राजधानी के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) ऐतिहासिक सफलताओं और बड़े भू-राजनीतिक फैसलों के साथ संपन्न हो गया। भारत की अध्यक्षता में हुए इस दो दिवसीय महाकुंभ में दुनिया के कई दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। कूटनीतिक वार्ताओं और मैराथन बैठकों के बाद आखिरकार 'नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026' को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।

आइए जानते हैं इस सम्मेलन की 10 सबसे बड़ी बातें, नेताओं के बयान और इसके दूरगामी प्रभावों के बारे में:
कौन-कौन शामिल हुआ?
इस बार के ब्रिक्स सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (7 साल बाद भारत दौरे पर), ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हिस्सा लिया।
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नई दिल्ली घोषणा-पत्र: 10 सबसे अहम बातें
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस: ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सीमा पार आतंकवाद (Cross-border terrorism) और इसके वित्तपोषण की कड़ी निंदा की। इसमें विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

UNSC में सुधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में विस्तार और सुधारों को अब और अधिक टालने से इनकार किया गया।
एकतरफा शुल्कों (Tariffs) पर चिंता: पश्चिमी देशों द्वारा थोपे जा रहे एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों और डब्ल्यूटीओ (WTO) नियमों के खिलाफ लगाए गए शुल्कों पर गहरी चिंता जताई गई।
पश्चिम एशिया और यूक्रेन संकट: गाजा और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता जताते हुए युद्धविराम और मानवीय सहायता की अनवरत आपूर्ति की मांग की गई।

वैकल्पिक वित्तीय तंत्र: अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देते हुए आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर मुहर लगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल गवर्नेंस: ग्लोबल साउथ की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 'भरोसेमंद AI' और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) को साझा करने पर सहमति बनी।
क्लाइमेट फाइनेंस और ग्रीन ट्रेड: पश्चिमी देशों द्वारा लाए जा रहे एकतरफा कार्बन टैक्स (CBAM) का खुलकर विरोध किया गया।
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असंगठित अपराधों पर लगाम: ड्रग्स तस्करी, हथियारों की अवैध सप्लाई और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए साझा क्रॉस-बॉर्डर खुफिया नेटवर्क बनाने का ऐलान।
स्वास्थ्य और उद्योग सहयोग: बेंगलुरु के NIMHANS के नेतृत्व में मानसिक स्वास्थ्य और ब्रिक्स इंडस्ट्रियल कॉम्पिटेंसेस सेंटर के जरिए MSME को बढ़ावा देने का फैसला।
संस्थागत निरंतरता: ब्रिक्स के कामकाज को गति देने के लिए एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी और ट्रैक-सिस्टम बनाने का निर्णय लिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी के तीखे तेवर: “ग्लोबल साउथ अब सिर्फ दर्शक नहीं, रूल-शेपर बनेगा”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में ब्रिक्स के 20 साल पूरे होने को ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। पीएम मोदी ने वैश्विक व्यवस्था पर करारा प्रहार करते हुए कहा:
“वैश्विक शासन की संरचना एक पिरामिड जैसी है, जिसके शीर्ष पर कुछ ताकतवर देश बैठे हैं और नीचे वे देश हैं जो फैसलों से भुगतते हैं। अब ग्लोबल साउथ को केवल दर्शक नहीं, बल्कि 'रूल-शेपर' (नियम तय करने वाला) बनना होगा।”

वैश्विक दिग्गजों ने क्या कहा?
व्लादिमीर पुतिन (रूस): रूसी राष्ट्रपति ने दुनिया के बहुध्रुवीय (Multipolar) होने की वकालत की और पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार कर निष्पक्ष वैश्विक वित्तीय प्रणाली बनाने पर जोर दिया।
शी जिनपिंग (चीन): चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रिक्स देशों को अन्य देशों की संप्रभुता के उल्लंघन और आंतरिक मामलों में दखलंदाजी का मिलकर विरोध करना चाहिए।
अन्य नेता: ईरान और अन्य सदस्य देशों ने भी एक स्वर में अमेरिकी-पश्चिमी प्रतिबंधों (Unilateral Sanctions) को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया।

क्या रहा सबसे बड़ा आकर्षण? (The Biggest Highlight)
इस सम्मेलन के दौरान सबसे बड़ा कूटनीतिक आकर्षण भारत और चीन के बीच संबंधों में जमी बर्फ का पिघलना रहा। 7 साल बाद भारत आए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में सीमा पर शांति बनाए रखने, व्यापारिक असंतुलन दूर करने और द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने को लेकर बनी सहमति ने पूरी दुनिया की मीडिया का ध्यान खींचा।
इसके अलावा, ईरान और यूएई जैसे देशों के बीच के भू-राजनीतिक मतभेदों को पाटने के लिए भारत की कूटनीति के चलते रात के 4 बजे तक मैराथन बैठकें चलीं, जिसके बाद सर्वसम्मति से ऐतिहासिक घोषणा-पत्र पास हो सका।
Sabse pehle comment karne wale banein.