केरल: केरल में 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' (Naegleria fowleri) के बढ़ते मामले चिंता का विषय बन गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जहाँ दुनियाभर में इस दुर्लभ संक्रमण के 500 से भी कम मामले सामने आए हैं, वहीं अकेले केरल में 120 से ज़्यादा केस दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 19 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी का कोई सटीक इलाज या वैक्सीन नहीं होने के कारण यह बेहद जानलेवा साबित होती है।READ ALSO:-Amazon-Flipkart सेल में ऐसे मिलेगा एक्स्ट्रा डिस्काउंट, जानिए 3 शानदार तरीके
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क्या है ब्रेन-ईटिंग अमीबा?
\r\n\r\nसफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर के अनुसार, यह अमीबा गंदे और गर्म मीठे पानी में पनपता है। यह पीने के पानी से शरीर में प्रवेश नहीं करता, बल्कि नाक के रास्ते से दिमाग तक पहुँचता है। जब कोई व्यक्ति प्रदूषित तालाब, झील या स्विमिंग पूल में नहाता या तैरता है और पानी नाक के अंदर चला जाता है, तो यह अमीबा सीधे मस्तिष्क में पहुँचकर संक्रमण फैलाता है, जिसे प्राइमरी अमीबिक मेनिंजोएन्सेफलाइटिस (PAM) कहा जाता है।
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डॉ. किशोर बताते हैं कि इस संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होते हैं, जैसे सिरदर्द, बुखार और थकान। लेकिन, यह तेजी से बढ़ता है और बाद में मरीज को भ्रम, दौरे और कोमा जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ता है। इसकी मृत्यु दर 95% से भी अधिक है।
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केरल में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
\r\n\r\nदिल्ली के आरएमएल अस्पताल में मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि के मुताबिक, केरल में इस अमीबा के अधिक मामले सामने आने की कुछ खास वजहें हो सकती हैं:
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- \r\n गर्म और आर्द्र जलवायु: केरल की जलवायु इस अमीबा के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है।\r\n \r\n
- \r\n प्रदूषित जलाशय: लगातार बारिश के बाद बनने वाले तालाब और झीलों का लोग रोजमर्रा के कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।\r\n \r\n
- \r\n खराब रखरखाव: शहरी इलाकों में स्विमिंग पूल्स की सही साफ-सफाई न होने से भी यह संक्रमण फैल सकता है।\r\n \r\n
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कैसे करें बचाव?
\r\n\r\nइस खतरनाक बीमारी से बचाव ही एकमात्र उपाय है। इन तरीकों को अपनाकर आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं:
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- \r\n साफ पानी का उपयोग: पीने और नहाने के लिए हमेशा स्वच्छ या उबले हुए पानी का ही इस्तेमाल करें।\r\n \r\n
- \r\n सावधानी बरतें: खुले जलाशयों जैसे तालाबों और झीलों में नहाते समय यह सुनिश्चित करें कि पानी आपकी नाक में न जाए।\r\n \r\n
- \r\n पूल की सफाई: स्विमिंग पूल्स को नियमित रूप से क्लोरीन और अन्य रसायनों से साफ करवाएं।\r\n \r\n
- \r\n लक्षणों पर ध्यान दें: अगर आपको सिरदर्द, बुखार, उल्टी या गर्दन में अकड़न जैसे लक्षण दिखें तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।\r\n \r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.