मुंबई (हेल्थ डेस्क): जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर होने लगती है। बचपन में लगाए गए टीकों का असर भी समय के साथ कम हो जाता है। ऐसे में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, अस्थमा या हृदय रोगों जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे वयस्कों के लिए संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। वयस्कों को इन्ही गंभीर खतरों से बचाने और उन्हें एक स्वस्थ व सुरक्षित जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से फोर्टिस हॉस्पिटल, मुलुंड ने एक बेहद अहम कदम उठाया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अस्पताल प्रबंधन ने प्रिवेंटिव केयर की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ते हुए एक समर्पित 'वयस्क टीकाकरण क्लिनिक' (Adult Vaccination Clinic) का विधिवत शुभारंभ किया है। यह क्लिनिक न केवल टीकाकरण की सुविधा देगा, बल्कि वयस्कों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

पद्म श्री डॉ. हिम्मतराव बावस्कर के हाथों हुआ उद्घाटन

\r\n\r\n
इस अत्याधुनिक और विशेष क्लिनिक का उद्घाटन देश के जाने-माने और प्रतिष्ठित चिकित्सक पद्म श्री डॉ. हिम्मतराव बावस्कर के कर कमलों द्वारा किया गया। डॉ. बावस्कर ने हमेशा से ही समाज में निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इस उद्घाटन समारोह के शुभ अवसर पर फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन के आला अधिकारी, कई वरिष्ठ चिकित्सक और शहर के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ भारी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस पहल को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

डॉ. कीर्ति सबनीस के नेतृत्व में चलेगा यह महा-अभियान

\r\n\r\n
फोर्टिस का यह वयस्क टीकाकरण क्लिनिक कोई आम क्लिनिक नहीं है। इसका संचालन और नेतृत्व अस्पताल की प्रख्यात संक्रामक रोग विशेषज्ञ (Infectious Disease Specialist) डॉ. कीर्ति सबनीस द्वारा किया जा रहा है। डॉ. सबनीस का मानना है कि वयस्कों में टीकाकरण को लेकर बहुत सी भ्रांतियां और जानकारी का अभाव है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
इस क्लिनिक का मुख्य उद्देश्य केवल इंजेक्शन लगाना नहीं है, बल्कि मरीजों को सही परामर्श (Counseling) देना और उनका जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) करना है। यानी, मरीज की उम्र, उसकी मेडिकल हिस्ट्री और उसकी जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए यह तय किया जाएगा कि उसे कौन सा टीका कब और क्यों लगना चाहिए। यह कस्टमाइज्ड अप्रोच मरीजों की जान बचाने में एक 'गेम चेंजर' साबित होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

वयस्कों के लिए क्यों जरूरी है टीकाकरण? (Why Adult Vaccination?)

\r\n\r\n
अक्सर लोग सवाल पूछते हैं कि जब बचपन में सारे टीके लग चुके हैं, तो बुढ़ापे या जवानी में टीकों की क्या जरूरत है? चिकित्सा विज्ञान के अनुसार इसके तीन मुख्य कारण हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    असर कम होना (Waning Immunity): बचपन में लगाए गए कुछ टीकों (जैसे टिटनेस या डिप्थीरिया) का सुरक्षा कवच उम्र बढ़ने के साथ कमजोर पड़ने लगता है। इन्हें दोबारा 'बूस्टर डोज' के रूप में लेना आवश्यक होता है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    उम्र के साथ नई बीमारियों का खतरा: उम्र बढ़ने पर शरीर के टी-सेल्स (T-cells) कमजोर हो जाते हैं। 50 वर्ष की आयु के बाद शिंगल्स (Herpes Zoster) और गंभीर निमोनिया का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए वयस्क टीके ही एकमात्र उपाय हैं।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    पुरानी बीमारियां (Chronic Conditions): यदि किसी वयस्क को मधुमेह (Diabetes), सीओपीडी (COPD), किडनी की बीमारी या दिल की कोई बीमारी है, तो एक साधारण सा फ्लू (Flu) भी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे मरीजों के लिए टीकाकरण एक सुरक्षा ढाल का काम करता है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
क्लिनिक में उपलब्ध प्रमुख जीवनरक्षक टीके और उनके फायदे
\r\n\r\n
फोर्टिस हॉस्पिटल के इस नए क्लिनिक में एक ही छत के नीचे दुनिया भर में प्रमाणित और अनुशंसित (Recommended) टीके उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    इन्फ्लुएंजा (Influenza / Flu Vaccine): हर साल मौसम बदलने पर फ्लू का वायरस अपना रूप (Strain) बदल लेता है। यह टीका मौसमी फ्लू, तेज बुखार और फेफड़ों के संक्रमण से बचाता है। विशेषकर बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए यह हर साल लगवाना अनिवार्य माना जाता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    निमोनिया (Pneumococcal Vaccine): 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में निमोनिया मृत्यु का एक बड़ा कारण है। यह टीका न्यूमोकोकल बैक्टीरिया से होने वाले जानलेवा निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और रक्त संक्रमण (Sepsis) से बचाता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B): यह लीवर को डैमेज करने वाली एक बेहद खतरनाक और साइलेंट बीमारी है, जो सिरोसिस और लीवर कैंसर का कारण बन सकती है। यह टीका लीवर को सुरक्षित रखने की गारंटी देता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    शिंगल्स (Shingles / Herpes Zoster Vaccine): उम्र बढ़ने के साथ बचपन का चिकनपॉक्स वायरस शरीर में दोबारा सक्रिय हो सकता है, जिससे त्वचा पर बेहद दर्दनाक चकत्ते (Rashes) और नसों में भयंकर दर्द (Postherpetic Neuralgia) होता है। शिंगल्स का टीका इस असहनीय पीड़ा से बचाता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    टिटनेस (Tetanus / Tdap Booster): किसी लोहे से कटने, चोट लगने या दुर्घटना होने पर टिटनेस का खतरा होता है। वयस्कों को हर 10 साल में इसका बूस्टर डोज लेना चाहिए।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    एचपीवी (HPV Vaccine): ह्यूमन पैपिलोमा वायरस महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) और पुरुषों में अन्य प्रकार के कैंसर का मुख्य कारण है। सही उम्र में यह टीका लगवाने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से 90% तक बचा जा सकता है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई और सकारात्मक सोच
\r\n\r\n
भारत में आज भी वयस्क टीकाकरण का प्रतिशत पश्चिमी देशों की तुलना में बेहद कम है। इसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी है। फोर्टिस हॉस्पिटल मुलुंड की यह पहल इसी कमी को पाटने का काम करेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अस्पताल प्रबंधन का स्पष्ट मानना है कि समय रहते जागरूकता और सही टीकाकरण के जरिए न केवल व्यक्तियों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि पूरे समाज को अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और उत्पादक बनाया जा सकता है। इलाज पर होने वाले लाखों रुपये के भारी भरकम खर्च और शारीरिक व मानसिक पीड़ा से बचने का सबसे आसान, सस्ता और वैज्ञानिक तरीका 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' ही है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अब समय आ गया है कि हम अपनी सेहत की जिम्मेदारी खुद लें। फोर्टिस हॉस्पिटल मुलुंड का यह 'वयस्क टीकाकरण क्लिनिक' सोमवार से शनिवार तक कार्यरत रहेगा। जिन वयस्कों की उम्र 50 वर्ष से अधिक है या जो किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें तुरंत अपने चिकित्सक से परामर्श कर अपना 'वैक्सीनेशन कैलेंडर' तैयार करवाना चाहिए। स्वस्थ भारत की दिशा में यह निश्चित रूप से एक मील का पत्थर साबित होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें