नई दिल्ली: यदि आप किराए के मकान में रहते हैं या अपनी प्रॉपर्टी किराए पर दे रखी है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार ने साल 2025 के लिए किराए के नए नियम (Kiraye Ke Naye Niyam) लागू कर दिए हैं। इन नियमों का उद्देश्य किराएदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रेंटल मार्केट में पारदर्शिता लाना है।READ ALSO:-स्मार्टफोन कंपनियों को सरकार का अल्टीमेटम: अब डिलीट नहीं कर पाएंगे ये 'सरकारी ऐप', 90 दिन में हर फोन में डालना होगा जरूरी
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नए बदलावों के तहत अब रेंट एग्रीमेंट के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से लेकर टीडीएस (TDS) कटौती तक कई सख्त प्रावधान किए गए हैं। अगर आप हर महीने 50,000 रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो अब आपको टैक्समैन की भूमिका भी निभानी होगी, वरना आपको जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
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50,000 से ज्यादा किराए पर TDS का गणित

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नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई नौकरीपेशा, प्रोफेशनल या छोटा कारोबारी हर महीने 50,000 रुपये से ज्यादा किराया चुकाता है, तो उसे सावधान रहने की जरूरत है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 194-IB के तहत, ऐसे किराएदारों को मकान मालिक को भुगतान करते समय किराए में से 2% TDS (Tax Deducted at Source) काटना अनिवार्य कर दिया गया है।
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    कब कटेगा TDS: यह टैक्स साल में एक बार (मार्च महीने में) या किराएदारी खत्म होने वाले महीने में काटा जाना चाहिए।
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    किस पर लागू: टैक्स विभाग के अनुसार, अगर पिछले साल आपका बिजनेस टर्नओवर 1 करोड़ से कम या प्रोफेशन से आय 50 लाख से कम थी, तब भी यह नियम आप पर लागू होगा।
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    प्रक्रिया: टीडीएस काटने के बाद किराएदार को फॉर्म 26QC भरना होगा और मकान मालिक को फॉर्म 16C देना होगा। 
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नियम तोड़ने पर जेल और भारी जुर्माना

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सरकार ने किराए के नए नियम को सख्ती से लागू करने के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया है। अगर आप 50 हजार से ज्यादा किराया देने के बावजूद टीडीएस नहीं काटते या जमा नहीं करते, तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं।
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    जुर्माना: रोजाना 200 रुपये लेट फीस।
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    ब्याज: TDS न काटने पर 1% ब्याज और काट कर जमा न करने पर 1.5% ब्याज।
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    जेल: 10,000 से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना और गंभीर मामलों में 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल हो सकती है।
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60 दिन में रेंट एग्रीमेंट का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

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अब रेंट एग्रीमेंट सिर्फ नोटरी या स्टांप पेपर तक सीमित नहीं रहेगा। किराए के नए नियम के तहत, एग्रीमेंट साइन होने के 60 दिनों के भीतर उसका 'ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन' कराना अनिवार्य हो गया है। इससे मकान मालिक और किराएदार दोनों के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी और मनमाने एग्रीमेंट खत्म होंगे।
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    अगर 60 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया, तो 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कदम फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया गया है। 
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किराया बढ़ाने और घर खाली कराने पर लगाम

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अक्सर देखा जाता है कि मकान मालिक अचानक किराया बढ़ा देते हैं या घर खाली करने का फरमान सुना देते हैं। लेकिन किराए के नए नियम ने किराएदारों को बड़ा सुरक्षा कवच दिया है।
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    किराया बढ़ोतरी: मकान मालिक अब अचानक किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। इसके लिए उन्हें 90 दिन (3 महीने) पहले लिखित नोटिस देना होगा।
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    घर खाली कराना: बिना किसी ठोस वजह या रेंट ट्रिब्यूनल (Rent Tribunal) के आदेश के, किराएदार को जबरन घर से नहीं निकाला जा सकता। यह नियम बड़े शहरों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए राहत की खबर है।
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मरम्मत और निजता (Privacy) का अधिकार

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नए नियमों में घर की मरम्मत और मकान मालिक की विजिट को लेकर भी स्थिति साफ की गई है।
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    इंस्पेक्शन: मकान मालिक को घर की जांच या इंस्पेक्शन के लिए आने से 24 घंटे पहले किराएदार को सूचित करना होगा। वह बिना बताए घर में नहीं घुस सकता।
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    मरम्मत: जरूरी मरम्मत (जैसे पानी, बिजली) की मांग करने पर मकान मालिक को 30 दिनों के भीतर उसे ठीक कराना होगा। अगर वह ऐसा नहीं करता, तो किराएदार खुद मरम्मत कराकर उस खर्च को किराए में से काट सकता है। 
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विवादों का 60 दिन में निपटारा

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किराए के नए नियम का एक बड़ा फायदा यह है कि अब मकान मालिक और किराएदार के बीच के झगड़े सालों तक कोर्ट में नहीं लटकेंगे। किराए, सिक्योरिटी डिपॉजिट या नुकसान से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए एक समय सीमा तय की गई है। अब ऐसे मामलों को रेंट ट्रिब्यूनल द्वारा 60 दिनों के भीतर सुलझाया जाएगा।
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साल 2025 के ये किराए के नए नियम रेंटल हाउसिंग सेक्टर में अनुशासन लाने की एक बेहतरीन पहल हैं। जहां एक तरफ किराएदारों को सुरक्षा और सम्मान मिलेगा, वहीं मकान मालिकों को कानूनी रूप से मजबूत कॉन्ट्रैक्ट और समय पर भुगतान की गारंटी मिलेगी। हालांकि, 50,000 रुपये से ज्यादा किराया देने वालों को अब टैक्स अनुपालन (Compliance) पर विशेष ध्यान देना होगा।
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