड़ित परिवार या उनके रिश्तेदारों की ओर से थाने में कोई भी लिखित तहरीर (शिकायत) नहीं दी गई है। जैसे ही पुलिस को कोई आधिकारिक तहरीर प्राप्त होगी, उसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर उचित वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"
Sabse pehle comment karne wale banein.